अमेरिका अपने शेयर बाजारों में जारी गिरावट को रोकने के लिए शॉर्ट सेलिंग पर बैन लगा सकता है। असल में बराक ओबामा की सरकार अंदर ही अंदर मानती है कि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) की तरफ से डाउनग्रेड किया जाना विशुद्ध रूप से आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक कदम है। इसलिए इसके पीछे काम कर रही लॉबी को बेअसर करना जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक एस एंड पी के इस कदम को बदले की कार्रवाई भीऔरऔर भी

केला हमारे-आपके भले ही हमेशा से फल रहा हो, लेकिन भारत सरकार उसे अभी पिछले महीने तक सब्जी ही मानती रही है। अंग्रेजों के समय से चले आ रहे इस सरकारी नाम से केले के किसानों व व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा था। अब फल मान लेने से प्राकृतिक आपदा की स्थिति में केला किसानों को खटाखट अच्छा मुआवजा मिल जाएगा। वहीं रेलवे से व्यापारियों को माल भेजने के लिए रैक आसानी से मिल जाएगी। रैकऔरऔर भी

शेयर बाजार का माहौल अब भी इतना थिर नहीं हुआ है कि उसमें आराम से गोता लगाकर अच्छे शेयरों को सस्ते भाव पर पकड़ लिया जाए। सूचकांक में शामिल शेयरों की चाल अलग है। इससे अलग ब्रोकर भाई लोग मिड कैप व स्मॉल कैप शेयरों को बराबर धुने हुए हैं। सक्रिय निवेशक व ट्रेडर मार्जिन कॉल दे नहीं पा रहे हैं तो ब्रोकर ऐसे शेयरों को बेचे जा रहे हैं। वैसे एक-दो दिन में बाजार सामान्य होऔरऔर भी

छोटी-छोटी बातों में पैटर्न खोजना अच्छी बात नहीं है। पूरे संदर्भ के बिना पैटर्न हमेशा गलत निष्कर्षों या अंधविश्वास की तरफ ले जाते हैं। इसलिए पैटर्न बनता भी है तो उसे संयोग मानकर छोड़ देना चाहिए।और भीऔर भी

एक जानी-मानी जीवन बीमा कंपनी अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के विज्ञापन में लोगों से सवाल पूछती है कि क्या आपका हेल्थ इंश्योरेंस स्वस्थ है? अगर यह सवाल आपसे पूछा जाए तो शायद आप अपने कंधे उचका कर जवाब देंगे – मुझे नहीं मालूम। पर आपका जवाब सही नहीं है। यह हमारी राय में लापरवाही से भरा विचार है। अगर आप सेहत संबंधी किसी समस्या के आ जाने पर आर्थिक चिंताओं से मुक्ति पाना चाहते हैं तो जैसेऔरऔर भी

अमेरिका में हड़कंप मचाने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) ने चेतावनी दी है कि वह भारत, जापान और मलयेशिया जैसे देशों की क्रेडिट रेटिंग भी घटा सकती है। फिलहाल भारत की क्रेडिट रेटिंग बीबी (-) है। निवेश के लिहाज से यह रेटिंग का काफी निचला स्तर माना जाता है। कमजोर रेटिंग से भारत सरकार समेत भारतीय कंपनियों को विदेशी कर्ज के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ता है। एस एंड पीऔरऔर भी

सरकार चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश से 40,000 करोड़ रुपए जुटाने के लक्ष्य को नीचे ला सकती है। केंद्रीय विनिवेश सचिव मोहम्मद हलीम खान ने सोमवार को मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह इशारा किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार शेयर बाजार में चल रही उछल-पुछल के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित विनिवेश लक्ष्य को घटाने पर विचार कर रही है, तब उनका कहना था, “यहऔरऔर भी

इस साल जून महीने में देश में आया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 565.6 करोड़ डॉलर रहा है। यह पिछले साल जून में आए 138 करोड़ डॉलर के निवेश से जहां लगभग 310 फीसजी ज्यादा है, वहीं 2000-01 के बाद के पिछले ग्यारह वित्त वर्षों में किसी भी महीने में आया दूसरा सबसे ज्यादा एफडीआई है। यह तथ्य एफडीआई के रूप में आई इक्विटी पर रिज़र्व बैंक की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों से उजागर हुआ है। इनऔरऔर भी

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय निवेश फर्म गोल्मैन सैक्श ने भारत की रेटिंग बढ़ाकर ‘मार्केट वेट’ कर दी है। पिछले साल से अभी तक उसने भारत को इससे कम ‘अंडर वेट’ की श्रेणी में रखा हुआ था। रेटिंग बढ़ाने का मतलब यह हुआ कि भारतीय शेयर बाजार को लेकर उसकी धारणा में हाल-फिलहाल थोड़े समय के लिए तेजी की हो गई है। गोल्डमैन सैक्श ने रेटिंग बढ़ाने की वजह कच्चे तेल में आ रही गिरावट और नीतिगत सुधारों पर सरकारऔरऔर भी