देश की आर्थिक विकास दर अक्टूबर से दिसंबर 2011 की तिमाही में घटकर 6.1 फीसदी पर आ गई है। यह पिछले करीब तीन सालों (11 तिमाहियों) में किसी भी तिमाही की सबसे कम आर्थिक विकास दर है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 की सितंबर तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर 6.9 फीसदी और उससे पहले जून तिमाही में 7.7 फीसदी रही थी। आर्थिक विकास दर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह इस साल अबऔरऔर भी

सुप्रजीत इंजीनियरिंग है तो स्मॉल कैप कंपनी। इक्विटी 12 करोड़ रुपए है और बाजार पूंजीकरण 240 करोड़ रुपए के आसपास। लेकिन देश में वाहनों के केबल बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी है। वह गाड़ियों के स्पीडोमीटर भी बनाती है। कंपनी के तार विदेश तक फैले हैं। करीब छह साल पहले 2006 में इसने एक ब्रिटिश कंपनी गिल्स केबल्स का अधिग्रहण किया था जिसका नाम अब सुप्रजीत यूरोप लिमिटेड कर दिया गया है। घरेलू बाजार की मांग को पूराऔरऔर भी

सही ज्ञान, विज्ञान और दर्शन के बिना हम इस दुनिया में आंखें रहते हुए भी अंधों की तरह विचरते हैं। अंदाज सही लग गया तो तीर, नहीं तो तुक्का। चोट सिर में लगती है और मरहम घुटनों में लगाते हैं।और भीऔर भी

माना जाता है कि किसानों को सरकार मुफ्त में बिजली देती है। लेकिन योजना आयोग की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन सालों में बिजली की दरें सबसे ज्यादा कृषि व सिंचाई में और सबसे कम व्यावसायिक व औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ाई गई हैं। यही नहीं, पिछले पांच सालों में कई राज्यों में खेतिहर ग्राहकों के लिए बिजली की दरें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं। किसानों के लिए सबसे ज्यादा महंगी बिजली पंजाब में हुईऔरऔर भी

शुक्रवार को विदेशी निवेश बैंक मैक्वारी ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में आगाह किया था कि भारत को कच्चे तेल का झटका लग सकता है क्योंकि रुपए में इसकी कीमत अब तक की चोटी पर पहुंच चुकी हैं। तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति को धक्का दे सकती हैं और ब्याज दरों को घटाए जाने की संभावना खत्म हो सकती है। मैक्वारी के बाद अब देश की दो प्रमुख रेटिंग एजेंसियों क्रिसिल और केयर रेटिंग्स ने कच्चे तेल केऔरऔर भी

अगर 1991 में देश में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के तत्काल बाद 1956 का कंपनी अधिनियम खत्म कर नया अधिनियम ले आया गया होता तो आज जिस तरह कॉरपोरेट जालसाजी की घटनाएं हो रही हैं, वे नहीं होतीं। यह कहना है खुद हमारे कॉरपोरेट कार्य मंत्री वीरप्पा मोइली का। मोइली ने सोमवार की रात बेंगलुरु में ईटीवी कन्नड़ व ईटीवी उर्दू चैनल द्वारा ‘भारत में कॉरपोरेट क्षेत्र का भविष्य’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि कंपनीऔरऔर भी

एक साथ कहीं सूखा तो कहीं बाढ़। इस स्थिति से निपटने के लिए एनडीए सरकार ने अक्टूबर 2002 में देश की नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजना पेश की थी। लेकिन विस्थापन व पर्यावरण की चिंता के साथ ही किसानों के संभावित विरोध और सरकार की ढिलाई के कारण 5.60 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना पर शायद अब काम शुरू हो जाए। देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यऔरऔर भी

शेयर बाजार या किसी खास शेयर में बढ़त के दो ही आधार होते हैं। एक, अर्थव्यवस्था या कंपनी के मजबूत होते फंडामेंटल। दो, बढ़ी हुई तरलता, यानी खरीदने के लिए ज्यादा रकम का आना। इस साल जनवरी से लेकर अब तक चली तेजी की बड़ी वजह है विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा किया गया 7.03 अरब डॉलर (34,900.80 करोड़ रुपए) का शुद्ध निवेश। सेबी के मुताबिक इसमें से केवल फरवरी में किया गया निवेश 4.96 अरब डॉलरऔरऔर भी

अतीत से चिपके रहे तो वर्तमान को ठीक से नहीं जी सकते। अतीत को ठुकरा दिया, तब भी वर्तमान को ठीक से नहीं जी सकते क्योंकि अतीत ही हमें अपने कर्मों के सही-गलत होने का भान कराता है।और भीऔर भी

12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान स्‍वर्णिम चतुर्भुज और उत्‍तर-दक्षिण व पूर्व-पश्चिम मार्ग पर अंतरराज्‍यीय चेकपोस्ट बनाने का खर्च सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय द्वारा उठाया जा सकता है। देश में कुल ऐसे 177 अंतरराज्‍यीय चेकपोस्ट हैं। केंद्रीय मंत्रालय की तरफ से सोमवार को यह जानकारी दी गई। इस समय ट्रक चलाने वाले को माल ढोने की मूंजरी के लिए तमाम एजेंसियों को झेलना पड़ता है। विभिन्‍न जगहों पर मौजूद चेकपोस्ट पर संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की जातीऔरऔर भी