शुक्रवार को डर था कि आज कहीं काला सोमवार न हो जाए। लेकिन आज तो पूरा परिदृश्य ही बदला हुआ था क्योंकि इटली के अखबार में छपी एक खबर के मुताबिक आईएफएम ने कह दिया कि इटली को संकट से निकालने के लिए वो वित्तीय मदद देने को तैयार है। हालांकि बाद में आईएमएफ के प्रवक्ता ने इसका खंडन कर दिया। खैर, इस दरम्यान हमारे उस्ताद लोग इसे यूरोप के संकट में राहत बताकर बाजार को चढ़ानेऔरऔर भी

रिटेल में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में सोमवार को भी विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई थी। इस बीच पता चला है कि संसद में जारी गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार सर्वदलीय बैठक बुला सकती है। इस सिलसिलेऔरऔर भी

आर्थिक हालात पर नजर रखनेवाली देश की निष्पक्ष संस्था, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान घटा दिया है। सीएमआईई के मुताबिक इस साल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 7.8 फीसदी वृद्धि का अनुमान है। इससे पहले उसने 7.9 फीसदी वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। अपनी मासिक रिपोर्ट में सीएमआईई ने कहा है कि विभिन्न सेक्टरों की वृद्धि दर में भारी गिरावट केऔरऔर भी

देश की औद्योगिक रफ्तार में आती कमी और डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार के बैरोमीटर, बीएसई-सेसेक्स की 30 में से 19 कंपनियों में सितंबर 2011 की तिमाही के दौरान अपना निवेश घटा है। जिन कंपनियों में एफआईआई का निवेश स्तर कम हुआ है, उनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा मोटर्स और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शामिल हैं। बीएसई व एनएसई पर उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार जून सेऔरऔर भी

सभी आवश्यक सूचनाओं तक सबकी पहुंच। किसी भी बाजार के कुशलता से काम करने की यह अनिवार्य शर्त है। ध्यान दें, सूचनाओं की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं, उनकी पहुंच जरूरी है। जो फेंच न जानता हो, उसे फ्रेंच में जानकारी देना महज एक अनुष्ठान भर पूरा करना है। लेकिन अपने यहां, खासतौर पर शेयर बाजार में यही हो रहा है। एक तो सारी सूचनाएं अंग्रेजी में, दूसरे ऐसा घालमेल कि आम निवेशकों को कुछ पल्ले ही नऔरऔर भी

अजब तमाशा है ये ज्ञान की दुनिया। बाहर जाओ तो अंदर पहुंचते हो और अंदर पैठो तो बाहर का धुंधलका छंटने लगता है। शायद वही-वही संरचनाएं अंदर से बाहर तक थोड़े-बहुत अंतर के साथ फैली पड़ी हैं।और भीऔर भी

ख्वाब देखें बड़ा। लेकिन बोलें छोटा। होता यह है कि ज्यादातर लोग सपने तो छोटे देखते हैं, पर बोलते हैं बढ़ा-चढ़ाकर। झूठे गुरूर में डूबे ऐसे लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे कब जगहंसाई के पात्र बन गए।और भीऔर भी

शेयर बाजार किसी इलाहाबाद का मीरगंज, दिल्ली का श्रद्धानंद मार्ग या मुंबई का कमाठीपुरा नहीं है कि गए और चोंच मारकर आ गए। यहां रिश्ते चंद रातों के नहीं, सालों-साल के बनते हैं। यहां के रिश्ते एकतरफा भी नहीं होते। दोनों पक्षों को भरपूर मिलता है। न मिले तो सब कुछ टूट जाता है, सारा औद्योगिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। यह करीब पांच सौ साल पहले उत्तरी यूरोप से शुरू हुआ वो जरिया है जिससे व्यक्तियोंऔरऔर भी

आप खुद को कितना भी बडा़ तोप-तमंचा समझते रहें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क इस बात से पड़ता है कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं और यह सोच खुद नहीं बनती, सायास बनानी पड़ती है।और भीऔर भी

किसी समय हमारे किसान देसी खाद का ही इस्तेमाल करते थे। लेकिन रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते और पशुपालन के घटते चलन ने इसे खत्म कर दिया। इस समय देश में कुल कृषियोग्‍य भूमि के 3% से कम भाग में जैव-उर्वरकों का उपयोग होता है। वह भी पहले से बढ़ने के बाद। जैव-उर्वरकों का कुल उत्‍पादन वित्‍त वर्ष 2008-09, 2009-10 और 2010-11 में क्रमशः 25,065 टन, 20,040 टन और 37,998 टन रहा है। सरकार इधर राष्ट्रीय कृषि विकासऔरऔर भी