अर्थव्यवस्था का तेज़ी से बढ़ना अफ़साना
शीर्ष रेटिंग व रिसर्च एजेंसी क्रिसिल का आकलन है कि इस साल हमारा निर्यात बहुत हुआ तो 2-4% ही बढ़ सकता है क्योंकि हमारे निर्यात के दो सबसे ठिकानों – अमेरिका व यूरोप की विकास दर क्रमशः 2% से घटकर 1.4% और 3.5% से घटकर 0.7% रह जाने का अंदेशा है। ऐसे में हमारी अर्थव्यवस्था कैसे ज्यादा बढ़ सकती है? बीते वित्त वर्ष 2022-23 की विकास दर का अगला अनुमान 31 मई को आना है। यह दरऔरऔर भी
घट रहा निर्यात तो अर्थव्यवस्था तेज़ कैसे
आर्थिक विकास अगर प्रतिबद्धता के बजाय चुनाव जीतने का राजनीतिक नारा बन जाए तो देश के सामने कभी सच्ची तस्वीर नहीं आती और उसकी अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क होना तय हो जाता है। कहा जा रहा है कि हम बहुत तेज़ी से विकास कर रहे हैं। लेकिन सरकारी आंकड़े ही बताते हैं कि देश का वस्तु निर्यात लगातार पांच महीनों से घटता जा रहा है। दिसंबर 2022 में यह 3.1% घटा था। उसके बाद इस साल जनवरीऔरऔर भी
निवेशयोग्य कंपनी चुनने के पांच पैमाने!
बहुत सोच-समझकर, आग-पीछा देखकर कंपनी चुनकर उसके शेयर खरीदे। फिर भी उसका शेयर बढ़ने के बजाय घाटा दे सकता है। यह शेयर बाजार का रिस्क है जिससे कोई नहीं बच सकता। इसलिए निवेशकों को एक नहीं, कई तरह की कंपनियों में निवेश करने को कहा जाता है। फिर भी कुछ ज़रूरी पहलू है जिन्हें हमें निवेश से पहले हर कंपनी में देख लेना चाहिए। पहला, कंपनी कहीं ऋण के बोझ तले दबी तो नहीं है। उसका ऋण-इक्विटीऔरऔर भी
श्रम बाज़ार में बढ़ गए, श्रम शक्ति में नहीं
श्रम बाज़ार में स्नातकों की बढ़ती शिरकत यकीनन शुभ संकेत है। लेकिन देश की श्रमशक्ति में उनका हिस्सा अब भी काफी संकुचित है। कोरोना से आने से पहले सितंबर-दिसंबर 2019 में यह हिस्सा 13.2% हुआ करता था। कोरोना के दौरान जनवरी-अप्रैल 2020 में थोड़ा-सा बढ़कर 13.7% हो गया। लेकिन सितंबर-दिसंबर 2020 में घटकर 11.7% पर आ गया। लेकिन उसके बाद भी 12% के आसपास ठहरा हुआ है, जबकि श्रम बाज़ार में उनीक भागीदारी बढ़ गई है। इसकीऔरऔर भी






