अपनी ज़िंदगी हमें काफी कुछ समझ में आती है। उसकी आर्थिक स्थिति भी बखूबी समझ में आती है क्योंकि उसे हम अपनी ज़मीन, अपने धरातल पर खड़े होकर देखते हैं। पर, कोई देश की अर्थव्यवस्था की बात करे तो सब कुछ सिर के ऊपर से गुज़र जाता है क्योंकि हम उसे आसमां से देखते हैं। अगर हम उसे भी अपनी ज़मीन से खड़े होकर देखें तो शायद सब कुछ अपनी ज़िंदगी की तरह साफ-साफ दिखने लगेगा। यहऔरऔर भी

नया साल शुरू और ब्रोकर से लेकर एनालिस्ट व शेयर बाज़ार के ‘ठग’ तक सभी लंबी फेंकने लगे। जबरदस्त कमाई का झांसा। कोई कहता है कि निफ्टी साल भर में 9400 तक पहुंच जाएगा तो कोई 9800 का स्तर बता रहा है। 15% से लेकर 20% कमाई की गारंटी। जीडीपी बढ़ेगा, एफआईआई आएंगे। चाहे कुछ हो जाए, बाज़ार पक्का चढ़ेगा। इसलिए चढ़ जा बेटा सूली पर, भला करेंगे राम। लेकिन आप फंसना नहीं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

नया साल। नए संकल्प। पुराना साल बहुत कुछ सिखाकर गया। उसके सबक याद रखते हुए आगे बढ़ते जाना है। अपनी सोच को व्यापक व स्वावलंबी बनाना है। इधर, ब्रोकरों ने मौका ताड़कर तमाम सलाहें ढेल दी हैं जो उनके काम की तो हैं, अपने नहीं। अगर हमने निवेश का स्वतंत्र सिस्टम विकसित नहीं किया तो पुरानी गलतियां बार-बार करेंगे। तथास्तु में आज ऐसी कंपनी जो पहला लक्ष्य पाने के बाद नई मंज़िल की ओर बढ़ रही है…औरऔर भी

चार्ट पर समय के हर फ्रेम में आपको दिख जाएगा कि सामान्यतः किस भाव पर पहुंचते ही खरीद या बिक्री बढ़ जाती है। इंट्रा-डे ट्रेडर अमूमन 1-5 मिनट, 30 मिनट या घंटे का चार्ट देखते हैं। स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेडर साप्ताहिक चार्ट में घुसने-निकलने का स्तर देखते हैं, दैनिक चार्ट से स्टॉप-लॉस की गणना करते हैं और 30 मिनट के चार्ट से एंट्री की माफिक रेंज तय करते हैं। चलिए अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हम एक्स-रे कराने जाएं तो अस्पताल एक कोण से नहीं, कई कोण से एक्स-रे रिपोर्ट बनाता है ताकि डॉक्टर सही स्थिति को कायदे से समझ सके। इसी तरह जब हम किसी शेयर के स्वभाव व चाल को चार्ट पर समझना चाहते हैं तो उसे समय के एक फ्रेम में देखना पर्याप्त नहीं। स्विंग/मोमेंटम ट्रेडर तीन फ्रेम का इस्तेमाल तो करते ही हैं। ये हैं – 30 मिनट दो हफ्ते, दैनिक व साप्ताहिक चार्ट। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी