आम को चूसके खाना पसंद सरकार को!
अपने यहां टैक्सों की विचित्र स्थिति है। सालाना करोड़ों में कमा रहा कॉरपोरेट क्षेत्र कुछ लाख कमानेवाले लोगों से कम टैक्स देता है और किसी तरह गुजारा कर रहे देश के आमजन जीएसटी, एक्साइज़ व कस्टम शुल्क के रूप में सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं। बजट के मुताबिक सरकार को चालू वित्त वर्ष 2024-25 में कॉरपोरेट टैक्स से ₹10.20 लाख करोड़ मिलने हैं, जबकि इनकम टैक्स से मिलनेवाली रकम इससे अधिक ₹11.87 लाख करोड़ रहेगी। वहीं, आमजनऔरऔर भी
निवेश की मूल धारणा बिखरी चिंदी-चिंदी
अफसोस की बात है कि अपने यहां 2.5 लाख रुपए की इनकम टैक्स मुक्त सीमा 2014-15 से जस की तस चली आ रही है, जबकि तब से अब तक दस साल में मुद्रास्फीति की औसत दर 5.50% रही है। इस हिसाब से तब के 2.5 लाख रुपए आज के 4.27 लाख रुपए हो चुके हैं। लेकिन सरकार के लिए धन के समय मूल्य या टाइम वैल्यू ऑफ मनी का कोई मतलब नहीं। वो महंगाई को डिस्काउंट किएऔरऔर भी
इनसे कुछ न होगा, बस झांकी ही झांकी
बजट को तीन अहम काम करने थे। निजी निवेश बढ़ाने के इंतज़ाम, रोज़गार के अवसर और आम खपत को बढ़ाना। लेकिन खपत बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने के बजाय कैपिटल गेन्स टैक्स और एसटीटी बढ़ा दिया। संगठित क्षेत्र में नई नौकरी पानेवाले को पहले महीने ₹15,000 देने और कर्मचारियों को दो साल तक ईपीएफओ में ₹3000 रुपए तक के मासिक योगदान के रीइम्बर्समेंट से नई नौकरियां कैसे पैदा हो सकती हैं? दावा किऔरऔर भी
महंगाई की मार के ऊपर टैक्स का भार!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अब तक के ट्रैक-रिकॉर्ड से साबित कर दिया है कि वे सरकार का खज़ाना भरने के लिए टैक्स वसूलने और दूसरे तरीके अपनाने में किसी भी हद तक गिर सकते हैं। रिजर्व बैंक से एकबारगी ₹2.11 लाख करोड़ का रिकॉर्ड लाभांश वसूलना आज तक कोई दूसरा नहीं कर सका। वहीं, जनता से ज्यादा से ज्यादा टैक्स वसूलने का कोई भी मौका वे नहीं चूकते। इस बार भी नहींऔरऔर भी






