ज्यादातर रिटेल ट्रेडर इंट्रा-डे ट्रेडिंग करते हैं। इसमें सफलता के लिए ज़रूरी शर्त है कि आपके पास भरपूर पैसा, भरपूर समय और भरपूर अनुभव होना चाहिए। इनमें से रिटेल ट्रेडरों के पास एक ही चीज़ पर्याप्त होती है, वो है भरपूर समय। बाकी दो चीजों के अभाव में वो बराबर घाटा खाते रहते हैं। बहुत हुआ तो ठेले-खोंमचेवाले जैसी जिंदगी जीने लायक कमा लेते हैं। बड़ी अजीब त्रासदी है यह। चलिए, देखते हैं अब मंगलवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

व्यापारी बेचने के लिए जो माल लेता है, उससे उसे कोई निजी मोह नहीं होता। वो दुकान में वही माल लाता है जो चलता है। बेकार में दुकान की जगह भरता। इसी तरह शेयर बाज़ार के ट्रेडर को भी किसी स्टॉक से मोह नहीं पालना चाहिए। वही स्टॉक्स लें जिनमें लिक्विडिटी अच्छी हो। खरीदने और बेचनेवाले शेयरों की सूची अपडेट करते रहना चाहिए क्योंकि अपट्रेन्डिंग और डाउनट्रेन्डिंग स्टॉक बदलते रहते हैं। तो, पकड़ें अब सोम का सिरा…औरऔर भी

याद रखें कि शेयर बाज़ार अपने-आप में कुछ नहीं। वो अंततः अर्थव्यवस्था की छाया है। हमारी अर्थव्यवस्था अभी उस मुकाम है जहां से उसकी अनंत संभावनाएं खुलने जा रही हैं। मंथन चल रहा है। तलहटी में पड़े मुद्दे उभर कर सामने आ रहे हैं। पूरा देश समाधान खोजने में लगा है। विदेश गई प्रतिभाएं वापस आती जा रही हैं। अब भविष्य किसी सरकार का मोहताज नहीं। ऐसे में तथास्तु लगा है अच्छी कंपनियां चुनकर सामने लाने में…औरऔर भी

हम हिंदुस्तानी बड़े ही नहीं हो रहे। सोचते हैं कि कोई दूसरा हमारा कल्याण कर देगा। इस सोच में बंधे ट्रेडर व निवेशक शेयर बाज़ार तक में बस टिप्स खोजते हैं। इससे उन्हें तो कोई फायदा नहीं मिलता। हां, राजनेता, मंदिर, मुल्ला और टिप्सबाज़ ज़रूर ऐश करते हैं। लोगबाग यह समझने को तैयार नहीं कि उन्हें अपना भला खुद करना होगा। हमारी मदद बस 20% काम आएगी। बाकी 80% रंग लाएगी आपकी सतर्कता। अब शुक्र का चक्र…औरऔर भी