वित्तीय बाजार की ट्रेडिंग आपके मन का आईना है, जहां आपकी हर भावनात्मक कमज़ोरी देखने को मिल जाती है। विचारों का स्तर क्या है, भावनाओं का स्वरूप क्या है, आपकी वृत्तियां क्या हैं और आपकी स्मृतियों में क्या-क्या पड़ा है, यह सारा कुछ ट्रेडिंग में झलक जाता है। अगर मनोगत स्थिति से ऊपर उठकर आपने जो जैसा है, उसे वैसा देखने का वस्तुगत सलीका नहीं अपनाया तो ट्रेडिंग में बराबर मात खाते रहेंगे। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

जानकारी हासिल करना आजकल बड़ा आसान है। गूगल पर सर्च करो और पलक झपकते हज़ारों सूचनाएं हाज़िर। लेकिन मंथन के बाद उन्हें ज्ञान तक पहुंचाने व हुनर बनाने में भरपूर वक्त लगता है। इस दौरान किसी साधना जैसा अनुशासन बरतना होता है। इसी तरह ट्रेडिंग में जब तक अपने माफिक पद्धति पा न ली जाए, तब तक धैर्य धरना पड़ता है। लेकिन प्रायः किनारे पर पहुचने से ठीक पहले कश्ती डूब जाती है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

धंधा बढ़ाने के लिए दायरा बढ़ाना पड़ता है और दायरा बढ़ने से रिस्क या अनिश्चितता बढ़ जाती है। लेकिन इस डर से कोई दुबक कर नहीं बैठ जाता। बड़ी-बड़ी कंपनियां भी और ज्यादा बढ़ने के लिए दायरा बढ़ाती हैं। ग्लोबीकरण के बाद तो अपनी आईटी और दवा कंपनियों ने कुछ ज्यादा ही छलांग लगा दी। इससे रिस्क बढ़ने के साथ उनके अवसर भी बढ़ गए हैं। तथास्तु में आज इन्हीं में से एक क्षेत्र की बड़ी कंपनी…औरऔर भी

लोगबाग मुनाफे को प्यार करते हैं और घाटा उठाना पसंद नहीं करते। इसलिए मुनाफा होने पर फटाफट बुक कर लेते हैं, जबकि घाटे की पोजिशन को काटने के बजाय टालते रहते हैं। इसके विपरीत प्रोफेशनल ट्रेडर घाटा काटने में देर नहीं लगाते और मुनाफे को अंतिम छोर तक खींच ले जाते हैं। घाटा न्यूनतम, मुनाफा अधिकतम। वे ट्रेड की योजना बनाते और योजना के अनुरूप ट्रेड करते हुए अपना लक्ष्य हासिल करते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी