चालू वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल से अक्टूबर तक के सात महीनों में सरकार का अप्रत्यक्ष कर संग्रह पिछले साल की समान अवधि से 42.4 फीसदी ज्यादा रहा है। वित्त मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक कस्टम, सेंट्रल एक्साइज व सर्विस टैक्स जैसी मदों से सरकार को अप्रैल-अक्टूबर 2010 के दौरान कुल 1,80,261 करोड़ रुपए का कर-राजस्व मिला है। यह रकम इस साल में अप्रत्यक्ष कर संग्रह के बजट अनुमान का 57.5 फीसदी है। पूरे साल मेंऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने इस साल फरवरी में ही ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) की सलाह पर छह विशेषज्ञों की एक कमिटी बना दी थी जिसे तय करना था कि भारत में डायबिटीज की दवा रोज़िग्लाइटाज़ोन की बिक्री व इस्तेमाल पर कैसे बैन लगाया जाए। तब तक अमेरिका का खाद्य व औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) ढिढोरा पीट चुका था कि इस दवा के इस्तेमाल से मरीज को दिल की बीमारी हो सकती है और वह मर भी सकता है।औरऔर भी

1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत में सत्ता की बागडोर अपने हाथों में लेते ही ब्रिटिश सरकार ने सार्वजनिक खातों के लेखा-परीक्षण की अहमियत समझ ली थी। उसने 16 नवंबर 1860 को भारत का पहला महा लेखा-परीक्षक एडमंड ड्रुमंड को बनाया था। ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद भारत 1950 में गणराज्‍य बन गया और महा लेखा-परीक्षक का पद जारी रहा हालांकि इसका नाम बदलकर भारत का नियंत्रक एवं महा लेखा-परीक्षक (सीएजी या कैग) कर दियाऔरऔर भी

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा को वर्ष 2008 में नई कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्रालय और विधि मंत्रालय की सलाह को नजरअंदाज करने का दोषी करार दिया है। मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में इस मामले में पेश कैग की एक रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार मंत्री के रूप में राजा के इस रवैये से सरकार को 1. 76 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व काऔरऔर भी

बाजार पिछले दिनों दीवाली पर 21,000 अंक तक ऊंचा जाने के बाद से खुद को जमा रहा है। लेकिन कोरिया में ब्याज दरों के बढ़ने और आयरलैंड सरकार के 69 अरब डॉलर के डिफॉल्ट ने रिटेल निवेशकों के बीच कुछ हद तक अनिश्चितता पैदा कर दी है। फिर, राष्ट्रमंडल खेलों के घोटाले, टेलिकॉम घोटाले और आदर्श घोटाले जैसे राजनीतिक मामलों के साथ ही एलआईसी को 14,000 करोड़ रुपए के नुकसान की खबर ने भी निवेशकों के दिमागऔरऔर भी

मैंगलोर केमिकल्स एंट फर्टिलाइजर्स का शेयर इसी 3 नवंबर को 52 हफ्ते के शिखर 48.25 रुपए पर जा पहुंचा था। उसके बाद से ढलान पर है। कल बीएसई (कोड – 530011) में 1.28 फीसदी की गिरावट के साथ 42.40 रुपए और एनएसई (MANGCHEFER) में 1.40 फीसदी की गिरावट के साथ 42.35 रुपए पर बंद हुआ है। जहां बीएसई में इसके 7.64 लाख शेयरों का, वहीं एनएसई में 10.44 लाख शेयरों का कारोबार हुआ है। यह अच्छी कंपनीऔरऔर भी

कहा जाता है कि मेहनत से किसी को कुछ भी मिल सकता है। लेकिन सच यह है कि अकेली मेहनत से आप अपने सामाजिक-आर्थिक ऑरबिट या वर्ग की हद तक ही बढ़ सकते हैं। उससे ज्यादा नहीं।और भीऔर भी

भाई लोगों ने नतीजे घोषित होने से पहले महिंद्रा सत्मय की क्या धुनाई की है? बीएसई में यह शेयर खुला पहले से बढ़कर 87 रुपए पर। दोपहर साढ़े बारह बजे तक 88.40 रुपए तक पहुंच गया। शेयर कमोबेश इसी दायरे में चल रहा था कि अचानक पौने दो बजे के आसपास खिलाड़ी लोग इसे गिराकर 81.90 रुपए तक ले गए। फिर तो शाम को बाजार की समाप्ति तक यह दबा-दबा ही रहा और बंद हुआ शुक्रवार केऔरऔर भी

लोकसभा में सोमवार को एक तरफ विपक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति बनाने की मांग कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उसके हंगामे की परवाह न करते हुए चालू वित्त वर्ष 2010-11 के आम बजट के अनुदान की अनुपूरक मांगें पेश कीं। वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार को इस बार खर्चों के लिए बजट के ऊपर से 44,945.52 करोड़ रुपए चाहिए। इसमें से 25,132.55 करोड़ रुपए तोऔरऔर भी

देश की 1.44 लाख बस्तियों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी खुद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री सी पी जोशी ने दी है। उनके मुताबिक एक अप्रैल 2010 तक देश की 1.44 लाख बस्तियों के पेयजल में फ्लोरीन, लवण, लोहा, आर्सेनिक या नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा पायी गई है। इसमें 26,131 बस्तियों के पेयजल में अत्यधिक फ्लोरीन, 28,398 बस्तियों में अत्यधिक लवण, 79,955 बस्तियों में अत्यधिक लोहा, 6548 बस्तियों में अत्यधिक आर्सेनिक और 3032 बस्तियों मेंऔरऔर भी