दिग्गज तक 10 में से 6 ट्रेड ही जीत पाते
शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस का सामना उस्ताद से उस्ताद ट्रेडर तक को करना पड़ता है। बता दें कि विश्वस्तर पर एक रॉबिन कप ट्रेडिंग चैम्पियनशिप होती है। इसके डेटाबेस में ट्रेडिंग और ट्रेडरों के बिजनेस का भरपूर डेटा मिल जाता है। इसके मुताबिक विश्व चैम्पियन स्तर के ट्रेडर बड़ी मुश्किल से 60% से ज्यादा की कामयाबी दर हासिल कर पाते हैं। मतलब, दस में से चार सौदों में उन्हें आम तौर पर घाटा या स्टॉप-लॉसऔरऔर भी
ऐसा ट्रेडर है नहीं जो घाटे में फंसा नहीं!
शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग हर नज़रिए से एक तरह का बिजनेस है और हर बिजनेस की तरह इसकी भी खास लागत होती है। दिक्कत यह है कि इंट्रा-डे ट्रेडर इस सच्चाई को सोख नहीं पाते। वे हमेशा जीतना चाहते हैं और हारने पर उनका दिल-दिमाग सब बैठ जाता है। यह नौसिखिया ट्रेडर की मानसिकता है, किसी अनुभवी या कामयाब ट्रेडर की नहीं। असल में जीतने का हुनर तो बहुतेरे लोग सिखाते हैं। इंटरनेट पर ऐसी सामग्री कीऔरऔर भी
बिना सिस्टम के ट्रेड से हो जाते बरबाद
सालों-साल से शेयर बाज़ार में घुसनेवाले ज्यादातर ट्रेडर इंट्रा-डे ट्रेडिंग से शुरुआत करते हैं। उनमें न तो लम्बे निवेश का धैर्य होता है और न ही दो-चार दस दिन से लेकर एकाध महीने तक इंताज़ार कर पाने का माद्दा। दिन का दिन में सौदा काटा और निकल गए। आखिर आज का रिस्क कुछ दिन तक क्यों खींचा जाए! इस सोच में कोई समस्या नहीं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश इंट्रा-डे ट्रेडर अपना कोई सिस्टम बनाएऔरऔर भी
हाल सेंसेक्स का और सूरत बाजार की
सेंसेक्स हो, निफ्टी हो या हो म्यूचुअल फंड, जोखिम से जुड़े हुए इन बाजार आधारित निवेश विकल्पों ने इस साल जून से ही दिल गार्डन-गार्डन कर रखा है। अब आगे बाजार क्या रुख ले रहा है, इसकी खलबली, भविष्यवाणी सब चल रही है एक साथ। अगले कुछ महीनों में बाजार क्या रहेगा? खलबली क्यों है, बाजार आधारित इस जोखिम भरे स्टॉक या शेयर बाज़ार में निवेश के सुखद अवसर बना रहे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करतेऔरऔर भी
जो पारखी वो क्यों डरें बाज़ार गिरने से?
ऑस्ट्रेलिया से लेकर अमेरिका, यूरोप व एशिया तक में सक्रिय अग्रणी ब्रोकरेज़ फर्म सीएलएसए ने डराया है कि भारत का शेयर बाज़ार 30% तक गिर सकता है। CLSA कोई ऐसी-गैरी फर्म नहीं है। उसने दुनिया में बढ़ती ब्याज दर, सरकारी बांडों पर बढ़ते यील्ड और अमेरिका से लेकर यूरोप तक गिरते शेयर बाज़ार के ट्रेन्ड और भारत की विशेष स्थिति के आधार पर यह भविष्यवाणी की है। लेकिन जो लोग ज़मीन पर गिरे हीरों को चुनने काऔरऔर भी








