मुम्बईकरों को पानी की परेशानी के बीच सूचना के अधिकार से एक हैरतअंगेज सूचना निकली है कि बृहन्मुम्बई महानगर पालिका (बीएमसी) द्वारा कम से कम 18 पानी कंपनियों को उनकी मुनाफाखोरी के लिए लाखों लीटर पानी दिया जा रहा है। एक तरफ जहां शहर के निवासियों के सामने पानी का घनघोर संकट छाया हुआ है वहीं दूसरी तरफ इन 18 कंपनियों को हर रोज 8,10,000 लीटर पानी दिया जा रहा है और बदले में उनसे पूरे सालऔरऔर भी

शेयर बाजार में सर्किट का खेला हर दिन चलता है। जैसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में 7 अप्रैल को 356 शेयरों पर सर्किट ब्रेकर लगा था, जिसमें से 274 पर अपर सर्किट और 82 पर लोअर सर्किट लगा हुआ था। सोमवार को शिवालिक बाईमेटल पर अपर सर्किट लगा तो बुधवार को कावेरी टेलिकॉम पर। शेयर कहीं ज्यादा उछल-कूद न मचाएं, इसके लिए हमारी पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने सर्किट लगाने का नियम बना रखा है। यहऔरऔर भी

देश के अनुसूचित वाणिज्यक बैंकों ने बीते वित्त वर्ष 2009-10 के आखिरी पखवाड़े में 1,15,549 करोड़ रुपए का ज्यादा कर्ज दिया है। यह पूरे वित्त वर्ष में बैंक कर्ज में हुई कुल 4,64,850 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी का 24.85 फीसदी है। रिजर्व बैंक की तरफ से बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 26 मार्च 2010 को बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज की मात्रा 32,40,399 करोड़ रुपए है, जबकि 12 मार्च 2010 को खत्म हुए पखवाड़ेऔरऔर भी

कावेरी टेलिकॉम प्रोडक्ट्स में इस समय आग-सी लगी हुई है। बुधवार को सुबह नौ बजे के आसपास इसमें खरीद की सलाह आई और सीधे खुला ही पिछले बंद भाव 90.60 रुपए से 2.40 रुपए बढ़कर 93 रुपए पर। फिर पौने दस नहीं बजे थे कि यह 4.50 रुपये की बढ़त के साथ 52 हफ्तों के शिखर 95.10 रुपए पर जा पहुंचा। चूंकि यह बढ़त पिछले बंद भाव से 4.97 फीसदी अधिक है तो 5 फीसदी सर्किट ब्रेकरऔरऔर भी

अगले महीने मई की पहली तारीख या उसके बाद पब्लिक इश्यू लानेवाली किसी भी कंपनी को अपने शेयर इश्यू बंद होने के 12 दिन के भीतर स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध या लिस्ट करा देने होंगे। पूंजी बाजार नियामक संस्था सेबी ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। इसमें इश्यू बंद होने और लिस्ट होने की तारीखें शामिल हैं। इसलिए व्यावहारिक रूप से कंपनी के पब्लिक इश्यू और उसके शेयरों की लिस्टिंग के बीच का समय अब घटकर 10औरऔर भी

कुछ कंपनियां मूलभूत कारकों के आधार पर मजबूत होती हैं। लेकिन उनके शेयर भाव दबे पड़े रहते हैं। ऐसी ही एक कंपनी है जे बी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स। यह बेहद प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनी है। कंपनी ने दिसंबर 2009 की तिमाही में 202 करोड़ रुपए की आय पर 29.56 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। वित्त वर्ष 2008-09 में उसकी आय 737 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 78.74 करोड़ रुपए था, जबकि उसका प्रति शेयर लाभ (ईपीएस)औरऔर भी

अमेरिकी खाद्य व औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) के अनुमोदित दवा संयंत्रों की संख्या भारत में 175 है। यह अमेरिका के बाहर यूएसएफडीए की जांच के दायरे में आनेवाले दवा संयंत्रों की सबसे बड़ी संख्या है। भारत में ऐसे दवा संयंत्रों की संख्या साल 2007 में 100 के आसपास थी। असल में रैनबैक्सी, ल्यूपिन, सनफार्मा, अरबिंदो फार्मा व ऑर्किड केमिकल्स जैसी तमाम भारतीय कंपनियां अपनी जेनेरिक  दवाएं अमेरिकी बाजार में बेचती हैं। इसलिए यूएसएफडीए भारत तक में आकर इनकेऔरऔर भी

बाजार ने शुरू में थोड़ी घबराहट दिखाई। लेकिन आखिर में बंद हुआ 18,000 के थोड़ा और करीब पहुंचकर। और, यह कोई असामान्य बात नहीं है। मेरे मुताबिक इसमें कोई दो राय नहीं है कि बाजार अब ज्यादा चुनौतीपूर्ण और जटिल हो चुका है। बाजार (बीएसई सेंसेक्स) 8000 अंक से 18,000 अंकों तक का लंबा फासला तय कर चुका है। इसलिए अगर आप सोचते हैं कि आप बाजार के धुरंधर हो गए हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकतेऔरऔर भी