हमने पूरे पांच दिन पहले चेताया था कि स्पीक एशिया के बैंक खाते फ्रीज होने लगे हैं। तभी से तमाम तथाकथित ‘स्पीकएशियंस’ टिप्पणियों में कोहराम मचाए हुए थे कि सब झूठ है, बकवास है। लेकिन अब खुद स्पीक एशिया ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है कि सिंगापुर तक में उसके खाते बंद कर दिए गए हैं। उसने यह भी माना है कि कुछ बैंकों ने भारत में उसके एजेंटों के खातों को ‘तात्कालिक रूप’ सेऔरऔर भी

स्पीक एशिया ने इतना झूम-झामकर विज्ञापन नहीं किए होते तो शायद उसके फ्रॉड पर किसी की नजर नहीं जाती क्योंकि हमारे यहां के कानून इतने लचर हैं कि लूटनेवाले आराम से पतली गली से निकलकर जाते हैं। खुद स्पीक एशिया के सीईओ मनोज कुमार का कहना है कि भारत में 4200 मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) कंपनियां सक्रिय हैं जिसकी खास वजह है यहां के कायदे-कानून का कमजोर होना। लचर कानूनों के कारण ही नब्बे के दशक मेंऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को लघु व मध्यम स्तर की कंपनियों (एसएमई) के लिए अलग एक्सचेंज शुरू करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। बीएसई के प्रबंध निदेशक व सीईओ मधु कन्नन ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा, “हमें खुशी है कि सेबी से हमें लघु व मध्यम उद्यमों के लिए नया एक्सचेंज शुरू करने का सैद्धांतिक अनुमोदन मिल गया है। यह भारत के निवेशकों को बेहतर उत्पाद वऔरऔर भी

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उनको इतनी मिर्ची लग जाएगी, अंदाजा नहीं था। दुख इस बात का है कि छल-प्रपंच में लगी स्पीक एशिया की तरफदारी ऐसे लोग कर रहे हैं जो बड़ी ईमानदारी व मेहनत से घर-परिवार चलाते हैं। मानस कुमार भले ही स्पीक एशिया के घोटालेबाज टीम से सदस्य हों, लेकिन महेश, हरप्रीत, रंजीत, अजीत, धीरज रावत, नितेश और ‘बेनामी’ झलक तक हमारे-आप जैसे लोग हैं जो अपनी व अपनों की जिंदगी में खुशियां बिखेरना चाहते हैं। झलक की यहऔरऔर भी

आमतौर पर जीवन बीमा का फॉर्म हम खुद नहीं भरते। एजेंट निशान बनाकर देता है कि यहां-यहां आपको दस्तखत करने हैं और हम कर देते हैं। हम शर्तों को तो क्या, फॉर्म तक को ठीक से पढ़ने की जहमत नहीं उठाते। लेकिन यह कानूनन गलत है। कानून के मुताबिक जीवन बीमा का फॉर्म बीमाधारक की अपनी हैंडराइटिंग में भरा जाना जरूरी है। नहीं तो बीमा कंपनी इसी बात को आधार बनाकर उसका क्लेम खारिज कर सकती है।औरऔर भी

जेल में बंद अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम और स्पीक एशिया में क्या समानता है? दोनों का वकील एक है और इनका नाम है – अशोक सरावगी। खैर, ऐसा होना आम बात है। सरावगी ने तो आमिर अजमल कसाब का भी एडवोकेट बनने की पेशकश की थी। खास बात यह है कि पिछले हफ्ते शुक्रवार, 20 मई को सरावगी ने मुंबई में स्पीक एशिया की तरफ से एक प्रेस कांफ्रेंस की जिसमें उन्होंने कहा कि स्पीक एशिया अपनेऔरऔर भी

आईडीबीआई बैंक ने दुनिया में पहली बार 24 घंटे सातों दिन की लॉकर सुविधा शुरू की है। बैंक के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक आर एम मल्ला ने सोमवार को मुंबई की कफ परेड, कोलाबा शाखा में इसकी शुरुआत करते हुए कहा कि देश की बात छोड़िए, पूरी दुनिया में अभी तक कहीं भी एनी टाइम लॉकर (एटीएल) की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ बैंक जरूर रोजमर्रा के बैंकिंग अवधि से कुछ समय ज्यादा तक लॉकरऔरऔर भी

कुछ ही दिनों पहले स्पीक एशिया की तरफ से अपने सभी पैनलिस्ट को बताया गया है कि, “12 मई तक की सभी कैश रिक्वेस्ट उनके बैंक खाते में क्रेडिट की जा चुकी होंगी और बाकी 21 मई तक की कैश रिक्वेस्ट हमारे बैंक ने प्रोसेस कर ली है और अगले हफ्ते किसी वक्त वह आपके खाते में क्रेडिट हो जाएगी।” लेकिन स्पीक एशिया का यह दावा बहुत मुमकिन है कि पूरा ही न हो क्योंकि कई बैंकोंऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हारून लोर्गट का मानना है कि भारतीय उप महाद्वीप में सट्टेबाजी को वैध कर देना चाहिए। इससे सट्टेबाजों पर निगाह रखने में मदद मिलेगी और ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना भी आसान हो जाएगा।’ लोर्गट ने कहा, ‘‘यदि इस कारोबार को वैध बना दिया जाता है तो फिर आप वास्तव में उनके साथ मिलकर काम करोगे। ऐसे में उन पर बेहतर तरीके से निगरानी रखी जा सकती है। यदिऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पूर्व प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस काह्न को कठिन शर्तो के साथ शुक्रवार को जमानत मिल गई। लेकिन इसके लिए उन्हें 10 लाख डॉलर नकद जमा कराने के साथ-साथ 50 लाख डॉलर का बांड भरना पड़ेगा। यह भी शर्त है कि वे न्यूयॉर्क के अपने अपार्टमेंट में नजरबंद रहेंगे और सशस्त्र गार्ड उनकी निगरानी करेंगे। उन्हें अपने सभी यात्रा दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया गया है। होटलकर्मी महिला के साथ यौन दुर्व्‍यवहार सेऔरऔर भी