सनसनी पकड़ें, बोरिंग व ठंडे शेयर नहीं
नियमतः शत-प्रतिशत और व्यवहार में अधिकांश इंट्रा-डे ट्रेडर व्यक्तिगत स्तर पर ट्रेड करते हैं। भोर में घर से निकल जाते हैं। किसी ब्रोकर या सब-ब्रोकर के यहां दिन के दिन में सौदे निपटाकर देश शाम घर लौट जाते हैं। उनकी यह भी खासियत है कि वे कहीं से भी मिल गई टिप्स क पीछे भाग पड़ते हैं। इस चक्कर में ऐसे आलतू-फालतू स्टॉक्स पर दांव लगा बैठते हैं जिनके बारे में किसी से खास कुछ सुना नहींऔरऔर भी
बुनियादी नियम-धर्म हैं इंट्रा-डे ट्रेडिंग के
इंट्रा-डे ट्रेडिंग के कुछ नियम-धर्म हैं जिनका पालन ज़रूरी है। पहला, उन्हीं स्टॉक्स में ट्रेड करें जिनमें अच्छा-खासा कारोबार होता है। व्यावहारिक मतलब यह कि निफ्टी-50, निफ्टी नेक्स्ट-50 या निफ्टी-100 जैसे सूचकांकों में शामिल स्टॉक्स में ही ट्रेड करें। दूसरा, कभी भी बाज़ार से पंगा न लें। उसके रुख से उल्टा चलने का दुस्साहस न करें। बाज़ार कमज़ोरी के संकेत दे रहा है तो कभी भी खरीद के सौदे न करें और सामर्थ्य हो तो शॉर्ट करें।औरऔर भी
इट्रा-डे ट्रेडिंग में भरा है तनाव व रिस्क!
इंट्रा-डे ट्रेडिंग शेयर बाज़ार में सबसे ज्यादा रिस्की व तनाव भरा उद्यम है, शायद फ्यूचर्स व ऑप्शंस से भी ज्यादा। मगर न जानें क्यों हमारी पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी ने इसे व्यक्तिगत निवेशकों या कहें तो रिटेल ट्रेडरों के लिए ही खोल रखा है। संस्थाओं का प्रवेश इसमें वर्जित है। संभव है कि बैंक, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) इसे मानते हों। लेकिन जितने भी ब्रोकरेज हाउसेज़ हैं, वे तो जमकर डे-ट्रेडिंगऔरऔर भी
उठा-पटक का दौर, इंट्रा-डे ट्रेडिंग सही!
वित्तीय जगह में नीतियों से लेकर बाज़ार तक भारी उथल-पुथल का दौर चल रहा है। अपने यहां रिजर्व बैंक ने ब्याज दर एक बार फिर 0.50% उठाकर 5.90% पर पहुंचा दी। अमेरिका का फेडरल रिजर्व कई बार ब्याज बढ़ाने के बाद आगे भी बढ़ाते रहने पर आमादा है। शेयर बाजार ऐसी भारी उहापोह में जमकर ऊपर-नीचे होता रहता है। हालत यह है कि दिन में निफ्टी का 200-250 अंक उठना-गिरना आज सामान्य बात बन गई है। ऐसेऔरऔर भी









