देश में 34% विदेशी निवेश आया अकेले मॉरीशस से

देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत अब भी मॉरीशस बना हुआ है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में दिसंबर तक के नौ महीनों में आए 24.18 अरब डॉलर के एफडीआई में से 8.24 अरब डॉलर यानी करीब 34 फीसदी मॉरीशस से आया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि मॉरीशस का पता दिखाने पर विदेशी कंपनियों को भारत से की गई कमाई पर टैक्स नहीं देना पड़ता। इसलिए एफडीआई के आंकड़ों से सही तस्वीर नहीं उभरती कि असली निवेश आ किस देश से रहा है।

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार इस दौरान बाकी प्रमुख देशों में सिंगापुर से 3.99 अरब डॉलर, जापान से 2.68 अरब डॉलर, ब्रिटेन से 2.57 अरब डॉलर, जर्मनी से 1.39 अरब डॉलर, नीदरलैंड से 1.07 अरब डॉलर और साइप्रस से 1.02 अरब डॉलर का एफडीआई आया है।

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर की अवधि में एफडीआई का प्रवाह 51 फीसदी बढ़कर 24.18 अरब डॉलर हो गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 16.03 अरब डॉलर रहा था। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में जिन क्षेत्रों को अच्छा खासा एफडीआई आया है, उनमें सेवा क्षेत्र 4.57 अरब डॉलर के साथ सबसे आगे है। उसके बाद फार्मा क्षेत्र में 3.19 अरब डॉलर, दूरसंचार में 1.98 अरब डॉलर, कंस्ट्रक्शन में 1.60 अरब डॉलर, बिजली में 1.44 अरब डॉलर और धातु क्षेत्र को 1.49 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिला।

पिछले पूरे वित्त वर्ष 2010-11 में देश में 19.43 अरब डॉलर का एफडीआई आया था, जबकि चालू वित्त वर्ष 2011-12 के नौ महीनों का ही आंकड़ा इससे ज्यादा, 24.18 करोड़ डॉलर हो गया है। इसकी खास वजह यह कि इस बार शुरुआती तीन महीनों में ही 13.43 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आ गया। अप्रैल, मई और जून के महीनों में देश में क्रमशः 3.12 अरब डालर, 4.66 अरब डालर और 5.65 अरब डालर का एफडीआई आया था। जानकारों का कहना है कि 2011-12 में कुल एफडीआई 30 अरब डॉलर को पार कर जाएगा, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में रुपए की विनिमय दर पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

अधिकारी के मुताबिक अकेले दिसंबर 2011 में देश में आया एफडीआई पिछले दिसंबर के मुकाबले 33 फीसदी घटकर 1.35 अरब डॉलर (7124 करोड़ रुपए) रह गया है। दिसंबर 2010 में देश में 2.01 अरब डॉलर (9094 करोड़ रुपए) का एफडीआई आया था।

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