ग्लोबल बाज़ार, काम आए अपनी धार
दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं कितनी ग्लोबल हुई हैं, इसका तो पता नहीं। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि दुनिया के वित्तीय बाज़ार एकदम ग्लोबल हो गए हैं। किसी भी अंतरराष्ट्रीय घटना से बड़े से लेकर छोटे बाज़ार तक एक साथ हिल जाते हैं। ग्लोबल नेटवर्क के साथ चलती पूंजी के सामने लोकल दिग्गज़ बौने साबित हो जाते हैं। ऐसे में वित्तीय बाजार की समझ और अपना हुनर ही अंततः काम आता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
किसानों को कर्जखोर बनाकर माफ करने का यह कैसा है गोरखधंधा!
आर्थिक विवेक कहता है कि किसानों की कर्जमाफी गलत है। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल से लेकर देश के सबसे बड़े बैंक, एसबीआई की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य तक इसका विरोध कर चुकी हैं। लेकिन राजनीतिक विवेक कहता है कि चुनावी वादा फटाफट पूरा कर दिया जाए। इसलिए अगर योगी सरकार ने भाजपा के लोक संकल्प पत्र के वादे को पूरा करते हुए पहली कैबिनेट बैठक में ही पांच एकड़ तक की जोतवाले 94 लाख लघु वऔरऔर भी
बंद हो जाए बाज़ार तो फर्क नहीं
हेज-फंडों के निवेश की खास स्टाइल है। वे वहां निवेश करते हैं जहां संभावना होती है, मगर किस का ध्यान नहीं होता। अपने बाज़ार में भी ऐसी बहुतेरी लिस्टेड कंपनियां हैं, खासकर बीएसई में। धंधा जमा-जमाया है और बढ़ भी रहा है। फिर भी निवेशकों की नज़र में चढ़ती नहीं। ऐसी कंपनियां उनके लिए बड़ी मुफीद होती हैं जिन पर शेयर बाज़ार के दो-चार साल बंद होने से फर्क नहीं पड़ता। तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी
वित्तीय आज़ादी छोटी नहीं, लंबी दौड़
वित्तीय आज़ादी कोई 100-200 मीटर की फर्राटा दौड़ नही, बल्कि मैराथन रेस है। यहां हमें छोटी-छोटी पोजिशन लेकर सीखना और अभ्यास करना होता है। तब तक रिस्क न लें, जब तक प्रायोगिक ट्रेडिंग साबित न कर दे कि आपके पास ऐसी धार है जो प्रतिस्पर्धी के पास नहीं। उसके बाद अपनी क्षमता के हिसाब से छोटी-छोटी पोजिशन से शुरू करें और नतीजों को तय करने दें कि पोजिशन कब बढ़ानी है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
पक्का इरादा बने पक्के घाटे का सबब
कहते हैं कि पक्का इरादा हो तो जीवन में हर चीज़ पाई जा सकती है। लेकिन वित्तीय ट्रेडिंग से कमाने का ‘पक्का इरादा’ अक्सर पाने नहीं, बल्कि गंवाने का ज़रिया बन जाता है। मंज़िल के जुनून में हम बहुत जल्दी, बहुत ज्यादा रिस्क उठाने लगते हैं। नतीजतन, हमारी ट्रेडिंग पूंजी ही डूब जाती है, हम हाथ मलते रह जाते हैं जबकि यहां ट्रेडिंग पूंजी को सलामत रखते हुए टिके रहना सबसे महत्वपूर्ण है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी





