सिर्फ अपने या अपनों के लिए कमाने से नौकरी होती है, बरक्कत नहीं होती। बरक्कत तब होती है, दौलत तब बरसती है, जब आप किसी सामाजिक संगठन, संस्था या कंपनी के लिए कमाते हो।और भीऔर भी

एक ही समय एक ही तरह के लोग एक ही मकसद के लिए एक ही तरह का काम कर रहे होते हैं। अकेले-अकेले। साथ आ जाएं तो जबरदस्त अनुनाद पैदा कर सकते हैं। लेकिन साथ आएं भी तो कैसे?और भीऔर भी

हाथ पर हाथ धरे बैठना अपने विनाश को न्यौता देना है क्योंकि जब तक आप कुछ करते हो तभी तक जिंदा हो, नहीं तो नकारात्मक शक्तियां आपको खाना शुरू कर देती हैं। भव्य महल भी खंडहर बन जाते हैं।और भीऔर भी

आठ घंटे सोना, आठ घंटे काम करना और आठ घंटे मौज-मस्ती। दिन के चौबीस घंटे का यह आदर्श विभाजन है। ऐसा संतुलन बन जाता तो मजा आ जाता। लेकिन आदर्श भी कभी सच होते हैं भला!और भीऔर भी

जब आप किसी काम के इश्क में पड़ जाते हो तो कोई भी बाधा या विफलता आपको नहीं रोक पाती। दिल से ठान लेना ही आधी से ज्यादा सफलता की गारंटी है। बाकी तो गंगा अपने बहने की राह खुद खोज लेती है।और भीऔर भी

हर काम को अपना ही समझ कर करना चाहिए। पराया समझ कर करते हैं तो बोझ लगता है, किसी पर किया गया एहसान लगता है। वैसे भी सच तो यही है कि हम अपने अलावा और किसी पर एहसान नहीं करते।और भीऔर भी

दिमाग भी क्या स्वामिभक्त और जिद्दी किस्म का जीव है! जिस ढर्रे पर चला दो, चलता ही रहता है। जिस काम में लगा दो, बिना पूरा किए मानता ही नहीं। आप सो जाते हो, लेकिन इस बेचैन आत्मा को चैन नहीं पड़ता।और भीऔर भी

जब तक जीवित हैं, शरीर कभी ऑफ नहीं लेता, दिल दिमाग कभी ऑफ नहीं लेता। लेकिन हम हमेशा ऑफ के चक्कर में पड़े रहते हैं। मन काम से भागता है। यह काम जीवन की सहज धारा क्यों नहीं बन सकता?और भीऔर भी