हम जैसे ही कोई काम शुरू करते है, खटाक से अंदर से आवाज़ आती है – बाद में कर लेंगे। यह जड़त्व है जो चीजों का जैसे का तैसा रहने देना चाहता है। हर कदम पर इसे तोड़कर ही आगे बढ़ना पड़ता है।और भीऔर भी

यह सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों की नई व्यवस्था की पहली परीक्षा थी और दोनों ही इसमें फेल हो गए। इससे सरकार भी बड़ी किरकिरी हुई क्योंकि गुरुवार देर रात तक साफ नहीं हो पाया कि ओएनजीसी में सरकार के 5 फीसदी शेयर बेचने की पेशकश पूरी हुई है या नहीं। पहले विनिवेश विभाग के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ प्रधान ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि 42,77,75,504 शेयरों की नीलामी पूरी संपन्न हो गई है। लेकिन सिस्टमऔरऔर भी

सहारा इंडिया परिवार पर वित्तीय क्षेत्र के दो नियामकों, रिजर्व बैंक और सेबी के बाद तीसरे नियामक आईआरडीए (इरडा) की भी भृकुटि टेढ़ी हो गई है। उसने पिछले साल 11 अगस्त को समूह की जीवन बीमा कंपनी, सहारा लाइफ इंश्योरेंस को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके जवाब और 13 दिसंबर को हुई निजी सुनवाई के बाद इरडा ने कंपनी को कुल 23 इल्जांमों में से केवल तीन में दोषी पाया है और इसके लिए कुलऔरऔर भी

किसानों की शिकायत थी कि पिछले साल उर्वरकों, खासकर डीएपी (डाई अमोनियम फॉस्फेट) और एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) के दाम बहुत बढ़ गए थे। लिहाजा इस बार इन्हें कम किया जाना चाहिए। लेकिन सरकार ने उनकी मांग से उलट दोनों ही उर्वरकों पर सब्सिडी घटा दी है जिनसे इनके दाम इस साल बढ़ जाएंगे। डीएपी पर सब्सिडी 27.4 फीसदी और एमओपी पर 10.1 फीसदी कम की गई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को अपनी बैठक में तयऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की जिन कंपनियों के पास इफरात कैश है, वे अब अपने शेयरों को वापस खरीदने के साथ-साथ दूसरी सरकारी कंपनियों के विनिवेश में भी शिरकत कर सकती हैं। गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने काफी समय से अटकते चले आ रहे इस फैसले पर मुहर लगा दी। मंत्रिमंडल के इस फैसले की जानकारी देते हुए भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार ने इजाजत दे दी है। लेकिन क्या करना है, इसकाऔरऔर भी

देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत अब भी मॉरीशस बना हुआ है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में दिसंबर तक के नौ महीनों में आए 24.18 अरब डॉलर के एफडीआई में से 8.24 अरब डॉलर यानी करीब 34 फीसदी मॉरीशस से आया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि मॉरीशस का पता दिखाने पर विदेशी कंपनियों को भारत से की गई कमाई पर टैक्स नहीं देना पड़ता। इसलिए एफडीआई के आंकड़ों से सही तस्वीरऔरऔर भी

बात एकदम सीधी है। जो भी शेयर बाजार में निवेश नहीं करते, वे भारत की विकासगाथा के लाभ से वंचित है। लेकिन आश्चर्यजनक, किंतु सत्य यह है कि देश की 121 करोड़ की आबादी में से कम से कम 120 करोड़ लोग इस लाभ से वंचित हैं, जबकि ठीकठाक कमानेवाले भारतीय मध्य वर्ग की ही आबादी 15 करोड़ से ज्यादा है। सबको साथ लेनेवाले कौन-से समावेशी विकास की बात करती यह सरकार? देश की विकासगाथा को व्यापकऔरऔर भी

यह देश गांधी, सुभाष व पटेल का था, तब था। अभी हमारा है। जब हैं, तभी तक है क्योंकि देश तो वह पौध है जो पीढ़ी दर पीढ़ी लहलहाती रहती है। जो अगली पीढ़ी की नहीं सोचता, वह देशभक्त नहीं, भोगी है।और भीऔर भी

पाकिस्तान सरकार ने तय किया है कि वो भारत के साथ व्यापार को और बेहतर बनाने के लिए नकारात्मक सूची को एकदम छोटा कर देगा। इस फैसले से भारत-पाकिस्तान के बीच 90 फीसदी चीजों का व्यापार आसानी से हो सकेगा, जबकि अभी तक 17 फीसदी चीजों का ही सरलता से व्यापार हो पाता है। बुधवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया। बैठकऔरऔर भी

इस साल अप्रैल से शुरू हो रही 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च बढ़ाकर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 2.5 फीसदी कर दिया जाएगा। यह फैसला बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई विशेष बैठक में लिया गया। इस समय स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च जीडीपी का 1.4 फीसदी है। बैठक का खास एजेंडा था – स्वास्थ्य व समग्र अर्थव्यवस्था पर बने आयोग (एनसीएमएच) और योजना आयोग द्वारा स्वास्थ्य पर गठिच उच्चस्तरीय विशेषज्ञ दल कीऔरऔर भी