तौल पर एकता, पर मोल पर भिन्नता
ज्यादातर लोगों पर शेयरों की ट्रेडिंग का ऐसा जुनून सवार रहता है कि उन्हें अपने सिवाय कुछ नहीं दिखता। नहीं दिखता कि बाज़ार बनता ही है ठीक एक समय परस्पर विरोधी सोच के संयोग से। वर्तमान भाव पर दोनों की समान राय, लेकिन भावी मूल्य पर एकदम उलट। एक सोचता है बढ़ेगा तो खरीदता है। दूसरा सोचता है गिरेगा तो बेचता है। आत्ममोह के इस सम्मोहन से निकलना ज़रूरी है। अब पकड़ते हैं अगस्त का पहला ट्रेड…औरऔर भी
सीखना विदेशियों से धैर्य व रणनीति
विदेशी संस्थागत निवेशकों का खेल बड़ा व्यवस्थित होता है। कैश सेगमेंट में कोई स्टॉक खरीदा तो डेरिवेटिव सेगमेंट में उसके अनुरूप फ्यूचर्स बेच डाले। दोनों के भाव में 10% सालाना का अंतर हुआ तो वे मजे में आर्बिट्राज करते हैं। उनका लक्ष्य है रुपए डॉलर की विनिमय दर के असर के बाद कम से कम 6-8% कमाकर वापस ले जाना। टैक्स उन्हें देना नहीं होता। जेटली ने कृपा और बढ़ा दी। उनसे सीखते हुए अभ्यास आज का…औरऔर भी
अभी तो बचना है लालच की फांस से
निवेश ही नहीं, ट्रेडिंग में भी हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि न्यूनतम रिस्क में अधिकतम फायदा कैसे कमाया जाए। तभी तो हमने इंट्रा-डे को दरकिनार कर स्विंग ट्रेड के ऊपर से शुरुआत की। किसी दिन हम कैश सेगमेंट में बाज़ार की चालढाल को ठीक से समझने लगेंगे तो डेरिवेटिव्स में भी हाथ लगा सकते हैं। पर अभी उसमें घुसना बच्चे को स्पोर्ट्स कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा देने जैसा होगा। अब तराशते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
इतना रिटर्न दूसरा दे तो करेंगे बंदगी!
बाज़ार में ईद की छुट्टी है तो सोचा कि चलते-चलते इस साल के छह महीने की समीक्षा कर ली जाए। ट्रेडिंग सलाह सेवा अल्पकालिक है और अलग-अलग लोगों के रेस्पांस पर निर्भर है। इसलिए उसकी वस्तुपरक समीक्षा संभव नहीं। लेकिन दीर्घकालिक निवेश की सेवा, तथास्तु की समीक्षा की जा सकती है। कमाल की बात है कि 5 जनवरी से 22 जून तक प्रस्तुत 25 में से 22 कंपनियों के शेयर बढ़े हैं। 88% का जबरदस्त स्ट्राइक रेट…औरऔर भी






