कोई भी कंपनी आज क्या है, निवेश के लिए इससे ज्यादा अहम होता है कि उसके भावी विकास का ग्राफ कहां जाता दिख रहा है। जब तक आपको कंपनी समझ में नहीं आ जाती, उसकी मजबूती और भावी विकास के बारे में आप आश्वस्त नहीं हो जाते, तब तक कतई निवेश न करे। आखिर आपकी गाढ़ी कमाई कहीं भागी तो नहीं जा रही। बस यह है कि अभी बैंक उसका फायदा उठा रहा है। आप समझदार होऔरऔर भी

आदमी को वहीं से उठना चाहिए जहां वह गिरता है। जीवन में यही नियम लागू होता है। जो गिरते कहीं और हैं और उठना कहीं और से चाहते हैं वे कभी खड़े नहीं हो पाते, दौड़ना तो बहुत दूर की बात है।और भीऔर भी

आनुवाशिंक रूप से संवर्धित फसलों की खेती पर सरकार द्वारा रोक के बाद जीएम लॉबी एक बार फिर से सक्रिय हो गई है। ये जीएम समर्थक समूह अब राज्यों में अपने पक्ष में राय जुटाने में लगे हैं  जिससे कि किसानों को जीएम फसलों की खेती की अनुमति मिल सके। एबल (एशोसिएशन आफ बायोटेक लेड इंटरप्राइज) के कार्यकारी निदेशक शिवरमैया शांताराम ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी फसलों की खेती के लाभों के बारे में उन्हें समझाने केऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के नेताओं, कॉरपोरेट दिग्गजों और पत्रकारों से बातचीत के सभी 5,800 टेप की विषय वस्तु सार्वजनिक करने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर केन्द्र सरकार से प्रतिक्रिया मांगी है। न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति एस एस निज्जर ने आज केंद्र को नोटिस जारी करते हुए इस मामले की सुनवाई दो फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है। न्यायालय ने यह आदेश ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रस्ट लिटिगेशन’औरऔर भी

एनआईआईटी लिमिटेड मूल कंपनी है और एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज 2004 में उससे अलग निकालकर बनाई गई कंपनी है। आप जानते ही होंगे कि एनआईआईटी 1981 में बनी आईटी शिक्षण की प्रमुख कंपनी है। धीरे-धीरे उसने सॉफ्टवेयर भी बनाना शुरू कर दिया। साल 2002 तक यह स्थिति हो गई कि उसके कारोबार का काफी बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर बिजनेस से आने लगा तो उसने 2004 में सॉफ्टवेयर बिजनेस को अलग कंपनी एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज में डाल दिया है। इस समय एनआईआईटीऔरऔर भी

सोचिए, आपके फैसले कोई दूसरा कैसे ले सकता है! अपने फैसले खुद लेने की आदत डालें और उसकी जवाबदेही भी लें। तभी आप गलत फैसलों से सही फैसलों तक पहुंचने का हुनर सीख पाएंगे।और भीऔर भी

शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि बीते सप्ताह मामूली सुधार के बाद 25 जनवरी को बहुप्रतीक्षित भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक से इस सप्ताह बाजार की दिशा निर्धारित होगी। रेपो व रिवर्स रेपो दर 0.25 फीसदी बढ़ सकती है, जबकि सीआरआर को 6 फीसदी पर यथावत रखे जाने की उम्मीद है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में 21 जनवरी को समाप्त सप्ताह में उतार-चढ़ाव का रूख दिखाई पड़ा और सप्ताहांत में यह 0.77औरऔर भी

टीसीआई फाइनेंस (बीएसई – 501242, एनएसई – TCIFINANCE) लगातार सर्किट पर सर्किट तोड़े जा रहा है। 14 जनवरी शुक्रवार को 72.30 रुपए था। इसके बाद लगभग हर दिन 5 फीसदी का सर्किट लांघते-लांघते शुक्रवार 21 जनवरी को 92.10 पर पहुंच गया। अमित जी की तरफ से जब हमने इसे 4 जनवरी को खरीदने की सिफारिश की थी, तब इसका भाव 47.95 रुपए था। इस तरह दो हफ्ते में यह 92 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुका है। वैसेऔरऔर भी

किराये का मकान है। यहां अपनी निशानियां पीछे छोड़कर क्यों जाने का? न जाने कैसे लोग आएं, इनके साथ क्या सलूक करें, क्या पता! इसलिए सब कुछ समेट लेने का, एक-एक निशान मिटा देने का।और भीऔर भी

अध्यात्म कहता है अपने को जानो। निवेश का मूल सिद्धांत भी कहता है अपने को जानो। जानो कि कितना जोखिम उठा सकते हो, अभी व बाद की जरूरतें हैं क्या हैं, लक्ष्य बनाओ। तब निवेश करो।और भीऔर भी