शेयर बाज़ार समेत समूचे वित्तीय बाज़ार में सक्रिय ट्रेडर के लिए सबसे अहम है उसकी सतर्कता। लम्बे निवेश में तो एक बार ठोंक-बजाकर कंपनी के शेयर खरीद लिए और फिर सालों के लिए सो गए तो कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में तो सावधानी हटी, दुर्घटना घटी की स्थिति हमेशा बनी रहती है। ट्रेडर को बराबर देखते रहना पड़ता है कि दूसरे खिलाड़ी क्या कर रहे हैं। खासकर, म्यूचुअल फंडों और विदेशी पोर्टफोलियोऔरऔर भी

साल का आखिरी हफ्ता काम-धंधे और व्यस्तता का नहीं, बल्कि फुरसत का होता है। आमतौर पर कॉरपोरेट क्षेत्र से लेकर मीडिया के सीनियर लोग और तमाम प्रोफेशनल क्रिसमस से लेकर नया साल तक 10-12 दिन की छुट्टियां बाहर ही मनाते हैं। रिटेल ट्रेडर को भी इस वक्त का इस्तेमाल शांति से गुजरते साल की समीक्षा करते हुए बिताना चाहिए ताकि साफ हो सके कि साल के दौरान उसने क्या-क्या गलतियां कीं और क्या-क्या सबक सीखे। उसे समझनाऔरऔर भी

पता ही नहीं चला। देखते ही देखते साल बीतने को आ गया। साल 2022 का आखिरी सप्ताह। हिसाब-किताब लगाने का समय कि इस साल कितना पाया, कितना गंवाया। भारी उतार-चढ़ाव से गुजरे इस साल में निफ्टी-50 सोमवार, 3 जनवरी से शुक्रवार, 23 दिसंबर तक मात्र 1.03% बढ़ा है। यह साल भर में शेयर बाज़ार का बेहद निराशाजनक प्रदर्शन माना माना जाएगा। क्या आपने शेयर बाज़ार में निवेश से कम से कम इतना और ट्रेडिंग से इसका पांच-दसऔरऔर भी

किसी कंपनी के शेयर में किया गया निवेश साल-दर-साल अगर बैंक एफडी या सरकारी बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न दे रहा है तो मतलब कि आपने सही वक्त पर सही कंपनी पकड़ ली। लेकिन न तो हमेशा ऐसा होता है और न ही सही कंपनी चुनने का कोई अचूक सूत्र है। यकीनन, हमें हर कोण से देखने-परखने के बाद कंपनी चुननी चाहिए। लेकिन पोर्टफोलियो में कुछ कंपनियां शानदार रिटर्न देती हैं तो कुछ फिसड्डी और घाटे का सबबऔरऔर भी