विदा लेते साल 2010 के दौरान देश में भ्रष्टाचार और घोटालों के कई मामले सामने आए। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फीसदी की तेज रफ्तार के साथ आगे बढती दिखाई दी। पहले राष्ट्रमंडल खेल आयोजन में भ्रष्टाचार, फिर कॉरपोरेट जगत के लिये जनसंपर्क का काम करनेवाली नीरा राडिया के नेताओं, अधिकारियों और पत्रकारों के साथ बातचीत के टेप के सार्वजनिक होने और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से उठा तूफान। इन सब विवादों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फीसदीऔरऔर भी

करीब 30 लाख लोगों को बतौर एजेंट रोजगार देनेवाली जीवन बीमा कंपनियां इस समय अपना कमीशन बचाने और एजेंटों को ग्रेच्युटी व नवीनीकरण प्रीमियम से वंचित करने के लिए नया दांव खेल रही हैं। वे हर साल जितने नए एजेंटों की भरती करती हैं, उससे ज्यादा एजेंटों को निकाल देती हैं। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की 2009-10 की सालाना रिपोर्ट से यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में वित्त वर्ष 2009-10 में कुलऔरऔर भी

साल 2010 में 5700 से 6160 तक। यह रहा है साल के शुरू से लेकर अंत का निफ्टी का सफर। निफ्टी एक मुकाम हासिल कर चुका है। अब स्टॉक्स भी जनवरी 2011 में ऐसा करेंगे। आप स्क्रीन देखते हैं, बिलखते हैं और अपना हौसला खो बैठते हैं। लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं। यह भारतीय बाजार के सिस्टम की नाकामी है। दिसंबर के सेटलमेंट में जिन स्टॉक्स के भावों में गिरावट आई, वे कभी सुधर करऔरऔर भी

दाग हमेशा तो नहीं, लेकिन कभी-कभी अच्छे होते हैं। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के आला अधिकारी पर रिश्वतखोरी का दाग नहीं लगता तो उसके शेयर 36.77 फीसदी नहीं गिरते। 23 नवंबर को इस कांड के उजागर होने से पहले 23 नवंबर को यह शेयर 261.63 रुपए पर था और 10 दिसंबर को 165.41 तक गिर गया। हालांकि तब यह शेयर दस रुपए का अंकित मूल्य का था और उसका वास्तविक भाव 1308.15 रुपए से गिरकर 827.05 रुपए तकऔरऔर भी

ज़िंदगी में पुराने का जाना और नए का आना रिले रेस की तरह नहीं, समुद्र की लहरों की तरह चलता है। लेकिन हम पुरानी लहर के भीतर बन रही नई लहर को नहीं देख पाते और खामखां परेशान हो जाते हैं।और भीऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति की दर बढ़कर दस हफ्तों के शिखर पर जा पहुंची है। 18 दिसंबर को खत्म सप्ताह में यह 14.44 फीसदी दर्ज की गई है। यह वृद्धि इसलिए भी भयंकर हो जाती है क्योंकि साल भर पहले खाद्य मुद्रास्फीति 21.29 फीसदी बढ़ी थी। इसलिए यह महज तकनीकी या सांख्यिकीय मामला नहीं है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को भी यह बात स्वीकार करनी पड़ी जब उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की ऊंची दर वास्तविक है और कम आधारऔरऔर भी

जहां तक निफ्टी का ताल्लुक है, वह अब प्रतिरोध का स्तर तोड़ चुका है और 6500 अंक की तरफ बढ़ रहा है। आज का दिन जय जलाराम का हो गया लगता है। कहने का मतलब यह है कि फिजिकल सेटलमेंट के न होने के चलते बाजार चलानेवालों ने अपनी मनमर्जी से स्टॉक्स को नचाया है। हालांकि इसमें कुछ नया नहीं है। यह हमारे शेयर बाजार का दस्तूर बन चुका है। अभी बाजार में तूफान के पहले कीऔरऔर भी

टाटा मेटलिक्स का शेयर कल बीएसई (कोड – 513434) में 4.32 फीसदी और एनएसई (कोड – TATAMETALI) में 3.80 फीसदी बढ़ा है। अभी 131 रुपए के आसपास चल रहा है। बीते तीन महीनों के दौरान वह 162 रुपए तक जाकर नीचे में 121 रुपए तक गया है। पिछले 52 हफ्ते में 167 रुपए का उच्चतम स्तर उसने इसी साल 26 अप्रैल को हासिल किया था। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 23.77औरऔर भी

जो हुआ, जैसे हुआ, उसे वैसा ही होना था। पछताना क्या? हमारे साथ नहीं होता तो किसी और के साथ होता। बस, नाम बदल जाता। घात-प्रतिघात से ही जीवन बनता है और हमारे कर्मों से संवरता है।और भीऔर भी

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर विपक्ष संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाने की मांग पर डटा हुआ है। लोकसभा सचिवालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अब तक संसद ने बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच के लिए चार बार जेपीसी का गठन किया है। 987 में बोफोर्स तोप सौदे में दलाली के आरोपों की जांच के लिए पहली बार जेपीसी गठित की गई थी। इसके बाद हर्षद मेहता घोटाले की जांच के लिए 1992 में, केतन पारेख के घोटालेऔरऔर भी