बाजार लगातार गिर रहा है। वजह बताई जा रही है यूरोप का ऋण संकट। लेकिन यूरोप का नेतृत्व संकट के समाधान की पुरजोर कोशिश में लगा है। पूरे सप्ताहांत यूरो जोन के 16 देशों के नेता इसी मशक्कत में जुटे रहे। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीस 2012 तक संकट से पूरी तरह बाहर निकल आएगा। इस तरह विश्व मंच पर हल्का-सा आशावाद दिख रहा है। ऐसे में संभव है कि आज भारतीय बाजार पर इसऔरऔर भी

संजय तिवारी बहुत से लोग नहीं जानते कि यह 2-जी और 3-जी क्या बला है?  लेकिन इसी 2-जी और 3-जी के नाम पर अरबों के घोटाले का आरोप है। हाल में ही संसद से लेकर सड़क तक जिस स्पेक्ट्रम घोटाले की गूंज के साथ संचार मंत्री ए राजा के इस्तीफे की मांग उठी थी, उसके मूल में इसी 2-जी, थ3-जी का खेल है। लेकिन असली सला सवाल यहां न 2-जी, न ही 3-जी और न ही एऔरऔर भी

शिरीष खरे ‘‘मैं शांति और हंसी-खुशी यहां से नहीं जा सकती। यहां से जो तूफान उठा है, उसे यहीं छोड़कर नहीं जा सकती। इस शहर ने मुझे दर्द और परेशानियों से भरे जो लंबे-लंबे दिनरात दिए हैं, उनकी शिकायत किए बगैर, मैं यहां से कैसे जा सकती हूं?’’ मुंबई में ऐनी के दिनरात अब गिने जा रहे हैं। बहुत जल्द ही वह इस शहर को नमस्कार कहकर अपने देश फिनलैंड लौट जाएंगी। मगर जाने के पहले, उन्हेंऔरऔर भी

कहा जाता है कि झगड़े में किसी का फायदा नहीं होता है। लेकिन यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (यूलिप) को लेकर सेबी व इरडा के बीच छिड़ी जंग से इंश्योरेंस ग्राहकों का फायदा ही हो रहा है। पिछले कुछ समय से बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (इरडा) ने यूलिप को बेहतर करने की ठान ली है। इरडा ने एक नई पहल के जरिए जीवन बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान का आकर्षण भी बढ़ाया है। आगामी 1 जुलाई सेऔरऔर भी

टर्म इंश्योरेंस वास्तव में बेसिक इंश्योरेंस है। बीमा के अन्य रूप मसलन – यूलिप, मनी बैक, ग्रुप इंश्योरेस, मेडिकल इंश्यारेंस, वाहन बीमा, पेंशन प्लान तो काफी बाद में आए। इन सबका उद्गम टर्म इंश्योरेंस है। ध्यान रहे कि बीमा व निवेश या बचत दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं। इन दोनों को एक चश्में से नहीं देखा जाना जाहिए क्योंकि निवेश व बचत के जहां कई एवेन्यू यानी तरीके हैं वहीं बीमा का तरीका सिर्फ एक ही है।औरऔर भी

कंपनी में चेयरमैन से ज्यादा अहमियत सीईओ की होती है। उसी तरह जैसे देश में राष्ट्रपति से ज्यादा अहमियत प्रधानमंत्री की होती है। कंपनी का सीईओ जो चाहे कर सकता है, हालांकि उसे निदेशक बोर्ड की मंजूरी लेनी पड़ती है। हमारा प्रधानमंत्री भी चाहे जो फैसले कर सकता है, हालांकि उसे पार्टी के हाईकमान और मंत्री-परिषद को साथ लेकर चलना होता है। पर मुश्किल यह है कि हमारे यहां देश से लेकर कंपनियों तक में खानदारी सफाखानाऔरऔर भी

चीज हमारी आंखों के सामने रहती है, पहुंच में रहती है, फिर भी नहीं दिखती क्योंकि हमें उसके होने का भान ही नहीं होता। भान होता भी है तो उसे गलत जगह खोजते रहते हैं। कस्तूरी कुंडलि बसय, मृग ढूंढय बन मांहि।और भीऔर भी

स्थिरता आभासी है। होती नहीं, दिखती है। इस समूची सृष्टि में स्थिरता जैसी कोई चीज नहीं है। सब कुछ चल रहा है। बन रहा है या मिट रहा है। ठहर गए तो समझिए कि हम अपनी उल्टी गिनती खुद शुरू कर रहे हैं।और भीऔर भी

अनिल अंबानी की तमाम कंपनियों के शेयर आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आंधी के शिकार हो गए। आरएनआरएल का शेयर बीएसई में 22.82 फीसदी गिरकर 52.75 रुपए पर बंद हुआ, लेकिन दिन में 50 रुपए पर जाकर 52 हफ्ते की तलहटी पर भी पहुंच गया। यही हाल एनएसई में भी रहा। 23.77 फीसकी की गिरावट के साथ बंद हुआ 52.10 रुपए पर लेकिन 49.75 के न्यूनतम स्तर पर जाकर। जानकारों के मुताबिक यही माकूल वक्त हैऔरऔर भी

रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (आरएनआरएल) के चेयरमैन अनिल अंबानी ने कहा कि वे रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के साथ गैस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं और इस पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की कंपनी की कोई योजना नहीं है। दोपहर करीब ढाई बजे उन्होंने एक कॉन्फ्रेंस कॉल में अपना लिखित बयान पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा – हम समझते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने गैस सप्लाई करार पर दिशानिर्देश देकर आरएनआरएल के 25 लाख सेऔरऔर भी