इस समय जो-जो चीजें किसानों के पास बहुतायत में हैं, उन सभी की कीमत में भारी गिरावट के कारण खाद्य मुद्रास्फीति की दर शून्य से नीचे पहुंच गई है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 24 दिसंबर 2011 को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्यों पर आधारिक खाद्य मुद्रास्फीति की दर (-) 3.36 फीसदी रही है। लेकिन किसानों के पास जो चीजें नहीं हैं, मसलन दूध, फल, दाल व मांस-मछली व अंडे, उनऔरऔर भी

वर्ष 2011-12 की खरीफ फसल में 164 लाख टन से अधिक धान की खरीद की गई है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, 2 जनवरी 2012 तक विभिन्‍न सरकारी एजेंसियों द्वारा 164,84,195 टन धान की खरीद की जा चुकी है। इसमें पंजाब ने सबसे अधिक 76,60,745 टन धान की खरीदारी की जबकि छत्‍तीसगढ़ 21,25,475 टन धान की खरीद करके उससे बहुत नीचे दूसरे नंबर पर रहा। हरियाणा ने 19,66,167 और उत्‍तर प्रदेश ने 14,30,184 टन धान खरीदा।और भीऔर भी

एक तरफ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तारीख का इंतजार हो रहा है, दूसरी यूपीए सरकार आखिरी वक्त पर राजनीतिक दांव खेलने में लगी है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उत्‍तर प्रदेश की दो सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3124 करोड़ रूपए का पैकेज घोषित कर दिया। केन्‍द्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने उत्‍तर प्रदेश की दो सिंचाई परियोजनाओं को राष्‍ट्रीय परियोजना में शामिल करने का फैसला किया है। इसके तहत सरयू नहर परियोजना और शारदा सहायक परियोजना कीऔरऔर भी

एक तरफ खाद्य सुरक्षा विधेयक को संसद में रखने की तैयारी हो चुकी है, दूसरी तरफ खाद्यान्नों की खरीद व रखरखाव की सबसे बड़ी सरकारी एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने स्वीकार किया है कि अप्रैल 2000 से लेकर मार्च 2011 तक के दस सालों में विभिन्न वजहों से 7.42 लाख टन अनाज बरबाद हो गया है। इस अनाज की कीमत 330.71 करोड़ रुपए आंकी गई है। एफसीआई ने सूचना का अधिकार कानून के तहत सामाजिक कार्यकर्ताऔरऔर भी

सरकार भले ही एक तोला भी गेहूं नहीं पैदा करती हो, लेकिन लक्ष्य तय करने के उसे कोई नहीं रोक सकता। उसने वर्ष 2011-12 के लिए 840 लाख टन गेहूं के उत्‍पादन का लक्ष्‍य रखा गया है। कृषि राज्य मंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गेहूं के उत्‍पादन का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने और इसकी उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए कई फसल विकास कार्यक्रम उनके मंत्रालय की ओर से कार्यान्वित किएऔरऔर भी

पंजाब के किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया तो वे अपने खेतों में महीनों की मेहनत से पैदा किया आलू सड़कों के बीचोबीच फेंक देंगे। पिछले कुछ हफ्तों से वे अभी तक सड़कों के किनारे आलू फेंकते रहे हैं। आलू उत्पादक किसान अपनी फसल इसलिए फेंकने को मजबूर हुए हैं कि क्योंकि आलू की कीमत एक रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है, जबकि उन्हें आलू कीऔरऔर भी

सरकार के सामने कृषि क्षेत्र की विकास दर को बढ़ाने की जबरदस्त चुनौती आ खड़ी हो गई है। अगर देश में 9 फीसदी आर्थिक विकास दर हासिल करना है तो कृषि क्षेत्र को कम से कम 4 फीसदी बढ़ना होगा। ऐसी ही चिंता और चुनौती के बीच खुद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील की तरफ से राज्यपालों की एक समिति गठित की गई है। यह समिति खासतौर पर वर्षा आधारित खेती की उत्पादकता, लाभप्रदता, टिकाऊपन और होड़ में टिकेऔरऔर भी

किसी समय हमारे किसान देसी खाद का ही इस्तेमाल करते थे। लेकिन रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते और पशुपालन के घटते चलन ने इसे खत्म कर दिया। इस समय देश में कुल कृषियोग्‍य भूमि के 3% से कम भाग में जैव-उर्वरकों का उपयोग होता है। वह भी पहले से बढ़ने के बाद। जैव-उर्वरकों का कुल उत्‍पादन वित्‍त वर्ष 2008-09, 2009-10 और 2010-11 में क्रमशः 25,065 टन, 20,040 टन और 37,998 टन रहा है। सरकार इधर राष्ट्रीय कृषि विकासऔरऔर भी

सरकार के लिए थोड़े सुकून की बात की है कि 12 नवंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर दहाई अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 9.01 फीसदी पर आ गई। यह पिछले नौ हफ्तों का न्यूनतम स्तर है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इन आंकड़ों के जारी होने के बाद कहा कि अगर खाद्य वस्तुओं के दाम में गिरावट का यही रुख रहा तो मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है। वित्त मंत्री के शब्दों में,औरऔर भी

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास अपने और किराये के गोदामों को मिलाकर अनाज भंडारण की कुल क्षमता 333 लाख टन है। इसमें से 1 अक्टूबर 2011 तक 74% क्षमता का उपयोग हुआ है। राज्‍यों की एजेंसियों की कुल भंडारण क्षमता अभी 295 लाख टन है। इस प्रकार देश में भंडारण क्षमता 628 लाख टन है, जबकि हमारे पास अभी खाद्यान्न का भंडार 517 लाख टन ही है। साथ ही सरकार ने अधिक खरीद को संभालने केऔरऔर भी