दावा करे शिखंडी, निर्यात में है फिसड्डी!
एक समय था, जब चीन से लेकर एशिया के तमाम देशों ने निर्यात के दम पर शानदार आर्थिक विकास हासिल किया। लेकिन जिस तरह यूरोप से लेकर अमेरिका तक सभी विकसित देशों में अर्थव्यवस्था व खपत ठहरी हुई है, उसमें भारत के लिए निर्यात के बलबूते अर्थव्यवस्था को तेज़ गति से बढ़ाना संभव नहीं है। फिर भी घरेलू बाज़ार और खपत पर फोकस करने के बजाय मोदी सरकार और उसके शागिर्द अर्थशास्त्री निर्यात केंद्रित विकास का मंसूबाऔरऔर भी
झूठ व भ्रम में बढ़ रहा सामरिक खतरा!
झूठ और भ्रम के पांव नहीं होते। वो पल भर में उड़कर कहीं से कहीं पहुंच जाते हैं। लेकिन झूठ और भ्रम का स्रोत अगर देश की सरकार ही बन जाए तो उस देश का बेड़ा गरक होने लगता है। केंद्र सरकार का एक मंत्रालय है सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय। इसने देश के आर्थिक व औद्योगिक विकास का दो तरह का डेटा पेश किया है। एक है नेशनल एकाउंट्स स्टैटिसटिक्स (एनएएस) और दूसरा है एनुअल सर्वेऔरऔर भी
मेक-इन इंडिया में चीन की पूरी घुसपैठ!
मोदी सरकार ने चीन के साथ घृणा व प्रेम का विचित्र रिश्ता बना रखा है। सैटेलाइट तस्वीरें बताती है कि चीन लद्दाख में भारतीय सीमा के भीतर अवैध निर्माण कर रहा है। खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सितंबर 2020 में राज्यसभा में बताया था कि चीन ने लद्दाख में भारत की 38,000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। राजनीतिक रूप से चीन को भारत का नंबर-एक दुश्मन माना जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदीऔरऔर भी
छोटे देशों तक से देश को व्यापार घाटा!
मॉरगन स्टैनली रिसर्च का अनुमान है कि भारत तीन साल बाद 2027 में ही जापान व जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। साथ ही साल भर के भीतर बीएसई सेंसेक्स 82,000 अंक के पार जा सकता है। यह एक विदेशी ब्रोकरेज़ फर्म की सदिच्छा या मार्केटिंग पैंतरा है। हो सकता है कि ऐसा हो भी जाए। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था अंदर से तब मजबूत होगी, जब उसकी बुनियाद सत्यनिष्ठा व ईमानदारीऔरऔर भी






