उधर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नए साल के संदेश में कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों के दाम तर्कसंगत होने चाहिए, इधर सरकारी तेल कंपनियों ने नए साल के पहले कामकाजी दिन सोमवार से पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 2.10 रुपए से 2.13 रुपए बढ़ाने की तैयारी कर ली है। कंपनियों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से कच्चा तेल महंगा हो गया है। इसलिए पेट्रोल के दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी है। इसीऔरऔर भी

जो भी मंत्र, तंत्र या वस्तु हमारी बुद्धि व दृष्टि को तेज करती हो, उसका स्वागत है। लेकिन नजर को धुंधला और शक्ति को धूमिल करनेवाली हर चीज त्याज्य है क्योंकि वह किसी चालबाज का फेंका जाल है।और भीऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति शून्य के करीब पहुंच चुकी है। चीन ब्याज दरों में कटौती के मूड में है। भारत भी ब्याज दरों में कटौती से मुंह नहीं मोड़ सकता। इन सारी बातों से यही लगता है कि बाजार को अब पलटकर बढ़ना चाहिए। सेबी ने माना है कि आईपीओ में धांधली होती है और इनमें निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। लेकिन तथ्य यह है कि सबसे ज्यादा नुकसान खुद भारत सरकार को हुआ है क्योंकि आईपीओ मेंऔरऔर भी

हम अमूमन यही माने रहते हैं कि हम तो चलते रहे, जबकि दूसरे ठहरे रहे। पर ये कैसे संभव है? एक पांव वर्तमान और दूसरा अतीत में रखकर रिश्ते नहीं चल सकते हैं। उन्हें समय के साथ लाना जरूरी है।और भीऔर भी

बाजार में गिरावट का चक्र जारी है। निफ्टी 4701-80 तक जाने के बाद नीचे उतरा है। सेटलमेंट के आखिरी दिन उम्मीद के अनरूप भारी उथल-पुथल या वोलैटिलिटी का आलम है। लेकिन आगे के सारे संकेत शुभ नजर आ रहे हैं। मेरा मानना है कि दिसबंर सेटलमेंट के साथ 2011 में बद से बदतर जो भी होना था, हो चुका है। कल से एक नया सेटलमेंट शुरू हो रहा है जो 2012 का पहला सेटलमेंट है। यह बाजारऔरऔर भी

इकनॉनिक टाइम्स एकमात्र दिल्ली से छपनेवाला अपना हिंदी संस्करण बंद करने जा रहा है। आज, गुरुवार को उसकी टीम आखिरी बार अखबार का काम करेगी और कल शुक्रवार को उसका आखिरी अंक आएगा। फिर पटाक्षेप। तीन साल दस महीने दस दिन पहले 19 फरवरी 2008 को जब यह अखबार शुरू हुआ था तो प्रबंधन की तरफ से बड़े-बड़े वादे किए गए थे। हिंदी समाज को भी इससे बड़ी अपेक्षाएं थीं। लेकिन कम से कम लागत में ज्यादाऔरऔर भी

बहुत कम लोग हैं जिन पर देश-दुनिया का फर्क पड़ता है। इनमें से भी ज्यादातर लोग भावना में बहकर पूरा सच नहीं देख पाते, गुमराह हो जाते हैं। स्वार्थ में धंसे दुनियादार लोग उन पर हंसते है, तरस खाते हैं।और भीऔर भी

महीने के शुरू में एनालिस्ट समुदाय में भारी कयासबाजी चल रही थी कि दिसंबर का महीना ऐतिहासिक रूप से तेजी लेकर आता है और इस बार 4 से 10 फीसदी तेजी आ सकती है। लेकिन महीना खत्म होने को है और अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। आज समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने भी एक कयास भरी रिपोर्ट चलाई है कि जनवरी ऐतिहासिक रूप से बाजार के धसकने का महीना है और इस बार सेंसेक्स 10औरऔर भी

जो चीज सबके हित से जुड़ी हो, जिससे सबका वास्ता हो, उससे जुड़ी बातों को छिपाना गुनाह है। निजी बातों को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए। लेकिन सार्वजनिक बातों की परदादारी से भ्रष्टाचार उपजता है।और भीऔर भी

दुनिया के प्रमुख देशों के इक्विटी बाजार छुट्टियों के चलते बंद हैं, जबकि भारत का बाजार रोलओवर में व्यस्त है। चूंकि बाजार ओवरसोल्ड अवस्था में पहुंचा हुआ है, इसलिए रोलओवर इस समय शॉर्ट सौदों के हो रहे है और बाजार नीचे की दिशा पकड़कर उथल-पुथल मचा रहा है। फिर भी रुझान ऊपर की दिशा का है। निफ्टी आज सुबह 11 बजे से पहले 4800 तक पहुंच गया। लेकिन गिरा तो ऊपर-नीचे होता हुआ आखिर में 0.60 फीसदीऔरऔर भी