भारत हथियारों के मामले में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है। यह दुनिया में हो रही हथियारों की बिक्री का 10 फीसदी खरीदता है। स्वीडन के सुरक्षा मामलों की एक संस्था ने कहा है कि पिछले पांच सालों (2007 से 2011 के बीच) में भारत के हथियारों की खरीद में 38 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2012-13 के लिए भारत का रक्षा खर्च 17औरऔर भी

यूपीए सरकार भले ही ढिंढोरा पीटती रहे कि उसने कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रखी है, लेकिन बजट 2012-13 के दस्तावेजों से साफ है कि वह केंद्रीय आयोजना व्यय का महज 2.71 फीसदी हिस्सा कृषि व संबंधित गतिविधियों पर खर्च करती है। नए वित्त वर्ष 2012-13 में कुल केंद्रीय आयोजना व्यय 6,51,509 करोड़ रुपए का है। इसमें से 17,692.37 करोड़ रुपए ही कृषि व संबंद्ध क्रियाकलापों के लिए रखे गए हैं। इन क्रियाकलापों में फसलों से लेकरऔरऔर भी

हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि सेल मार्केटिंग की एक बाजीगरी है जिसके चलिए उपभोक्ताओं की मानसिकता को भुनाया जाता है। शेयर बाजार में भी हर साल इस तरह की ‘क्लियरेंस’ सेल तीन बार लगती है, जिसमें बेचनेवाले अपना माल निकालते हैं। पहली बजट के आसपास, दूसरी दीवाली पर और तीसरी नई साल की शुरुआत पर। सेल में लोगबाग टूटकर भाग लेते हैं। जब उन्हें कोई रोक नहीं सकता तो आपको कोईऔरऔर भी

सभ्य से सभ्य समाज में भी इंसान के अंदर एक जानवर बैठा रहता है। जो रिवाज इस जानवर को हवा देते हैं, उन्हें बेरहमी से खत्म कर देने की जरूरत है। परंपरा के नाम उन्हें चलाते रहना हैवानियत है।और भीऔर भी

फकीर बोला, “मुझमें, तुझमें कोई फर्क नहीं। बस, समय और फासले का फेर है। मैं सच तक पहुंच चुका हूं, जबकि तू अभी रास्ते में हैं। तू भी यहां पहुंचकर वही बोलेगा। फिर बहस क्यों? जिरह का क्या तुक!”और भीऔर भी

वित्त मंत्री ने अपने हिसाब से शेयर बाजार को लुभाने की बहुत कोशिश की। एसटीटी (सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) घटा दिया। ग्राहकों की तंगी से त्रस्त बाजार में नए रिटेल निवेशकों को खींचकर लाने के लिए एकदम तरोताजा, राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम शुरू कर दी। आईपीओ लाने की प्रक्रिया आसान कर दी। इसकी लागत घटा दी। कंपनियों को छोटे शहरों के और ज्यादा निवेशकों तक पहुंचने में मदद की। दस करोड़ रुपए से ज्यादा के आईपीओ कोऔरऔर भी

दुनिया की सन्नामी रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) ने कहा है कि भारत का आम बजट उसकी रेटिंग (BBB-/Stable/A-3) पर थोड़ा नकारात्मक असर डाल सकता है। उसका कहना है कि वित्त मंत्री ने खजाने की व्यवस्था के संबंधित तमाम सुधार घोषित किए हैं, लेकिन माल व सेवा कर (जीएसटी), प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) औप सब्सिडी सीधे लक्ष्य तक पहुंचाने जैसे अहम सुधारों के अमल के वक्त को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। साथ ही भारतऔरऔर भी

कहते हैं कि दोस्त आईने जैसा होना चाहिए जो आपके हंसने पर हंसे और आपके रोने पर रोए। लेकिन ऐसे दोस्त से क्या फायदा जो आपका भ्रम नहीं मिटा सकता? आपको एक से अनेक नहीं बना सकता?और भीऔर भी

यह बजट किसके लिए है? आम के लिए, खास के लिए या बाजार के लिए! अगर प्रतिक्रियाओं के लिहाज से देखा जाए तो इनमें से किसी के लिए भी नहीं। आम आदमी परेशान हैं कि उसे बमुश्किल से मुद्रास्फीति की मार के बराबर कर रियायत मिली है। खास लोगों को कहना था कि वित्त मंत्री को राजकोषीय मजबूती के लिए जो ठोस उपाय करने थे, वैसा कोई भी साहसिक कदम उन्होंने नहीं उठाया है। उन्होंने दस मेंऔरऔर भी

अभी तक अगर किसी हाउसिंग सोसायटी में प्रॉपर्टी टैक्स वगैरह निकालकर प्रति सदस्य महीने का मेन्टेनेंस शुल्क 3000 रुपए तक है तो इस पर कोई सर्विस टैक्स नहीं लगता। नए वित्त वर्ष 2012-13 में सर्विस टैक्स की छूट की यह सीमा प्रति सदस्य 5000 रुपए कर दी गई है। हालांकि वित्त मंत्री ने अपने भाषण में इसे फ्लैट में रहनेवाले सदस्य के मासिक शुल्क में टैक्स छूट की बात कही है और स्पष्ट नहीं किया है किऔरऔर भी