शब्दों से परे
हर शब्द के साथ कोई न कोई छवि या पूर्वाग्रह जुड़ा है। शब्दों के परे वह अवस्था है जब हम शुद्ध क्रिस्टल की तरह निर्मल व पारदर्शी बन जाते है। पर वहां शब्दों से भागकर नहीं, मथकर ही पहुंचा जा सकता है।और भीऔर भी
हर शब्द के साथ कोई न कोई छवि या पूर्वाग्रह जुड़ा है। शब्दों के परे वह अवस्था है जब हम शुद्ध क्रिस्टल की तरह निर्मल व पारदर्शी बन जाते है। पर वहां शब्दों से भागकर नहीं, मथकर ही पहुंचा जा सकता है।और भीऔर भी
पूर्व दूरसंचार मंत्री अरुण शौरी ने इस आरोप को पूरी तरह मनगढ़ंत करार दिया कि उन्होंने वर्ष 2003 में नए लाइसेंसों के लिए बोली लगाये जाने की प्रक्रिया के विपरीत ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति अपनाने को मंजूरी दी थी। वर्ष 2001 से 2009 के बीच दूरसंचार मंत्रालय द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं की पड़ताल कर चुके सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिवराज पाटिल की समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2003 में बिना किसी दिशानिर्देशऔरऔर भी
दिसंबर 2010 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों को देखें तो दिसंबर 2009 की तुलना में यह केवल 1.6 फीसदी बढ़ा है। यह पिछले बीस महीनों में औद्योगिक उत्पादन में हुई सबसे कम वृद्धि दर है। लेकिन अगर अप्रैल-दिसंबर 2010 के नौ महीनों की बात करें तो औद्योगिक विकास दर पिछले वित्त वर्ष 2009-10 की समान अवधि के बराबर 8.6 फीसदी है। रेटिंग एजेंसी केयर का कहना है कि इस दिसंबर में आईआईपी में कम वृद्धिऔरऔर भी
केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए डीबी रीयल्टी के प्रबंध निदेशक शाहिद उस्मान बलवा के साथ संबंधों से इनकार किया है। उन्होंने मीडिया में इस बाबत आई खबरों को निराधार बताया है। एनसीपी नेता ने दिल्ली में शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने मीडिया की खबरों को पढ़ा है। उनके मुताबिक वह 32 साल का है और मैं 70 का। वह कैसे मेरा दोस्त हो सकता है। आपकोऔरऔर भी
केंद्र सरकार के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) का प्रस्तावित 8000 करोड़ रुपए का एफपीओ (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) मार्च में आएगा। शुक्रवार को दिल्ली में धातु व खनिज पर आयोजित एक सम्मेलन के दौरान इस्पात सचिव पी के मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘वर्तमान स्थिति में सेल का एफपीओ चालू वित्त वर्ष के अंत तक आ सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे देख रहे हैं, लेकिन हमें बाजार की स्थितियोंऔरऔर भी
अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) क दावा है कि उसने समूह की कंपनियों के खिलाफ निराधार व सनसनीखेज अफवाहें फैलानेवाले शेयर ब्रोकरों की पहचान कर ली है और सेबी से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। समूह का कहना है कि ये ब्रोकर बड़ी संख्या में ई-मेल और एसएमएस भेज रहे थे और समूह की कंपनियों के खिलाफ निराधार व सनसनीखेज आरोप के साथ बड़ी संख्या में निवेशकों को फोन कर रहे थे। बता देंऔरऔर भी
मधुसूदन सिक्यूरिटीज केवल बीएसई (कोड – 511000) में लिस्टेड है और फिलहाल ट्रेड टू ट्रेड श्रेणी में होने के नाते टी ग्रुप में पड़ी है, यानी इसमें डे-ट्रेडिंग नहीं, डिलीवरी वाले सौदे ही हो सकते हैं। 4 फरवरी से इस पर 5 फीसदी का ऊपरी सर्किट लगना शुरू हुआ है। तब इसका भाव पिछले दिन के बंद भाव 58.50 रुपए से बढ़कर 61.40 रुपए पर पहुंचा था और इसमें हुआ वोल्यूम 4.88 लाख शेयरों का था। उसकेऔरऔर भी
समाज में जब तक हम बहुत बड़े नहीं बन जाते, तब तक इस्तेमाल किए जाने का खतरा हमेशा हमारे ऊपर मंडराता रहता है। हम मगन होकर काम करते हैं। लेकिन अनजाने में इस्तेमाल हो जाते हैं।और भीऔर भी
अनिल अंबानी समूह (एडीएजी) ने अपनी कंपनियों पर हुए हमले को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ हमला बताया है। उसका कहना है कि पिछले दो हफ्ते से जिस तरह मंदड़ियों के गैर-कानूनी कार्टेल ने बाजार पर चोट की है, उससे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को तीन लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। समूह की तरफ से उसके प्रबंध निदेशक गौतम दोशी ने कहा कि समूह की कंपनियों के शेयर मंदड़ियों की खेमेबंदी के शिकार हुए हैं।औरऔर भी
देश का मूल प्रेस कानून 1867 यानी अंग्रेजों के जमाने का है। इसमें पहला बड़ा संशोधन 1955 में पहले प्रेस आयोग की सिफारिशों के आधार पर किया गया। इसके साल भर बाद 1956 में रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया (आरएनआई) के कार्यालय ने काम करना शुरू किया। प्रेस कानून में आखिरी संशोधन करीब 27 साल पहले 1983 में किया गया था। विदेशी मीडिया के आने के मद्देनजर इसमें फिर बड़े संशोधन पर विचार किया जा रहा है।औरऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom