समझना अतीत की चाल अलग-अलग
ट्रेडिंग करते हुए हम अतीत में पैठकर बाज़ार की दिशा तय करनेवाली शक्तियों की मनोदशा समझने की कोशिश करते हैं ताकि उनकी भावी चाल समझ सकें। एक पैर अतीत में, एक पैर भविष्य में। देखने-समझने को हमारे पास अतीत ही होता है। इस अतीत के तीन हिस्से हैं। एक अभी से 20 दिन, दूसरा 50 दिन से एक साल और तीसरा है कम से कम पांच साल का। शॉर्ट, मीडियम व लॉन्ग टर्म। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
समय खराब हो तो ट्रेडिंग से दूरी भली
शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश में मनचाहा परिणाम हासिल करना है तो हमें समय का बड़ा ध्यान रखता पड़ता है। मसलन, अगर हर तरफ निराशा छाई हो, नकारात्मक खबरों का ही बोलबाला हो तो उस समय हमारे या आप जैसे रिटेल ट्रेडर को छोटी अवधि की ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए और उन कंपनियों में पोजिशनल या लंबे समय का निवेश करना चाहिए, जिनके शेयर मजबूती के बावजूद गिरे पड़े हों। अब परखें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
ट्रेडिंग में हर दिन साधें हम समय को
गुजरे समय में देखो तो लगता है कि वो कर लिया होता तो कितना अच्छा होता। अपनी गलतियां देखना और सुधारना बड़ा आसान दिखता है। लेकिन आज और अभी जिस पल में हम खड़े हैं, उसमें पैर टिकाकर भविष्य को देखना बड़ा मुश्किल होता है और गलतियों की आशंका को खत्म नहीं किया जा सकता। ट्रेडिंग में हमें हर दिन यही काम करना होता है। इसके लिए समय को साधना बड़ा ज़रूरी है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
कैसे खुलेंगे कृषि में छिपे अवसर!
सच्ची देशभक्ति इसमें है कि देश के बाहरी दुश्मनों की संख्या न्यूनतम करते हुए व्यापक अवाम के हित में देश में उपलब्ध प्राकृतिक व मानव संसाधनों का अधिकतम उपयोग कैसे पक्का किया जाए। जैसे, भारत के पास दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा कृषियोग्य भूमि है। लेकिन हमारी कृषि की उत्पादकता चीन व अमेरिका की आधी भी नहीं है। इसे सही कर देने से कृषि में छिपे अवसर खुल जाएंगे। तथास्तु में आज कृषि से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी






