बाजार की हालत दुरुस्त हो चली है और एफआईआई ने अच्छे शेयरों को बटोरना शुरू कर दिया है। मीडिया की सुर्खियां भी दिखाती हैं कि हाउसिंग लोन घोटाले या रिश्वतखोरी का मामला अब धीरे-धीरे सम हो रहा है। हालांकि बाजार के लोगों को अब भी समझ में नहीं आया है कि यह गिरावट एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों और ऑपरेटरों को ठिकाने लगाने के लिए थी क्योंकि रिटेल ने कोई खास खरीद कर नहीं रखी थी। खरीदऔरऔर भी

गाढ़ी कमाई के पैसे पर कोई अय्याशी नहीं करता। आसानी से मिले पैसे ही उड़ाए जाते हैं। मान लीजिए किसी ने दस साल में मेहनत से 50 लाख रुपए जुटाए हैं तो वह इसका बहुत हुआ तो 10 फीसदी हिस्सा ही कार, विदेश यात्रा और मौजमस्ती पर खर्च करेगा। लेकिन अगर किसी ने एक झटके में इतनी रकम बनाई है तो 100 फीसदी रकम वह महंगी कार, विदेश यात्रा, बिजनेस क्लास में सफर और फाइव स्टार होटलोंऔरऔर भी

कभी-कभी कुछ चीजों का साक्ष्य नहीं होता, लेकिन इससे वो चीजें गलत नहीं हो जातीं। मैं यहां ईश्वर जैसी सत्ता की नहीं, बल्कि शेयर बाजार में अभी हाल में चले खेल की बात कर रहा हूं। साधारण-सी रिश्वतखोरी को बडे घोटाले की तरह पेश करना, लोड सिंडिकेशन के काम में लगी मनी मैटर्स फाइनेंशियल सर्विसेज को निपटाना, सेंसेक्स से ज्यादा मिड कैप और स्माल कैप शेयरों को पीट डालना, कुछ ऑपरेटरों को रत्ती भर भी आंच नऔरऔर भी

बाजार में अभी चली गिरावट का माहौल बहुत सारी वजहों ने बनाया था। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, राष्ट्रमंडल खेलों का भ्रष्टाचार, संसद में गतिरोध, कोरिया का झगड़ा, आयरलैंड का ऋण संकट और इसके ऊपर से रीयल्टी सेक्टर को लोन देने में बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के आला अफसरों की घूसखोरी। लेकिन मुझे लगता है कि बाजार इन मसलों को लेकर कुछ ज्यादा ही बिदक गया। वैसे, अच्छी बात यह है कि ज्यादा धन या लिक्विडिटी के प्रवाह केऔरऔर भी

हम बराबर कहते रहे हैं कि ऐसे स्टॉक को मत हाथ लगाइए जो काफी महंगे हैं यानी जिनका पीई अनुपात बहुत ज्यादा है। खासतौर पर हमने आपको बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के बारे में आगाह किया था। बैंकिंग में आप वास्तविक स्थिति से रू-ब-रू हो चुके हैं। ऑटो में अभी थोड़ा वक्त है और बजट तक इंतजार किया जा सकता है। हमने आपको ऐसी नई रीयल्टी कंपनियों के बारे में भी चेताया था जिन्होंने जमीन का जखीराऔरऔर भी

आज बात बाजार की उठापटक से थोड़ा हटकर। कारण, आखिरी डेढ़-दो घंटों में कुछ ऐसा हो गया जो सचमुच आकस्मिक था। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से लेकर तीन सरकारी बैंकों के अधिकारियों का रिश्वतखोरी में लिप्त होना हमारे वित्तीय तंत्र की बड़ी खामी को उजागर करता है। यह बड़ा और बेहद गंभीर मसला है जो अगले कुछ दिनों तक हमारे नियामकों व बाजार के जेहन को मथता रहेगा। इसलिए आज कुछ स्थाई किस्म की बात जो हो सकताऔरऔर भी

जब बाजार में भूचाल मचा हो, बीएसई सेंसेक्स 615 का गोता लगाने के बाद संभला हो, तब मैं आपको अब कतई बाजार की तेजी के बारे में यकीन दिलाने की कोशिश नहीं करूंगा। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि औरों के बनाए खेल के शिकार न बनें। डेरिवेटिव्स में अपने पोजिशन को होल्ड रखें, साथ ही साथ कैश सेगमेंट में खरीद जारी रखें। बाजार से एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) तबका एकदम साफ हो गया है। अब तो 5000औरऔर भी

बहुत से निवेशक अभी तक मार्क टू मार्केट के दबाव और विशेषज्ञों की सलाहों के आगे घुटने टेक चुके हैं और बाजार से बहुत कुछ बेच-बाच कर निकल गए हैं। ब्रोकर उन्हें अब भी समझा रहे हैं कि हर बढ़त उनके लिए राहत का मौका है और ऐसे हर मौके पर उन्हें बेचकर निकल लेना चाहिए। अच्छा है क्योंकि आपका इम्तिहान चल रहा है। अब, ऐसा तो नहीं हो सकता कि आप हर बार उम्मीद करें किऔरऔर भी

भारत सरीखे उतार-चढ़ाव भरे मौसम वाले देश में, जहां के नागरिकों का सबसे पुराना पेशा कृषि है, फसल बीमा खेती-किसानी के लिए बड़ा कारगर है। इसे किसानों का संकटमोचक कहा जा सकता है। भारतीय बीमा कंपनियों ने इसे इतना सरल कर दिया है कि एक खास कंपनी से खाद खरीदने वाला किसान खुद-ब-खुद बीमाधारक बन जाता है। किसानों के लिए उपयोगी: ध्यान रहे कि अगर उचित प्रचार-प्रसार किया जाए तो फसल बीमा से देश के सबसे पुरानेऔरऔर भी

हमें इस बात का पूरा अंदाजा था कि तेजड़िये दोहरी अफरातफरी पैदा करेंगे। इसकी दो वजहें थीं। एक, जो लोग कल लांग यानी भावी खरीद के सौदे कर चुके थे, वे भयभीत हो जाएंगे। दो, असली ट्रिगर बाजार बंद बाद होने के बाद आएगा। प्रधानमंत्री की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में 2जी स्पेक्ट्रम मामले में हलफनामा कल, शनिवार को दाखिल किया जाएगा, जिस पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा। बाजार में अगली उथलपुथल मंगलवार को आएगी।औरऔर भी