आईएमएफ ने 14 अप्रैल 2025 को जारी वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा था कि वर्ष 2025 या हमारे संदर्भ में वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का जीडीपी 4.187 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है जो जापान के अनुमानित जीडीपी 4.186 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा ज्यादा होगा। इस तरह भारत तब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। तब हमारे सरकारी तंत्र ने जबरदस्त हल्ला मचाया था। लेकिन इस बार 14 अप्रैल 2026 को आईएमएफऔरऔर भी

पूरे एक साल जनता के बहुमत से चुनी हुई सरकार राष्ट्र के साथ धोखा करती रही, बार-बार सैकड़ों बार झूठ बोलती रही कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। सबसे पहले यह झूठ नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्रमण्यम ने बाकायदा 25 मई 2025 को एक प्रेस कॉन्फेंस में ऐलानिया तौर पर बोला था कि भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। किसी ने उनसे यहऔरऔर भी

शेयर बाज़ार निवेशकों के बल पर चलता है, चाहे वे देशी हों या विदेशी। विदेशी निवेशक लगातार देश से भागे जा रहे हैं। इस साल ही वे जनवरी से अब तक ₹1.75 लाख करोड़ निकाल चुके हैं। इनके निकलने की भरपाई देशी निवेशक संस्थाएं, खासकर म्यूचुअल फंड करते हैं। उनके पास धन का मुख्य प्रवाह एसआईपी का है। देश में एसआईपी खातों की संख्या मार्च में 9.72 करोड़ पर पहुंच गई, जिनमें मार्च महीने में ₹32,087 करोड़औरऔर भी

दुनिया के तमाम देश जीडीपी की गणना इसलिए करते हैं ताकि विकास की माकूल रणनीति बनाई जा सके। पर मोदी सरकार के नेतृत्व में चल रहा भारत शायद दुनिया का इकलौता देश है जहां जीडीपी को प्रचार व भौकाल का साधन बना दिया गया है। विकास का सही डेटा देश के नीति-नियामकों और उद्योग-धंधों को ऐसा आधार देता है जिस पर खड़े होकर वे मांग, निवेश की संभावनाओं और मौद्रिक व आर्थिक नीति का समुचित आकलन करऔरऔर भी

सच्चाई कभी धारणाओं में बंधकर नहीं चलती। वो धारणाओं को तोड़ देती है। 27 फरवरी को जीडीपी की नई सीरीज़ जारी करते वक्त सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा था कि देश के रीयल जीडीपी की विकास दर वित्त वर्ष 2023-24 में 7.2%, 2024-25 में 7.1% और 2025-26 में 7.6% रही है। इसका 7% से ऊपर रहना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कम से कम इतनी विकास दर से ही भारत 2047 तक विकसितऔरऔर भी