किसानों को बेस रेट से कम ब्याज पर कर्ज, वित्त मंत्री ने साफ दिया संकेत

बैंकों में बेस रेट की नई प्रणाली लागू होने में बस दो दिन बचे हैं। रिजर्व बैंक ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि किसानों को बेस रेट से कम ब्याज पर ऋण दिए जा सकते हैं या नहीं। लेकिन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज, सोमवार को मुंबई में आयोजित एक समारोह में साफ कर दिया कि किसानों को 5 फीसदी ब्याज पर भी ऋण दिया जा सकता है जो जाहिर तौर पर किसी भी हालत में किसी भी बैंक के बेस रेट से कम है।

वित्त मंत्री ने मध्य व पश्चिमी ज़ोन के राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के शीर्ष अधिकारियों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “वित्त वर्ष 2010-11 में सरकार ने ब्याज सहायता योजना के अंतर्गत लिए गए अल्पकालिक ऋण की द्रुत अदायगी करनेवाले किसानों के लिए ब्याज सहायता 1 फीसदी से बढ़ाकर 2 फीसदी कर दी है। इसका मतलब यह हुआ कि जो किसान अपना ऋण समय पर चुकाते हैं उन्हें केवल 5 फीसदी ब्याज दी देना पड़ेगा क्योंकि बैंक ऐसे ऋण उन्हें 7 फीसदी ब्याज पर देते हैं।”

बता दें कि 1 जुलाई 2010 से लागू हो रही बैंक रेट प्रणाली के मुताबिक कोई भी बैंक इससे कम ब्याज पर अपने किसी भी ग्राहक को कर्ज नहीं दे सकते। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्यातकों को रुपए में दिए जानेवाले उधार 1 जुलाई 2010 से बेस रेट या इससे अधिक ब्याज पर मिलेंगे और पिछली स्कीम 30 जून 2010 को खत्म हो जाएगी। लेकिन कृषि ऋण को लेकर उसने अलग से साफ-साफ कुछ नहीं कहा है। 9 अप्रैल 2010 को जारी अंतिम दिशानिर्देश तक में किसानों या कृषि ऋण पर ब्याज के बारे में एक शब्द अलग से नहीं कहा गया है।

यही वजह है कि बैंकों के बीच कृषि ऋणों की ब्याज दर को लेकर लगातार भ्रम बना हुआ है। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई को आज अपने बेस रेट की घोषणा करनी थी। लेकिन अब उसकी घोषणा कल, मंगलवार को करेगा क्योंकि उसे रिजर्व बैंक से अभी तक कुछ स्पष्टीकरण मिलने बाकी हैं। वैसे, एसबीआई के चेयरमैन ओ पी भट्ट ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत के दौरान बताया कि उनके बैंक का बेस रेट 8 फीसदी या इससे कम ही होगा।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते रिजर्व बैंक ने बैंकों की शीर्ष संस्था आईबीए (इंडियन बैंक्स एसोसिएशन) को एक पत्र भेजकर कहा था कि निर्यात व कृषि ऋण पर सरकार की ब्याज सहायता योजना पर बेस रेट के मानकों का असर नहीं पड़ेगा। उसने इस पत्र में यह आश्वासन भी दिया था कि अगर सरकारी सहायता के बाद बैंकों द्वारा कमाए गए ब्याज की दर बेस रेट से कम हो जाती है तो इसे मानकों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। पुनर्गठित ऋणों के लिए भी बैंकों को नियमों में ढील दी जाएगी। ऐसे ऋणों पर ब्याज की दर बेस रेट से कम हो सकती है। लेकिन इस समले पर रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक व आधिकारिक रूप से कोई सफाई नहीं जारी की है।

वित्त मंत्री ने मध्य व पश्चिमी ज़ोन के राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सार्वजनिक बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के प्रमुखों की बैठक में यह भी कहा कि हमें कस्बाई और ग्रामीण इलाकों के लोगों की बचत को वित्तीय आस्तियों में तब्दील करना होगा। इस तरह के वित्तीय समावेश को बढ़ाने के लिए बैंकों व वित्तीय संस्थाओं को तकनीक की मदद लेनी होगी। उन्होंने बताया कि 2012 तक देश में 2000 से ज्यादा आबादीवाली सभी बसाहटों तक बैंकिंग सेवाओं पहुंचाने का लक्ष्य है। देश के मध्य व पश्चिमी ज़ोन के राज्यों में ऐसी 15,504 बसाहटें हैं जहां तक बैंकिंग सेवाएं अभी तक नहीं पहुंची हैं। आज की बैठक में महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश व गोवा के मुख्यमंत्रियों, छत्तीसगढ, दादर-नगर हवेली, दमन-दीव के वित्त मंत्रियों और गुजरात के प्रमुख वित्त सचिव के साथ नाबार्ड व रिजर्व बैंक के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

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