लगा रहे रिजर्व बैंक, रुपया सौ की ओर
रिजर्व बैक का कहना है कि वो डॉलर-रुपए की विनिमय दर के बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव या वोलैटिलिटी को रोकने के लिए ही बाज़ार में हस्तक्षेप करता है। लेकिन हकीकत यह है कि रुपए को गिरने से बचाने के लिए रिजर्व बैंक इस साल जनवरी से अक्टूबर तक बाज़ार में शुद्ध रूप से 31.98 अरब डॉलर बेच चुका है। साल 2024 की इसी अवधि में उसने बेचने के बजाय बाज़ार से शुद्ध रूप से 23.03 अरब डॉलर खरीदेऔरऔर भी
सबके आगे दबा, रुपए पर दहाड़े डॉलर
बाज़ार में रिजर्व बैंक के डॉलर झोंकने के बावजूद रुपया फिर कमज़ोर होने लगा है। रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप रुपए को मजबूत करने का कारगर उपाय नहीं है। वो कुछ समय के लिए गिरने की रफ्तार को थोड़ा थाम सकता है, लेकिन उसकी धार को नहीं रोक सकता। कुछ महीने पहले जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस बाबत पूछा गया तो उनका जवाब था: रुपया कमज़ोर नहीं हो रहा, बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है। उनकाऔरऔर भी
कागज़ का रुपया साथ ले उड़ा सारे दावे
रुपया उड़ रहा है या डूब रहा है रसातल में? 16 दिसंबर को जब अमेरिकी डॉलर 91.09 रुपए का हो गया तो हर तरफ हंगामा मच गया। यह रुपए का आज तक सबसे निचला स्तर था। मज़ाक किया जाने लगा कि अंततः अमेरिकी डॉलर की विनियम दर ने उसके आईएसडी कोड़ (+1) को रुपए में भारत के आईएसडी कोड (+91) के बराबर कर दिया। उस दिन मंगलवार था। सरकार ने फौरन रिजर्व बैंक को निर्देश दिया औरऔरऔर भी
भाव भगवान तो उनके साथ ऐसा खेल!
किसी ज़माने में शेयर बाज़ार में लोग भावों को भगवान मानते थे। आज भी कुछ लोग मानते हैं। लेकिन भाव के ‘भगवान’ के साथ बाज़ार में कैसा खेल होता है, इसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। आरआरपी सेमिकंडक्टर्स केवल बीएसई में लिस्टेड है। अप्रैल 2024 में इसके शेयर का भाव ₹20 की रेंज में चल रहा था। वहां से बढ़ते-बढ़ते 10 नवंबर 2025 को ₹11,902 तक चला गया। करीब डेढ़ साल में 59,410% का रिटर्न। वो भीऔरऔर भी






