शुक्रवार को जब दुनिया भर के तमाम बाजारों के सूचकांक धांय-धांय गिर रहे थे, बीएसई सेंसेक्स 3.97 फीसदी और एनएसई निफ्टी 4.04 फीसदी गिर गया था, तब भारतीय शेयर बाजार का एक सूचकांक ऐसा था जो कुलांचे मारकर दहाड़ रहा है। यह सूचकांक है एनएसई का इंडिया वीआईएक्स जो यह नापता है कि बाजार की सांस कितनी तेजी से चढ़ी-उतरी, बाजार कितना बेचैन रहा, कितना वोलैटाइल रहा। जी हां, अमेरिका के एक और आर्थिक संकट से घिरऔरऔर भी

अभी कुछ दिन पहले तक जो सरकार बढ़ती महंगाई के बीच राजनीतिक बवाल के डर से डीजल के मूल्यों को छेड़ने से डर रही थी, उसे विपक्ष ने ऐसा मौका दे दिया है कि वह बड़े उत्साह से इस पर मूल्य नियंत्रण उठाने की तैयारी में जुट गई है। इसका सबसे पहला वार उन लोगों पर होगा जो डीजल से चलनेवाली कारें इस्तेमाल करते हैं। लोकसभा में महंगाई पर चल रही बहस का जवाब देते हुए वित्तऔरऔर भी

लोकसभा में मुद्रास्फीति या महंगाई पर बहस जारी है। उम्मीद है कि गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर मुद्रास्फीति पर चिंता जताई जाएगी और सरकार से कहा जाएगा कि वह कीमतों पर काबू पाने के लिए कुछ और कदम उठाए। लेकिन बुधवार को सांसदों ने महंगाई के मसले पर जिस तरह शब्दों की तीरंदाजी दिखाई है, उसने साबित कर दिया है कि हमारे सांसद आर्थिक मामलों में कितने ज्यादा निरक्षर हैं। वह भी महंगाई जैसे मसले परऔरऔर भी

स्टॉक एक्सचेंजों को दिन में कारोबार की समाप्ति पर निवेशकों को उनके नाम पर किए गए सौदे की जानकारी एसएमएस या ई-मेल से भेज देनी होगी। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने मंगलवार को सभी स्टॉक एक्सचेंजों को भेजे गए एक सर्कुलर में यह हिदायत दी है। उसने कहा है कि यह काम जितना जल्दी से जल्दी हो, शुरू हो जाना चाहिए। लेकिन किसी भी हालत में इस पर अमल यह सर्कुलर जारी करने की तिथि केऔरऔर भी

जो लोग विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की पूंजी के दम पर शेयर बाजार में तेजी की आस लगाए हुए हैं, उनके लिए बुरी खबर है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में देश में एफआईआई निवेश घटकर मात्र 14 अरब डॉलर रह जाएगा। यह पिछले वित्त वर्ष 2010-11 में आए 30 अरब डॉलर के एफआईआई निवेश का आधा भी नहीं है। यह अनुमान और किसी का नहीं, खुद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) का है।औरऔर भी

एक हफ्ते देरी से ही सही, नए ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार, 29 जुलाई को भूमि अधिग्रहण व पुनर्वास पर नया विधेयक सार्वजनिक बहस के लिए पेश कर दिया। उन्होंने मंत्री बनने के एक दिन बाद 13 जुलाई को एक हफ्ते में ऐसा कर देने की बात कही थी। विधेयक मंत्रालय की वेबसाइट पर रख दिया गया है, जिस पर कोई भी अपनी प्रतिक्रिया 31 अगस्त तक भेज सकता है। अंतिम विधेयक को संसद केऔरऔर भी

कैबिनेट ने लोकपाल विधेयक के मसौदे को गुरुवार को मंजूरी दे दी और इस विधेयक को अगले हफ्ते सोमवार, एक अगस्त से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में एक-दो दिन के भीतर ही पेश कर दिया जाएगा। प्रस्तावित विधेयक के तहत केंद्रीय मंत्री से लेकर सांसद और ए ग्रुप के अफसर तक लोकपाल के दायरे में आएंगे। उन्हे दंडित करने के लिए लोकपाल को सीआरपीसी, 1973 के सेक्शन 197 या भ्रष्टाचार निरोधक अधनियम 1988 केऔरऔर भी

बताते हैं कि रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव ने मुद्रास्फीति के मोर्चे पर ठंडी पड़ी सरकार को झटका देने के लिए ही उम्मीद के विपरीत ब्याज दरों को एकबारगी 0.50 फीसदी बढ़ाया है। पिछले 17 महीनों से थोड़ी-थोड़ी ब्याज वृद्धि का डोज काम न आने से हताश रिजर्व बैंक ने तेज झटका देकर गेंद अब सरकार के पाले में फेंक दी है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी सुब्बाराव का इशारा समझ में आ गयाऔरऔर भी

मुद्रास्फीति के बढ़ते जाने की चिंता रिजर्व बैंक पर लगता है कि कुछ ज्यादा ही भारी पड़ गई है। इसको थामने के लिए उसने ब्याज दरों में सीधे 50 आधार अंक या 0.50 फीसदी की वृद्धि कर दी है। इतनी उम्मीद किसी को भी नहीं थी। आम राय यही थी कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे थे कि औद्योगिक धीमेपन को देखते हुए शायद इस बारऔरऔर भी

देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जून 2011 की तिमाही में अब तक की किसी भी तिमाही से ज्यादा शुद्ध लाभ कमाया है। लेकिन बाजार व विश्लेषकों के अनुमान से यह जरा-सा पीछे रह गया। बाजार को अपेक्षा 5720 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ की थी, जबकि कंपनी ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में 5661 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। यह साल भर पहले की इसी अवधि के 4851औरऔर भी