बाज़ार है तभी मूल्य मिलता और दौलत बनती है। समृद्धि पैदा करने और उसका आधार फैलाने में बाज़ार का कोई दूसरा जोड़ीदार नहीं। जो लोग बाज़ार को गाली देते हैं वे असल में समाजवाद के नाम पर जाने-अनजाने सरकारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। गांठ बांध लें कि भारत अभी जिस मुकाम पर है, वहां मोदी हों या न हों, अर्थव्यवस्था का जबरदस्त विकास होना है और बढेंगी अच्छी कंपनियां। इन्हीं की शिनाख्त करते हैं हम…औरऔर भी

बाज़ार में अमूमन तीन तरह की टिप्स चलती हैं। एक जो ट्रेंड की दिशा में चलाई जाती है। ऐसा सभ्य किस्म के ब्रोकरेज हाउस करते हैं। हालांकि अक्सर वे रिटेल को खरीदने तो संस्थाओं से बेचने को कहते हैं। दूसरी जो अंदरूनी खबर, एफआईआई या नामी निवेशकों की खरीद के नाम पर उड़ाई जाती है। तीसरी ऑपरेटर अपनी पकड़ वाले स्टॉक्स में चलाते हैं। इनमें सबसे खतरनाक यही तीसरी टिप्स होती है। इनसे बचें तो शुक्र मनाएं…औरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े जोरशोर से अपना महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘मेक इन इंडिया’ शुरू कर दिया है। गुरुवार को राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में करीब 500 नामी-गिरामी उद्योगपतियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री ने कहा, “अगर आप बाहर से आकर या यहां के लोग औद्योगिक विकास पर ध्यान नहीं देंगे, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर ध्यान नहीं देंगे, रोज़गार के अवसर उपलब्ध नहीं कराएंगे तो यह चक्र कभी पूर्ण होनेवाला नहीं है।” उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों के सामने बहुत बड़ेऔरऔर भी

हेड या टेल। 50-50% प्रायिकता। फिल्म शोले की तरह सिक्का सीधा खड़ा होगा, ऐसा हकीकत में अमूमन नहीं होता। शेयर बढ़ेगा या घटेगा या यथावत रहेगा। ज्यादा प्रायिकता के लिए ट्रेंड के साथ चलने का सूत्र अपनाया जाता है। लेकिन ट्रेंड तभी तक फ्रेंड है जब तक वो दिशा नहीं बदलता। दरअसल, कहां से ट्रेंड बदलेगा, उसी बिंदु को पकड़कर किए गए सौदे सबसे ज्यादा मुनाफा कराते हैं। इसे सीखना बड़ी चुनौती है। अब आज का बाज़ार…औरऔर भी

कोई भी सौदा तभी पूरा होता है जब खरीदने और बेचनेवाले, दोनों को लगता है कि वो उसके लिए फायदे का सौदा है। खरीदनेवाले को लगता है कि शेयर अभी और चढ़ेगा जिसके लिए जरूरी है कि उसके बाद भी दूसरे लोग उसे जमकर खरीदें। वहीं बेचनेवाले को लगता है कि निकल लो, अन्यथा यह और गिरेगा जिसके लिए चाहिए कि उसके बाद भी लोग उसे जमकर बेचें। समझिए यह परस्पर पूरक सच। चलाइए बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी