सूरत में खुदा
कोई आपकी सूरत या सीरत में अपना खुदा देखता है तो देखने दीजिए। उसे खुशफहमी है या गलतफहमी, इससे आपको क्या! हां, अगर आप उसकी अपेक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करें तो इसमें आपका ही भला है।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
कोई आपकी सूरत या सीरत में अपना खुदा देखता है तो देखने दीजिए। उसे खुशफहमी है या गलतफहमी, इससे आपको क्या! हां, अगर आप उसकी अपेक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करें तो इसमें आपका ही भला है।और भीऔर भी
जिस प्रकार ज्ञान विचारों और संस्कारों के रूप में आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करता है, उसी प्रकार अज्ञान भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी की विरासत बन जाता है। इसलिए अज्ञान को मिटाते रहना हमारा दायित्व है।और भीऔर भी
इसे अहम कहें या आत्ममुग्धता, हम अपने में खोए और आक्रांत रहते हैं। खूंटे से बंधी गाय की तरह हमारा वृत्त बंध गया है। आम से लेकर खास तक, ज्ञानी और विद्वान तक अंदर के चुम्बक से पार नहीं पा पाते।और भीऔर भी
चलने पर चौराहे नहीं, अठराहे भी मिल सकते हैं। लेकिन चलने से ही राहें खुलती हैं। चलिए तो समुद्र भी दोफाड़ होकर आपकी राह संवार देता है। तो, काहे रुके हो भाई! चलो तो सही। मंजिल आपकी बाट जोह रही है।और भीऔर भी
जो लोग रिश्तों और दूसरे लोगों की कद्र नहीं करते, उनका हश्र नितांत अकेलेपन और घुटन में होता है। हो सकता है कि वे बहुत ज्यादा पैसे कमा लें। लेकिन पैसे से प्यार तो छोड़िए, खुशी का धेला तक नहीं खरीदा जा सकता।और भीऔर भी
आप कोई भगवान तो हो नहीं कि आपका दिया पाने के लिए पात्रता जरूरी है। आप दिल से देना चाहते हैं तो आप ही को सुनिश्चित करना पड़ेगा कि सामनेवाले को मिला कि नहीं। उस पर तोहमत मढ़ने का कोई तुक नहीं है।और भीऔर भी
ऊंचा उठने की एक सीमा होती है। उसके बाद ठहरकर अगल-बगल बढ़ना होता है। फिर एक से अनेक होकर विस्तार का सिलसिला चलता है। प्रकृति से लेकर विचार व रचना तक यही होता है। समझ लें तो अच्छा है।और भीऔर भी
मां-बाप की छत्रछाया से निकलने के बाद ही बच्चा जीवन के असली सबक सीख पाता है। इसी तरह राम भरोसे रहने पर हम पूरी तरह खुल नहीं पाते। भगवान का सहारा हमारे मानुष जन्म को अधूरा रख छोड़ता है।और भीऔर भी
जिस तरह गाड़ी का पेट्रोल एक मंजिल तक ही पहुंचाता है, वैसे ही भावना किसी लक्ष्य तक पहुंचाने का आधार भर होती है। लक्ष्य पाने के बाद उसकी जगह नई भावना भरनी पड़ती है, तभी जाकर गाड़ी आगे बढ़ती है।और भीऔर भी
अवरुद्ध रंध्रों को खुल जाने दो। बंधे हुए बांधों को टूट जाने दो। ठहरे हुए झरनों को गिर जाने दो। आंधी आने को है। अबाध ऊर्जा का धमाका होने को है। सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। अवाम उठने को है। देश जगने को है।और भीऔर भी
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