मोदी सरकार ने शपथ लेने के हफ्ते भर में ही ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के नारे का नमूना दिखाते हुए पिछली यूपीए सरकार द्वारा बनाए गए मंत्रियों के तीस समूह खत्म कर दिए थे। वे समूह विभिन्न मंत्रालयों में आपसी समन्वय के लिए बनाए गए थे। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को खुश करने की बात आई तो सरकार ने अमेरिका के त्‍वरित निवेश प्रस्‍तावों और इनके कार्यान्‍वयन से संबंधित मुद्दों का समाधान करने के लिएऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कं‍पनी अधिनियम, 2013 में कुछ संशोधन करने के लिए कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2014 को संसद में पेश करने को मंजूरी दे दी गई। सरकार ने इसका मकसद देश में बिजनेस करने की प्रक्रिया को आसान बताना बताया है। मालूम हो कि विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बिजनेस करने की आसानी के बारे में दुनिया के 189 देशों में भारत की रैंकिंग सालऔरऔर भी

सरकार से लेकर कॉरपोरेट जगत के चौतरफा दबाव के बावजूद रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की पांचवी द्वि-मासिक समीक्षा में ब्याज दरों को जस का तस रहने दिया। नतीजतन, बैंक जिस ब्याज पर रिजर्व बैंक से उधार लेते हैं, वो रेपो दर 8 प्रतिशत और जिस ब्याज पर वे रिजर्व बैंक के पास अपना अतिरिक्त धन रखते हैं, वो रिवर्स रेपो दर 7 प्रतिशत पर जस की तस बनी रही। रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुरान राजन नेऔरऔर भी

हम बैंकों की एफडी, डाकघर बचत, पीपीएफ या लघु बचत योजनाओं में जो भी धन जमा करते हैं, उससे सरकार को सस्ता कर्ज मिल जाता है जिससे वह आमदनी से ज्यादा की गई फिजूलखर्ची या अपने राजकोषीय घाटे को पाटती है। इसी क्रम में उसने किसान विकास पत्र (केवीपी) को फिर से ज़िदा किया है। लेकिन खुद वित्त मंत्री जेटली ने बताया है कि यह करेंसी नोटों जैसा एक बियरर प्रपत्र है जिस पर किसी का नामऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े जोरशोर से अपना महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘मेक इन इंडिया’ शुरू कर दिया है। गुरुवार को राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में करीब 500 नामी-गिरामी उद्योगपतियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री ने कहा, “अगर आप बाहर से आकर या यहां के लोग औद्योगिक विकास पर ध्यान नहीं देंगे, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर ध्यान नहीं देंगे, रोज़गार के अवसर उपलब्ध नहीं कराएंगे तो यह चक्र कभी पूर्ण होनेवाला नहीं है।” उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों के सामने बहुत बड़ेऔरऔर भी

देश के ग्रामीण अंचलों में सूद पर सूद लेने का महाजनी चलन अब भी जारी है। कई जगह तो इस काम में कांग्रेस और बीजेपी जैसी स्थापित पार्टियों के सांसद व विधायक तक लगे हुए हैं। लेकिन शहरी इलाकों में बैंक भी इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। वे इसके लिए सूद पर सूद नहीं, चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के अंतर का फायदा उठाकर ग्राहकों की जेब ढीली कर रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहलेऔरऔर भी

दिसंबर महीने के दूसरे पखवाड़े में आम लोगों के लिए ऐसे सरकारी बांड जारी कर दिए जाएंगे जिसमें बचत को महंगाई की मार से सुरक्षित रखा जा सकता है। इन बांडों का नाम है इनफ्लेशन इंडेक्स्ड नेशनल सेविंग्स सिक्यूरिटीज – क्यूमुलेटिव (आईआईएसएस-सी)। इन्हें रिजर्व बैंक केंद्र सरकार से सलाह-मशविरे के बाद लांच कर रहा है। शुक्रवार को रिजर्व बैंक ने आधिकारिक जानकारी दी कि इन्हें दिसंबर माह के दूसरे हिस्से में पेश कर दिया जाएगा। बता देंऔरऔर भी

हम ज़मीन को छोड़े बगैर आसमान में उड़ना चाहते हैं! कार चलाना आ गया तो मान बैठते हैं कि हवाई जहाज़ भी उड़ा लेंगे। सोने व रीयल एस्टेट को जान लिया तो सोचते हैं कि शेयर बाज़ार और फॉरेक्स बाज़ार पर भी सिक्का जमा लेगे। यह संभव नहीं है क्योंकि भौतिक अर्थव्यवस्था और फाइनेंस की अर्थव्यवस्था में सचमुच ज़मीन आसमान का अंतर है। डिमांड, सप्लाई और दाम का रिश्ता यहां भी है और वहां भी। लेकिन समीकरणऔरऔर भी

कुमारमंगलम बिड़ला और उनकी कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज पर कोयला ब्लॉक आवंटन में सीबीआई की तरफ से आपराधिक साजिश की एफआईआर दर्ज कराने के बाद पूरा कॉरपोरेट जगत तो कौआ-रोर कर ही रहा है। अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ को क्लीनचिट दे दी है। कमाल की बात तो यह है कि प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी इस मामले में प्रधानमंत्री के पक्ष में खड़ा है। लेकिन जांच के दायरे में आए इस मामले को किनारे रखऔरऔर भी

आज दुनिया कितनी ग्लोबल हो गई है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अमेरिका में ऋण सीमा पर लटकी तलवार से उससे ज्यादा परेशानी चीन और जापान को हो रही है। इन देशों के मंत्रीगण अमेरिका को पटाने में लगे हैं कि किसी भी सूरत में ऐसी नौबत न आने दी जाए क्योंकि ऐसा हो गया तो उन्होंने अमेरिका को जो भारी भरकम कर्ज दे रखा है, उसे वापस पाना मुश्किल हो जाएगा। सोचिए, ऐसा तब हो रहाऔरऔर भी