सरकार परेशान है कि उसे पर्याप्त टैक्स नहीं मिलता। वैसे, टैक्स से मिला जनधन वो नेताओं से लेकर अफसरों तक पर लुटाने में कोई कोताही नहीं बरतती। निवेशक को चिंता रहती है कि उसे ज्यादा रिटर्न नहीं मिलता। इस चक्कर में वो सदस्य बनाने की स्कीमों में फंस जाता है। समाधान यही है कि देश में उपयोग की चीजें व सेवाएं देनेवाली कंपनियां मजबूत बनें जिससे टैक्स व रिटर्न दोनों बढ़ेगा। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बिना किसी सिस्टम व अनुशासन वाले ट्रेडरों को शुरू में सफलता मिलती है तो उनका जोश बढ़ जाता है। ब्रोकर भी उसकी पीठ थपथपाते हुए लिमिट बढ़ा देता है। ट्रेडर बड़ी पोजिशन में खेलने लगता है और ब्रोकर को ज्यादा सौदों पर ज्यादा कमीशन मिलता है। दोनों की मौज। लेकिन ट्रेडर जब हारना शुरू करता है तो ज्यादा सौदे करके बरबाद हो जाता है। मगर, ब्रोकर का कमीशन बढ़ता जाता है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अक्सर होता यह है कि लोग ब्रोकर के ऑफिस पहुंच जाते हैं। जो भी स्टॉक खबर या किसी वजह से भाग रहा होता है, उसे खरीद लेते हैं। फायदा हुआ तो उसी दिन शाम को सौदा काट देते हैं। अन्यथा, शुक्रवार को फायदा हो या नुकसान, उससे निकल जाते हैं। दरअसल, वे ब्रोकर की मार्जिन सुविधा का इस्तेमाल करते हैं जिसमें उन्हें पांच दिन का क्रेडिट मिलता है। यह तरीका बेहद खतरनाक है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के ट्रेडर को सफलता के लिए जिन पांच बुनियादी सवालों का जवाब खुद से पूछना चाहिए, वे हैं: आप खरीदने या बेचनेवाले स्टॉक्स का फैसला कैसे करते हैं; कैसे तय करते हैं कि कितना खरीदना या बेचना है; कैसे तय करते हैं कि कब खरीदना या बेचना है; घाटे में फंस गई पोजिशन से कब निकल जाना चाहिए; और अंतिम सवाल कि जीतनेवाली पोजिशन से कब निकल जाना चाहिए। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

निफ्टी कहीं भी जाएं, इससे न तो छोटे समय के ट्रेडर का कुछ सधता है और न ही लंबे समय के निवेशक का। निवेशक को तलाशना होता है कि बाज़ार में किसी समय दबे हुए स्टॉक्स कौन-से हैं और उनमें बढ़ने की कितनी संभावना है। वहीं, ट्रेडर को पांच बुनियादी सवालों के इर्दगिर्द ट्रेडिंग का अपना सिस्टम बनाना होता है। उसे इसके अनुशासन का पालन करना चाहिए और किसी की नहीं सुननी चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी