2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के शासन वाली एनडीए सरकार को भी घसीट लिया है और 2001 से ही जांच कराने की बात की है। इसके बाद लगता है कि राजनीतिक गतिरोध आखिरकार अब खत्म हो जाएगा। घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की विपक्ष की मांग ठंडी पड़ जाएगी। थोड़ी आस बनने लगी है कि संसद में कामकाज शुरू हो जाएगा और इस मसले पर बहस हो सकेगी। लेकिन बाजारऔरऔर भी

दुनिया और घरेलू बाजार को लेकर जितनी भी चिंताएं जताई जा रही हैं, वे सभी अतिरंजित हैं, काफी ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर उन्हें पेश किया जा रहा है। पूंजी बाजार में घोटाले का शोर है, लेकिन यह घोटाला कितने का है, इसका कोई बड़ा आंकड़ा सामने नहीं आया है। हां, इतना जरूर हुआ है कि आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर ने बाजार के माहौल को बड़ा संगीन व डरावना बना दिया है। आखिर पुराने फ्रॉड और घोटालों पर चर्चा करनेऔरऔर भी

बाजार में अफवाहों का चक्र घूम रहा है कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी केतन पारेख (केपी) से जुड़े स्टॉक्स के खिलाफ आदेश सुनाने जा रही है। ऐसे स्टॉक्स में रेलिगेयर, सुज़लॉन, डीबी रीयल्टी, गोदरेज प्रॉपर्टीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस, जेएसडब्ल्यू पावर, पैंटालून, अडानी एंटरप्राइसेज, बीजीआर एनर्जी और आशापुरा माइनकेम का नाम लिया जा रहा है। बड़ी चालाकी से कोई ये सारी कहानियां प्लांट करा रहा है ताकि बाजार में भागमभाग मचे और वो अपना खेल करऔरऔर भी

घोटाले में कुछ और कंपनियों का नाम आने और कुछ और कंपनियों के निचले सर्किट ब्रेकर तक चले जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। आज मिडफील्ड इंडस्ट्रीज और कुछ अन्य रिसोर्स कंपनियों के स्टॉक निचले स्रर्किट तक चले गए हैं। मिडफील्ड में 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है और यह 317.95 रुपए तक पहुंच गया है। वैसे यह चल भी 60 पी/ई के ऊपर रहा था। इस माहौल में आपके लिएऔरऔर भी

हम में से बहुत लोग लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय खुद बहुत कम सोचते हैं। ज्यादातर वे एजेंट की बातों पर भरोसा करते हैं या उसकी वाकपटुता के जाल में आकर फैसला कर बैठते हैं और एजेंट उन्हें अपने मन मुताबिक (कमीशन-माफिक) लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेच देता है। फिर क्या करें: सिर्फ यह कीजिए कि  फैसला खुद लीजिए कि आपको  कौन-सी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी  खरीदनी है? एजेंट द्वारा सुझाई गई कम प्रीमियम वाली पॉलिसी को तभी तवज्जोऔरऔर भी

डाउ जोंस 11,300 के ऊपर बढ़कर बंद हुआ। यह ब्रेक-आउट का साफ संकेत है और यह अब 15,000 की तरफ बढ़ेगा। पहला पड़ाव 11,800 का है। यह तेजी अमेरिका में दूसरी क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई-2) का असर है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दिए जानेवाले इस प्रोत्साहन की तारीख घोषित हो चुकी है। इसका आकार 3.3 लाख करोड़ डॉलर का हो सकता है। हालांकि अमेरिकी सीनेट ने पहले 60 करोड़ डॉलर की राशि ही पारित की थी। आप इसकी अहमियतऔरऔर भी

बाजार कल 350 अंक बढ़ा था तो सामान्य तौर पर उसे आज गिरकर बंद होना चाहिए था। लेकिन चूंकि बाजार में कोई खास पोजिशन नहीं बन रखी हैं, इसलिए आज बाजार का बढ़ना वाजिब माना जा सकता है। सेंसेक्स 20,000 के पार जाने के बाद 142.70 अंक की बढ़त के साथ 19992.70 पर बंद हुआ तो निफ्टी 50.80 अंक बढ़कर फिर से 6000 के ऊपर पहुंच गया और बंद हुआ 6011.70 के स्तर पर। कमाल की बातऔरऔर भी

सेंचुरी टेक्सटाइल्स के 400 से बढ़कर 455 रुपए और एचडीआईएल के 164 से बढ़कर 200 रुपए तक पहुंचने ने साफ-साफ रीयल्टी सेक्टर में छिपी संभावनाओं की झलक दिखा दी है। यह बात आप खुली आंखों से देख सकते हैं। लेकिन भविष्य के गर्भ में छिपी लंबी कहानी आपको दिमाग लगाकर पढ़नी होगी। निफ्टी 5750 से पलटकर 5960 तक आ चुका है। बहुत से लोग अब भी कह रहे हैं कि यह तात्कालिक राहत की रैली है। लेकिनऔरऔर भी

लोगों में बीमा की जागरूकता बढ़ रही है। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की तरफ से जारी किए गए ताजा आंकड़े यही तस्वीर पेश कर रहे हैं। इस साल सितंबर की तिमाही में एकल और गैर-एकल प्रीमियम वाली पॉलिसियों में सम-एश्योर्ड 2,68,945.36 करोड़ रुपए रहा है, जबकि साल पहले की सितंबर तिमाही में यह बीमा कवर 2,46,482.45 करोड़ रुपए का था। इस तरह सालाना तुलना में सम-एश्योर्ड 15.33 फीसदी बढ़ गया है। लेकिन इसमें नोट करने कीऔरऔर भी

मैं दस साल के नजरिए से अर्थव्यवस्था और बाजार व कॉरपोरेट क्षेत्र की स्थिति को देखता हूं। इसलिए महसूस कर सकता हूं कि क्या हो रहा है। लेकिन निवेशक तो दस घंटे की बात भी नहीं देख पाते। इसलिए बाजार के खिलाड़ियों के हाथ में अपनी गरदन पकड़ा देते हैं। मैं भी एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों को उनका पोर्टफोलियो बनाने-संभालने की सलाह देता हूं। लेकिन उन्हें नुकसान नहीं हुआ क्योंकि वे कभी भी कर्ज लेकर बाजारऔरऔर भी