उधर ऊर्जित पटेल ने भारतीय रिजर्व बैक के गवर्नर पद से इस्तीफा दिया, इधर सरकार ने दो दिन बाद ही 12 दिसंबर 2018 को वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव रह चुके शक्तिकांत दास को गवर्नर बना दिया।  तब तक दास की आर्थिक व वित्तीय मामलों की उतनी ही समझ थी जितनी आईएएस की तैयारी और वित्त मंत्रालय में सेवा देते हुए हासिल की थी। अन्यथा उन्होंने इतिहास व पब्लिक एडिमिनिस्ट्रेशन में ही एमए कर रखाऔरऔर भी

रिजर्व बैंक के गवर्नर पद से ऊर्जित पटेल का इस्तीफा देना कोई सामान्य घटना नहीं थी। भारत के केंद्रीय बैंक के आठ दशक से ज्यादा के इतिहास में यह पहली घटना थी, जब किसी गवर्नर ने बीच कार्यकाल में इस्तीफा दिया था। उनका तीन साल का कार्यकाल 4 सितंबर 2019 को खत्म होना था। लेकिन उन्होंने इसके नौ महीने ही इस्तीफा दे दिया। पटेल ने मात्र 88 शब्दों के अपने इस्तीफे में इसकी वजह व्यक्तिगत बताई थी।औरऔर भी

वो 6 नवंबर 2106 की तारीख थी, जब भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता पर पहला हमला हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संदेश में ऐलान कर दिया कि रात 12 बजे से 500 और 1000 रुपए के नोटों की वैधता खत्म की जा रही है। कहा गया कि इससे देश में कालाधन, आतंकवाद व नकली नोटों जैसी तमाम समस्याएं खत्म हो जाएगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मगर, बड़ा अपराध यहऔरऔर भी

शेयर बाज़ार वित्तीय जगत का एक छोटा-सा हिस्सा है। किसी देश के वित्तीय जगत के केंद्र में होता है उसका केंद्रीय बैंक। नोटों के प्रबंधन से लेकर मौद्रिक नीति तक का निर्धारण वही करता है। केंद्रीय बैंक देश के वित्तीय बाज़ार के लिए हृदय का काम करता है। बैंक उसके लिए धमनी तंत्र जैसे हैं। देश की मुद्रा अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगी होगी या सस्ती, बाज़ार की इस क्रिया पर भी अंकुश लगाने का अहम काम केंद्रीयऔरऔर भी

बनाता है कोई, कमाता है कोई। दुनिया की यह रीत बड़ी पुरानी है और एकदम नई भी। व्यापार अपने यहां आज भी कृषि के बाद रोजी-रोजगार का सबसे बड़ा साधन है। एक ही गली-मोहल्ले में किराना से लेकर सर्राफा तक की कई दुकानें मिल जाती हैं। सभी दुकानदार ठीकठाक कमा लेते हैं और घर के तमाम सदस्यों को काम-धंधा भी मिल जाता है। दुनिया में भी व्यापार बहुत बड़ा धंधा बना हुआ है। आज अमेजॉन दुनिया काऔरऔर भी