देश के आम ही नहीं, अधिकांश खास लोग भी मानते हैं कि इस समय देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोज़गारी है और 4 जून को आम चुनावों के नतीजों के बाद जो नई सरकार बनेगी, उसके सामने सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बेरोज़गारी ही रहेगी। यह निष्कर्ष है प्रमुख समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा बड़े राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए सर्वे का। रॉयटर्स ने 16 अप्रैल से 23 अप्रैल के बीच ऐसे 26 अर्थशास्त्रियोंऔरऔर भी

अगर आपका निवेश कुछ दिनों, महीने या साल भर में 20% गिर जाए और आपकी रातों की नींद हराम हो जाए तो साफ हो जाता है कि आपकी रिस्क क्षमता शेयर बाज़ार में निवेश करने की नहीं है। तब आपको एफडी या बॉन्ड जैसे शांत माध्यमों में निवेश करना चाहिए। हम निवेश मन की शांति खोने के लिए नहीं, बल्कि आज और कल को सुरक्षित व शांत रखने के लिए करते हैं। ज्यादा रिटर्न सभी को अच्छाऔरऔर भी

चुनावी लोकतंत्र की राजनीति में झूठ से सत्ता हासिल की जा सकती है क्योंकि जनता की याददाश्त लम्बी नहीं होती और भारत जैसे आस्था-प्रधान देश में लोगों को आसानी से भावनाओं में बहकाया जा सकता है। हालांकि यहां भी काठ की हांड़ी बार-बार नहीं चढ़ती। लेकिन अर्थनीति में झूठे दावे देश की आर्थिक बुनियाद को ही खोखला कर सकते हैं और सच उजागर होने पर सबसे तेज़ गति से बढ़ती हमारी अर्थव्यवस्था भी धराशाई हो सकती है।औरऔर भी

कई महीनों से बैंकों से उधार लेनेवाले बढ़ रहे हैं, जबकि बैंकों में डिपॉजिट कम गति से बढ़ रही है। क्रेडिटयेज़ रेटिंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 22 मार्च 2024 को खत्म पखवाड़े में बैंकों द्वारा दिए गए उधार 20.2% बढ़कर ₹164.3 लाख करोड़ हो गए, जबकि बैंकों की जमा 13.5% ही बढ़कर ₹204.8 लाख करोड़ पर पहुंच सकी। उसके बाद रिजर्व बैंक के सबसे ताज़ा आंकड़ों पर नज़र डालें तो 5 अप्रैल को खत्म पखवाड़े मेंऔरऔर भी

भारतीय बैंक इस समय 20 सालों की सबसे विकट डिपॉजिट समस्या से जूझ रहे हैं। इस समय क्रेडिट-डिपॉजिट या सीडी अनुपात 80% हो चुका है जो साल 2005 के बाद से अब तक का उच्चतम स्तर है। सीडी अनुपात दिखाता है कि बैंकों का कितना डिपॉजिट ऋण देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारे बैंक बीते वित्त वर्ष 2023-24 में डिपॉजिट खींचने के लिए जूझते रहे। हालत यह है कि लोगबाग होम लोन से लेकरऔरऔर भी