योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान से कम से कम एक फीसदी ज्यादा रहेगा। इस साल के बजट में अनुमान लगाया गया है कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.6 फीसदी रहेगा। लेकिन मोंटेक की मानें तो यह कम से कम 5.6 फीसदी रहेगा। उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली में कहा कि देश के आर्थिक विकास में छाती सुस्ती को दूर करने केऔरऔर भी

दो दिन पहले तक वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी कह रहे थे कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में देश की आर्थिक विकास दर घटकर 7.3 फीसदी पर आ जाएगी। लेकिन अब उनका कहना है कि यह दर 7.5 फीसदी रहेगी जो इस साल के बजट में बताए गए 9 फीसदी के अनुमान से काफी कम है। मुखर्जी ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि मुझे भरोसा है कि हम वृद्धि दर में आईऔरऔर भी

देश का विदेशी मुद्रा भंडार देश पर चढ़े विदेशी ऋण से कम हो गया है। इन हालात में रिजर्व बैंक चाहकर भी रुपए को गिरने से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। शुक्रवार को वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने लोकसभा में बताया कि अद्यतन आंकड़ों के अनुसार भारत का विदेशी ऋण जून 2011 के अंत तक 316.9 अरब डॉलर का था। वहीं, रिजर्व बैंक की तरफ से दी गई जानकारीऔरऔर भी

बाजार अचानक कुछ ज्यादा ही उत्साह में है। कल मैंने कहा था कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती की घोषणा कर सकता है। आज वही बात कुछ बिजनेल चैनलों व समाचार एजेंसियों ने चला दी। फिर इसे कुछ फंड मैनेजरों ने हवा दे दी। बाजार में चर्चा चल पड़ी कि आज ही बाजार बंद होने के बाद रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती की घोषणा कर सकता है। फिर क्या था! बाजार बढ़ा तो बढ़ता हीऔरऔर भी

अच्छे लोग, बुरे लोग। अच्छी कंपनियां, बुरी कंपनियां। अब अगर आप निवेश के लिए किसी ईश्वर भुवन होटल्स जैसी गुमनाम कंपनी को चुनते हैं तो सचमुच ईश्वर ही आपका मालिक है। कंपनी आपकी बचत लेकर गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाएगी। लेकिन क्या करें! हम तो फास्टफूड के आदी हो चुके हैं। सब कुछ पका-पकाया चाहिए। किसी ने बताया, टिप दी, खरीद लिया। डूब गए तो शेयर बाजार को लाख-लाख गालियां देने लगे।औरऔर भी

जीतने के भाव के साथ ही जीने का आनंद है। बाकी नहीं तो हारे को हरिनाम है। यह भाव आप किसी संस्था का हिस्सा बनकर हासिल कर लेते हैं या अपने दम पर लड़ते हुए नई प्रासंगिक संस्थाएं बनाकर।और भीऔर भी

देश के गली-मोहल्लों तक बिखरी 55 लाख किराना दुकानों के व्यापारी सड़कों पर उतरे। उनमें डर समा गया है कि मल्टी-ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) आने से उनका वजूद मिट सकता है। दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले के खिलाफ गुरुवार को बुलाए गए भारत बंद में पांच करोड़ लोगों ने शिरकत की है। दावों की सत्यता नापने का कोई जरिया नहीं है। लेकिन यह सच है किऔरऔर भी

सरकार के सामने कृषि क्षेत्र की विकास दर को बढ़ाने की जबरदस्त चुनौती आ खड़ी हो गई है। अगर देश में 9 फीसदी आर्थिक विकास दर हासिल करना है तो कृषि क्षेत्र को कम से कम 4 फीसदी बढ़ना होगा। ऐसी ही चिंता और चुनौती के बीच खुद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील की तरफ से राज्यपालों की एक समिति गठित की गई है। यह समिति खासतौर पर वर्षा आधारित खेती की उत्पादकता, लाभप्रदता, टिकाऊपन और होड़ में टिकेऔरऔर भी

चालू वित्त वर्ष 2011-12 में अब तक हर महीने कुलांचे मारकर बढ़ रहे निर्यात की रफ्तार अक्टूबर में अचानक थम गई है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में हमारा निर्यात 19.87 अरब डॉलर रहा है जो अक्टूबर 2010 में हुए 17.93 अरब डॉलर से मात्र 10.82 फीसदी ज्यादा है। इससे पहले हमारे निर्यात के बढ़ने की दर अप्रैल में 34.42 फीसदी, मई में 56.93 फीसदी, जून में 46.45 फीसदी, जुलाईऔरऔर भी

आर्थिक रफ्तार के थमने ने कम से कम चीन को इतनी सद्बुद्धि तो दे दी कि उसने बैंकों के लिए निर्धारित कैश रिजर्व अनुपात में कमी कर दी है, जबकि इसकी अपेक्षा भारत में की जा रही थी। अपने यहां तो लगता है कि राजनीति देश और देशवासियों से ज्यादा बड़ी हो गई है। देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) महज 6.9 फीसदी बढ़ा, जो 2009 के न्यूनतम स्तर 5.5 फीसदी के काफी करीब है। ऐसे मेंऔरऔर भी