पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी सरकार को उन 500 से ज्यादा कंपनियों के नाम उपलब्ध कराएगी जिन्होंने सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) के नियमों को तोड़ते हुए निवेशकों से भारी धन जुटाया है। सेबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट (पीटीआई) के संवाददाता को बताया कि ऐसी कंपनियों के निदेशकों के नाम भी कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) को दिए जाएंगे ताकि इन कंपनियों और लोगों को किसी नई कंपनी के साथ जुड़ने से रोका जाऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने साल 2010-11 में कागज के नोटों की छपाई पर कुल 2376 करोड़ रुपए खर्च किए। एक हज़ार का नोट छापने का कुल खर्च 3.17 रुपए आता है, जबकि पांच रुपए के नोट का खर्च 48 पैसे है। आनुपातिक रूप से पांच रुपए का नोट छापना सबसे महंगा है क्योंकि उसकी लागत अंकित मूल्य की 9.6 फीसदी है, जबकि यह अनुपात हज़ार रुपए के नोट के मामले में केवल 0.32 फीसदी है। देश में कागजऔरऔर भी

नए साल का पहला महीना बीएसई सेंसेक्स और रुपए के लिए ऐतिहासिक बढ़त का महीना रहा है। जनवरी में सेंसेक्स 11.3 फीसदी बढ़ा है। यह पिछले 18 साल में जनवरी के दौरान सेंसेक्स में हुई सबसे ज्यादा बढ़त है। इससे पहले जनवरी 1994 में 19.4 फीसदी बढ़ा था। इसी तरह भारतीय रुपए के लिए भी जनवरी का महीना पिछले 17 सालों की सबसे ज्यादा बढ़त का साक्षी रहा। इस महीने डॉलर के सापेक्ष रुपया 7.45 फीसदी मजबूतऔरऔर भी

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) का कहना है कि उसका काम केंद्र सरकार से मिलने वाले 7900 करोड़ रुपए से नहीं चलेगा, बल्कि उसे बढ़ती ऋण मांग को पूरा करने के लिए हर साल 15,000 करोड़ रुपए की दरकार है। बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) दिवाकर गुप्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा, “बैंक को संचित लाभ समेत कुल 15,000 करोड़ रुपए की जरूरत है। हमें निश्चित रूप से अगलेऔरऔर भी

रिजर्व बैंक गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव ने संकेत दिया है कि आगे ब्याज दरों में कटौती हो सकती है। मौद्रिक की अगली मध्य-तिमाही समीक्षा गुरुवार 15 मार्च को होनी है और शायद यह कटौती उसी दिन से शुरू हो जाए। तब तक संभवतः नए वित्त वर्ष 2012-13 का आम बजट भी आ चुका होगा। डॉ. सुब्बाराव ने मंगलवार को मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही की समीक्षा पेश करने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सीआरआर मेंऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने मौद्रिक की तीसरी त्रैमासिक समीक्षा में ब्याज दरों को जस का तस रखा है, लेकिन नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को आधा फीसदी घटाकर 6 से 5.5 फीसदी कर दिया है। दूसरे शब्दों में बैंकों को अब अपनी कुल जमा का 6 फीसदी नहीं, बल्कि 5.5 फीसदी हिस्सा ही रिजर्व बैंक के पास रखना होगा। यह फैसला 28 जनवरी 2012 से शुरू हो रहे पखवाड़े से लागू हो जाएगा। ध्यान दें कि सीआरआर में आधाऔरऔर भी

मुद्रास्फीति को लेकर रिजर्व बैंक कुछ हद तक निश्चिंत हो गया है। लेकिन इतना नहीं कि मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही में ब्याज दरों में कटौती कर दे। मंगलवार को सुबह 11 बजे रिजर्व बैंक नए मौद्रिक उपायों की घोषणा करने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मुद्रा बाजार में इस समय जिस तरह तरलता की किल्लत चल रही है, उसमें पूरे आसार इस बात के हैं कि वह नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में आधा फीसदी कटौतीऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट में सहारा समूह और पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी का मुकदमा लंबा खिंचता जा रहा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन (वर्तमान नाम – सहारा कमोडिटी सर्विसेज कॉरपोरेशन) और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन से कहा है कि वे तीन हफ्ते में तय कर लें कि ओएफसीडी (ऑप्शनी फुली कनवर्टिबल डिबेंचर) के 2.3 करोड़ निवेशकों के धन को कैसे सुरक्षित करेंगी। इनमें से अधिकांश निवेशकऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के निदेशक बोर्ड ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुरूप शुक्रवार को कंपनी के 12 करोड़ शेयर वापस खरीदने का फैसला कर लिया। शेयरों को वापस खरीदने का अधिकतम मूल्य 870 रुपए प्रति शेयर रखा गया है। यह मूल्य शुक्रवार, 20 जनवरी को एनएसई में शेयर के बंद भाव 792.65 रुपए से 9.76 फीसदी ज्यादा है। कंपनी ने तय किया है कि वह खुले बाजार से अपने शेयरों की इस वापस-खरीद या बायबैक पर ज्यादा सेऔरऔर भी

जापान की निप्पन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी रिलायंस म्यूचुअल फंड में भी 26 फीसदी इक्विटी खरीदेगी। यह सौदा 29 करोड़ डॉलर (1450 करोड़ रुपए) में हुआ है जो भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में अब तक किया गया सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) है। इससे पहले अमेरिका की टी रोवे ने यूटीआई म्यूचुअल फंड में 26 फीसदी हिस्सा 14.24 करोड़ डॉलर और जापान की नोमुरा एएमसी ने एलआईसी म्यूचुअल फंड का 35 फीसदी मालिकाना 6.28 करोड़ डॉलर मेंऔरऔर भी