1. इक्विटी शेयर क्या है? इक्विटी शेयर को आम बोलचाल में शेयर या स्टॉक भी कहा जाता है। इससे किसी कंपनी में अमुक अंश की हिस्सेदारी व्यक्त होती है। इक्विटी शेयरधारक कंपनी के नफे-नुकसान में, अपने शेयरों की संख्या के अनुपात में व्यवसायिक हिस्सेदार होता है। इसके धारक को कंपनी के सदस्य का दर्जा प्राप्त होने के साथ कंपनी के प्रस्तावों पर अपना विचार व्यक्त करने और वोट देने का अधिकार प्राप्त है। 2. राइट्स इश्यू/राइट्स शेयरऔरऔर भी

सरकार ने कहा है कि स्विटजरलैंड समेत दस देश अपने यहां भारतीयों द्वारा जमा कराए गए काले धन के बारे में जानकारी देने को तैयार हैं। वित्त राज्यमंत्री एस एस पलानी मणिक्कम ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार सूचना के प्रभावी आदान-प्रदान के लिए उपयुक्त कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत और स्विटजरलैंड ने दोहरा कराधान निषेध संधि को संशोधित करने वाले प्रोटोकॉल परऔरऔर भी

बैंकों के लिए अपनी जमा का इतना बड़ा हिस्सा सरकारी बांडों में लगाना क्यों जरूरी है? यह मुद्दा उछाल दिया है खुद रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने। उन्होंने मंगलवार को मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड के एक समारोह में कहा कि बैंकों द्वारा सरकारी बांडों में निवेश करने के लिए तय न्यूनतम जमा का अनिवार्य अनुपात धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए। जानकारों को लगता है कि ऐसा हो गया तो बाजार में सरकारीऔरऔर भी

जो बात एक्सिस बैंक अपने विज्ञापन में खुद को अलग दिखाने के लिए कर रहा है, उसी बात का फैसला देश भर के बैंकिंग ओम्बड्समैन ने अपने सालाना सम्मेलन में सभी बैंकों के लिए कर लिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव समेत बैंकों के शीर्ष संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के आला अधिकारियों की मौजूदगी में बैंकिंग ओम्बड्समैन सम्मलेन ने तय किया है कि बैंकों को फ्लोटिंग रेट लोन पर कतई कोई प्री-पेमेंट शुल्क नहींऔरऔर भी

एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस अब स्वास्थ्य बीमा के धंधे में भी उतर गई है। कंपनी ने हॉस्पिटल कैश स्कीम पेश की है जिसमें पालिसीधारकों को अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान प्रतिदिन एक निश्चित भत्ता मिलेगा। एसबीआई लाइफ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हास्पिटल कैश योजना पालिसीधारकों को अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनकी कुल बचत को निकालने से बचाती है। अस्पताल का बिल कितना भी हो, पर इस योजना के तहतऔरऔर भी

कंस्ट्रक्शन कंपनियों के शेयरों ने भले ही पिछले एक साल में निवेशकों को 55 फीसदी का नुकसान कराया हो, लेकिन अब वे ऐसे मुकाम पर आ गए हैं जहां इनमें किए गए निवेश पर 25 फीसदी या इससे ज्यादा भी रिटर्न मिल सकता है। यह कहा है प्रमुख रेटिंग एजेंसी से संबद्ध क्रिसिल रिसर्च ने अपनी ताजा रिपोर्ट में। सोमवार को जारी इस रिपोर्ट में क्रिसिल रिसर्च ने खास तौर पर पांच कंस्ट्रक्शन कंपनियों का जिक्र कियाऔरऔर भी

यूटीआई म्यूचुअल फंड में चेयरमैन व प्रबंध निदेशक का पद इस साल फरवरी में यू के सिन्हा के पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी का चेयरमैन बन जाने के बाद से ही खाली पड़ा है। इसकी खास वजह है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की निजी सलाहकार ओमिता पॉल इस पद पर अपने भाई जितेश खोसला को बैठाने पर अड़ी हुई हैं, जबकि यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा बनाई गई सर्च कमिटी ने खोसला को अनुपयुक्त ठहरा दियाऔरऔर भी

सोमवार को रिजर्व बैंक ने नए बैंकों को लाइसेंस देने के नियमों का खाका पेश किया। मंगलवार को सहारा इंडिया समूह की पैरा-बैंकिंग कंपनी सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने घोषणा कर दी कि उसके पास जून 2011 तक जमाकर्ताओं के कुल 73,000 करोड़ रुपए जमा है, जिसे वह इसी साल दिसंबर वापस कर देगी और उसके बाद उसके ऊपर एक पैसे की भी देनदारी नहीं बचेगी, जबकि रिजर्व बैंक ने उसे इसके लिए 30 जून 2015औरऔर भी

रिजर्व बैंक एक तरफ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की सेहत को लेकर परेशान है, वहीं हमारे बैंक इस क्षेत्र को जमकर कर्ज रहे हैं। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश के वाणिज्यिक बैंकों ने जुलाई 2011 में एनबीएफसी को पिछली जुलाई की तुलना में 55.6 फीसदी ज्यादा कर्ज दिया है, जबकि पिछली बार इस क्षेत्र को दिए गए कर्ज में वृद्धि केवल 10.9 फीसदी थी। एनबीएफसी को दिए गए बैंक ऋण की मात्रा इस समयऔरऔर भी

अगर रिजर्व बैंक की पूर्व डिप्टी गवर्नर ऊषा थोराट की अध्यक्षता में बने कार्यदल की सिफारिशों का मान लिया गया तो गैर बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) को पूंजी बाजार (प्राइमरी + शेयर बाजार) में दिए गए ऋण के लिए 150 फीसदी और कमर्शियल रीयल एस्टेट को दिए ऋण के लिए 125 फीसदी प्रावधान करना होगा। अभी इन दोनों ही ऋणों पर इन्हें 100 फीसदी प्रावधान करना पड़ता है। रिजर्व बैंक ने सोमवार को इस कार्यदल की रिपोर्टऔरऔर भी