औरों की चाहत
व्यापक स्तर पर लोग क्या चाहते हैं और उनकी चाहत कैसे पूरी की जा सकती है, जब आप यह जान लेते हैं, तभी से आपका उद्यम आकार लेने लगता है। छोटे से लेकर बड़े उद्यमी का मूल मंत्र यही होता है।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
व्यापक स्तर पर लोग क्या चाहते हैं और उनकी चाहत कैसे पूरी की जा सकती है, जब आप यह जान लेते हैं, तभी से आपका उद्यम आकार लेने लगता है। छोटे से लेकर बड़े उद्यमी का मूल मंत्र यही होता है।और भीऔर भी
फूलों की पंखुड़ियों से लेकर तितलियों के पंखों तक में पैटर्न है। अंदर-बाहर की इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं, जहां क्रमबद्धता न हो, दोहराव न हो। हमारे जीवन तक में एक पैटर्न चलता है जिसे पकड़ने की जरूरत है।और भीऔर भी
कामयाब लोगों के घनेरों विचार, जीवन की गुत्थियों को सुलझाने वाले बहुतेरे सूत्र, गुरुओं की वाणी। हम पढ़ते हैं, सुनते हैं। वाह-वाह करते हैं, झूम जाते हैं। पर मंत्र नहीं मिलता क्योंकि हम उन्हें अपना नहीं बनाते।और भीऔर भी
लक्ष्मी धन-संपदा लाती हैं। दुर्गा हमें निर्भय बनाती हैं। लेकिन धन-दौलत और सुरक्षा से ही कोई सुखी इंसान नहीं बन जाता है। सुख की तीसरी शर्त पूरी करती हैं संगीत, कला और विद्या की देवी सरस्वती।और भीऔर भी
एक समय की अच्छी बातें आगे जाकर रूढ़ि बन जाती है। मूर्तिभंजक ही मूर्तिपूजक बन जाते हैं। इसलिए जिस तरह सांप अपनी केंचुल उतारता रहता है, उसी तरह हमें भी रूढ़ियों को फेंकते रहना चाहिए।और भीऔर भी
कहते हैं सहज बनो। लेकिन कैसे बनें? सहजता के तो अलग-अलग सोपान हैं। सियार के लिए हुंआना सहज है तो गधे के लिए लोटना। इसी तरह हर इंसान के लिए सहज होने का मायने-मतलब अलग है।और भीऔर भी
जिज्ञासा ही किसी के जीनियस बनने का आधार है। हर बच्चा तब तक जीनियस बनने की संभावना रखता है जब तक हम, हमारा परिवेश और हमारी शिक्षा प्रणाली उसकी जिज्ञासा को कुंद नहीं कर देती।और भीऔर भी
पैर वर्तमान में और नापते हैं भविष्य को! कैसे संभव है? हम बहकने लगते हैं कि ये होगा तो वो करेंगे, ऐसा होगा तो वैसा करेंगे; जबकि तैयारी यह होनी चाहिए कि ये हुआ तो क्या करेंगे, वो हुआ तो क्या करेंगे।और भीऔर भी
ज़िदगी में सांस एक बार, मगर सांसें बार-बार टूटती हैं। धारा के खिलाफ चलने और चढाइयां चढ़ने के दौरान अक्सर ऐसा होता है। लेकिन जो बार-बार टूटती सांसों को जोड़ने का हुनर सीख लेते हैं, ज़िंदगी उन्हीं की होती है।और भीऔर भी
जो धारा की सतह को देखते-समझते हैं, आज उनका है। लेकिन जो सतह के नीचे चल रही अंतर्धाराओं को अभी से देख लेते हैं, कल उन्हीं का है। भविष्य कहीं आसमान से नहीं टपकता। वह वर्तमान के गर्भ से ही उपजता है।और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom