साल 2010 में 5700 से 6160 तक। यह रहा है साल के शुरू से लेकर अंत का निफ्टी का सफर। निफ्टी एक मुकाम हासिल कर चुका है। अब स्टॉक्स भी जनवरी 2011 में ऐसा करेंगे। आप स्क्रीन देखते हैं, बिलखते हैं और अपना हौसला खो बैठते हैं। लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं। यह भारतीय बाजार के सिस्टम की नाकामी है। दिसंबर के सेटलमेंट में जिन स्टॉक्स के भावों में गिरावट आई, वे कभी सुधर करऔरऔर भी

जहां तक निफ्टी का ताल्लुक है, वह अब प्रतिरोध का स्तर तोड़ चुका है और 6500 अंक की तरफ बढ़ रहा है। आज का दिन जय जलाराम का हो गया लगता है। कहने का मतलब यह है कि फिजिकल सेटलमेंट के न होने के चलते बाजार चलानेवालों ने अपनी मनमर्जी से स्टॉक्स को नचाया है। हालांकि इसमें कुछ नया नहीं है। यह हमारे शेयर बाजार का दस्तूर बन चुका है। अभी बाजार में तूफान के पहले कीऔरऔर भी

मैने हाल ही में अखबार में एक लेख पढ़ा जिसमें बताया गया है कि 1.60 लाख करोड़ रुपए के बाजार में महज 250 करोड़ रुपए से किसी भी एफ एंड ओ (फ्यूचर्स व ऑप्शंस) सौदे को नचाया जा सकता है। यह संभव भी लगता है। जरा गौर कीजिए। बाजार में कल तक का ओपन इंटरेस्ट 1.66 लाख करोड़ रुपए का था और इसमें से करीब एक लाख करोड़ रुपए निफ्टी के पुट व कॉल ऑप्शन के हैं।औरऔर भी

वित्त वर्ष 2009-10 में देश में कुल 123.52 लाख जीवन बीमा पॉलिसियां लैप्स हो गई हैं। यह संख्या साल भर पहले 2008-09 में लैप्स हुई 91.08 लाख पॉलिसियों से 35.61 फीसदी अधिक है। सबसे ज्यादा चौंकाने की बात यह है कि पारदर्शिता की बात करनेवाली बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने हाल ही में जारी अपनी 2009-10 की सालाना रिपोर्ट में इस बाबत स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया है। उसने सभी 22 जीवन बीमा कंपनियों केऔरऔर भी

बॉम्बे डाईंग के साथ ऐसा क्या बुरा हो गया जो उसे इस सेटलमेंट में ठोंककर 575 रुपए से 458.75 रुपए तक पहुंचा दिया गया? आज भी यह 525.90 और 510.10 रुपए के बीच झूला  है। 2 दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच तो इसे  575 रुपए से गिराकर 458.75 रुपए पर पटक दिया गया। इसके डेरिवेटिव के साथ भी यही हरकत हुई है। इस दरम्यान कंपनी के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जो उसके स्टॉक कोऔरऔर भी

साल 2010 के बाकी चार दिन इसी तरह रंग-तरंग में मनाते रहिए। 30 दिसंबर को रोलओवर होना है और 31 दिसंबर म्यूचुअल फंडों द्वारा अपने एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) को दुरुस्त करने का दिन होगा। सेंसेक्स 180 अंकों की पेंग मारने के बाद 45 अंक गिरकर बंद हुआ है, जबकि निफ्टी में साढे तेरह अंकों की गिरावट आई है। अगले चार दिनों में कुछ भी खास नहीं होने वाला है। हां, एक बात अच्छी तरह दिमाग मेंऔरऔर भी

वक्त की जरूरत है कि देश में वित्तीय सुधार लागू किए जाएं और निवेशकों के हितों की हिफाजत की जाए। इस समय हमारे शेयर बाजार में करीब 1600 कंपनियां सस्पेंड पड़ी हैं। लेकिन उनके खिलाफ सेबी या कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे बेहद गलत संकेत जा रहा है। सच कहें तो यह काफी बड़ा घोटाला है। इन सस्पेंड कंपनियों में रिटेल निवेशकों के करीब 58,000 करोड़ रुपए फंसे हैं।औरऔर भी

मौज-मस्ती भरे क्रिसमस के लिए मेरी बधाई स्वीकार करें। बाजार भी लगता है कि बधाई देने के मूड में आ गया है क्योंकि इसे रफ्तार देनेवाले तो छुट्टी पर जा चुके हैं। आज खास कुछ होना-हवाना था नहीं। वैसे, बीएसई सेंसेक्स 90.78 अंक बढ़कर 20073.66 और एनएसई निफ्टी 31.60 अंक बढ़कर 6011.60 पर बंद हुआ है। अब हम बाजार पर गंभीरता से निगाह सोमवार को ही डालेंगे। आसार तो यही हैं कि यह सेटलमेंट तूफान के साथऔरऔर भी

शायद आप भी उचित हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनने की मुश्किल से रू-ब-रू हुए होंगे। पिछले दिनों ऐसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्लिनिकल रिसर्च प्रोफेशनल अनुपम मिश्र को। 25 साल के अनुपम ने जब हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए बाजार की पड़ताल की तो वे अकबका रह गए। क्या लूं और क्या छोड़ दूं? बेसिक कवर, मेडिक्लेम, जटिल सर्जिकल प्रोसीजर्स, क्रिटिकल इलनेस, कैशलेश व हॉस्पिटल कैश री-इम्बर्समेंट जैसे प्लान्स ने अनुपम को कन्फ्यूज कर दिया।औरऔर भी

बाजार सुरक्षित हाथों में है। कृपया चिंता करना छोड़ दें। इस सेटलमेंट में जिन स्टॉक्स में तेजी का दम रहेगा, वे हैं – आरआईएल, आईएफसीआई, आईडीबीआई बैंक, सेंचुरी टेक्सटाइल्स, एचडीआईएल, यूनिटेक, डीएलएफ, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और ऑर्किड केमिकल्स। इन पर सेटलमेंट के आखिरी दिन गुरुवार का असर आप 30 दिसंबर 2010 को देखिएगा। एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) का दिन 31 दिसंबर 2010 है क्योंकि तमाम म्यूचुअल फंड अब भी एनएवी के लिए कैलेंडर वर्ष का इस्तेमालऔरऔर भी