पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के बनाए लिस्टिंग समझौते के मुताबिक हर साल सभी लिस्टेड कंपनियों को 15 अप्रैल से पहले मार्च की तिमाही तक शेयरधारिता की ताजा स्थिति स्टॉक एक्सचेंजों के पास भेज देनी होती है और स्टॉक एक्सचेंजों को फौरन यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर डाल देनी होती है। लेकिन आज 22 अप्रैल की तारीख बीतने वाली है, फिर भी कम से कम 25 कंपनियां ऐसी हैं जिनकी शेयरधारिता की ताजा जानकारी बीएसई और एनएसईऔरऔर भी

देश में नए से नए वित्तीय उत्पाद लाए जा रहे हैं। रिजर्व बैंक अब उस सीडीएस (क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप) को लाने की तैयारी कर चुका है जिसके चक्कर में साल 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट उभरा था। लेकिन देश का सारा वित्तीय बाजार एकदम छिछला और चंद लोगों तक सिमटा हुआ है। इसका पता इससे चलता है कि अभी देश में कुल डीमैट खातों की संख्या 1.7 करोड़ तक पहुंची है। इसमें दोनों डिपॉजिटरी संस्थाओं एनएसडीएल औरऔरऔर भी

जिस कंपनी की प्रति शेयर कमाई (ईपीएस) 62.66 रुपए हो, उसके शेयर का मूल्य कितना होना चाहिए? माना जाता है कि शेयर का बाजार मूल्य ईपीएस का दस गुना हो, यानी पी/ई अनुपात 10 तक हो तो वह बेहद वाजिब और निवेश के लिए सुरक्षित शेयर है। इस हिसाब से शेयर होना चाहिए 620 रुपए के आसपास। ऊपर से कंपनी की पूंजी में सरकार का 37.84 फीसदी हिस्सा हो तो वहां निवेश को लेकर और निश्चिंत हुआऔरऔर भी

वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के अधिकार क्षेत्र के एक-दूसरे में घुसने की समस्या बढ़ती जा रही है। अभी यूलिप पर पूंजी बाजार की नियामक संस्था, सेबी और बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था, आईआरडीए के बीच मची मार किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है कि बैंकिंग क्षेत्र के नियामक, रिजर्व बैंक ने तय कर दिया है कि निजी क्षेत्र के किसी भी बैंक को क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) से पहले उससे अनुमति लेनी पड़ेगी। आज रिजर्व बैंक नेऔरऔर भी

सरकार इस बात से चिंतित है कि देश में ब्याज दर वायदा (इंटरेस्ट रेट फ्यूचर्स या आईआरएफ) का कारोबार ठंडा पड़ता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ने सालाना मौद्रिक नीति में प्रस्ताव रखा है कि अब आईआरएफ में 5 साल व दो साल की सरकारी प्रतिभूतियों के साथ ही 91 दिवसीय ट्रेजरी बिलों पर भी आधारित कांट्रैक्ट शुरू किए जाएं। अभी तक केवल दस साल के सरकारी बांड पर आधारित कांट्रैक्टऔरऔर भी

विजया बैंक पिछले चार सालों से लगातार लाभांश देता रहा है। इस बार भी उसकी बोर्ड मीटिंग 30 अप्रैल को है जिसमें वित्त वर्ष 2009-10 के नतीजों के साथ ही लाभांश देने पर विचार किया जाएगा। मंगलवार को उसका शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में 2.58 फीसदी बढ़कर 49.70 रुपए और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में 2.79 फीसदी बढ़कर 49.75 रुपए पर बंद हुआ है। यह शेयर बीएसई-200 सूचकांक का हिस्सा है। इसलिए इस पर कोई सर्किटऔरऔर भी

रिजर्व बैंक और बैंकिंग ओम्बड्समैन के दफ्तर को बराबर शिकायतें मिल रही हैं कि बैंक कुछ ऋणों व अग्रिम पर अनाप-शनाप ब्याज और शुल्क ले रहे हैं। बैंक आम ग्राहकों, किसानों व पेंशनभोगियों के साथ उचित बर्ताव नहीं करते। यह हालत तब है जब रिजर्व बैंक ने सालोंसाल से ग्राहकों के साथ उचित बर्ताव सुनिश्चित करने के लिए बहुत सारे उपाय कर रखे हैं। इसलिए अब रिजर्व बैंक ने एक कमिटी बनाने का फैसला किया है जोऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने भले ही सीआरआर को 6 फीसदी पर लाकर बैंकों से 12,500 करोड़ रुपए की तरलता खींच ली है। लेकिन अब भी सिस्टम में इतना धन है कि हाल-फिलहाल ब्याज दरों में किसी वृद्धि के आसार नहीं हैं। यह कहना है देश की सबसे बड़ी हाउसिंग कंपनी एचडीएफसी की प्रबंध निदेशक रेणु सूद कर्नाड का। उनका कहना था कि बाजार में रेपो व रिवर्स रेपो में इतनी ही कमी की उम्मीद थी। लेकिन सीआरआर मेंऔरऔर भी

ब्याज दरों में मामूली बढोतरी हुई। बाजार ने इसे आसानी से पचा भी लिया क्योंकि मौद्रिक नीति से पहले ही गोल्डमैन सैक्स के मामले ने बाजार को करेक्शन का मौका दे दिया था। बाजार अब सामान्य हो चुका है और पटरी पर लौट आया है। रोलओवर कल से शुरू हो रहा है। हमने निफ्टी और गैल इंडिया में खरीद की सलाह दी थी और दोनों अच्छा रिटर्न दे चुके हैं। हमने निफ्टी में 5170 के स्तर परऔरऔर भी

यूं तो मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक ठीक-ठीक क्या उपाय करेगा, इसका सटीक अनुमान लगाना लगभग नामुमकिन होता है। लेकिन आज तो कमाल हो गया जब सूत्रों से मिले इशारे, बातचीत और विश्लेषण के आधार पर अर्थकाम की तरफ से पेश की गई खबर एकदम सही साबित हो गई। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2010-11 की मौद्रिक नीति में रेपो, रिवर्स रेपो और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 25 आधार अंकों या 0.25 फीसदी की वृद्धि करऔरऔर भी