मेक्सिको के कानकुन शहर में चल रहे जलवायु सम्मेलन में भारत और चीन सहित कई प्रमुख विकासशील देशों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे कार्बन उत्सर्जन में कटौती के संबंध में कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते को स्वीकार कर लें। लेकिन भारतीय पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे किसी समझौते को तत्काल मानने को तैयार नहीं है। इस सम्मेलन में अमेरिका, भारत और चीन कानूनी तौर पर बाध्यकारी समझौते को स्वीकार करनेऔरऔर भी

सेंचुरी टेक्सटाइल्स के 400 से बढ़कर 455 रुपए और एचडीआईएल के 164 से बढ़कर 200 रुपए तक पहुंचने ने साफ-साफ रीयल्टी सेक्टर में छिपी संभावनाओं की झलक दिखा दी है। यह बात आप खुली आंखों से देख सकते हैं। लेकिन भविष्य के गर्भ में छिपी लंबी कहानी आपको दिमाग लगाकर पढ़नी होगी। निफ्टी 5750 से पलटकर 5960 तक आ चुका है। बहुत से लोग अब भी कह रहे हैं कि यह तात्कालिक राहत की रैली है। लेकिनऔरऔर भी

मैं दस साल के नजरिए से अर्थव्यवस्था और बाजार व कॉरपोरेट क्षेत्र की स्थिति को देखता हूं। इसलिए महसूस कर सकता हूं कि क्या हो रहा है। लेकिन निवेशक तो दस घंटे की बात भी नहीं देख पाते। इसलिए बाजार के खिलाड़ियों के हाथ में अपनी गरदन पकड़ा देते हैं। मैं भी एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों को उनका पोर्टफोलियो बनाने-संभालने की सलाह देता हूं। लेकिन उन्हें नुकसान नहीं हुआ क्योंकि वे कभी भी कर्ज लेकर बाजारऔरऔर भी

भारत जितना निर्यात करता है, उससे कहीं ज्यादा आयात करता है। केवल माल के व्यापार की बात करें तो विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2009 में हमारा व्यापार घाटा (आयात व निर्यात का अंतर) 87 अरब डॉलर था। दुनिया में केवल ब्रिटेन (129 अरब डॉलर) और अमेरिका (549 अरब डॉलर) हम से ऊपर थे। माल व सेवा को मिला दें तो शुद्ध आयात में हम केवल अमेरिका से पीछे हैं। अमेरिका का आंकड़ा 699 अरबऔरऔर भी

मशहूर अंतरराष्ट्रीय पत्रिका फोर्ब्स ने साल 2010 के लिए दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 68 जानी-मानी हस्तियों को शामिल किया गया है। चौंकानेवाली बात यह है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति हु जिनताओ को दुनिया की सबसे ताकतवर हस्ती माना गया है। जिनताओ सूची में पहले नंबर पर हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को दूसरे नंबर पर रखा गया है। यह आश्चर्यजनक बात है क्योंकिऔरऔर भी

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि उनका देश अपना प्रतिस्पर्धी स्थान खो रहा है और भविष्य की नौकरियां भारत जैसे देशों के युवाओं के हाथ में होंगी, जहां शिक्षा क्षेत्र में भारी निवेश किया जा रहा है। उन्होंने अमेरिका के लोवा शबर में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में कहा, ‘‘आप देखिए चीन, भारत और ब्राजील जैसे देश शिक्षा प्रणाली और बुनियादी ढांचे में जमकर निवेश कर रहे हैं। कहां हम अव्वल होते थे, मसलन कॉलेजऔरऔर भी

अमेरिका में एच-1बी और एल-1 वीजा शुल्क में भारी वृद्धि का प्रस्ताव 14 अगस्त से प्रभावी हो गया है। इस वृद्धि से भारतीय आईटी कंपनियों पर सालाना 25 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। अमेरिका के इस कदम का भारत ने विरोध किया है। भारत का कहना है कि सीमा सुरक्षा विधेयक के तहत वीजा शुल्क में की गयी यह वृद्धि उसकी कंपनियों के लिए भेदभावपूर्ण है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा नेऔरऔर भी

चीन अब जापान को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और विश्व बैंक, गोल्डमैन सैक्स व दूसरी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं के आकलन पर यकीन करें तो वह 2025 तक अमेरिका को नंबर-1 के पायदान से हटा देगा। इससे पहले चीन साल 2005 में ब्रिटेन व फ्रांस और 2007 में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बना था। चीन इस समय दुनिया के समृद्ध व उभरते देशों के समूह जी-20औरऔर भी

ऑनलाइन समुदाय देश और राज्य की पारंपरिक सीमाएं तोड़ते जा रहे हैं। गूगल ‘गणराज्य’ के बाद अब सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक बहुत तेजी उभर रही है। इसे इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 50 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह संख्या ब्राजील (19.5 करोड़), इंडोनेशिया (23.2 करोड़) और अमेरिका (31 करोड़) की आबादी से ज्यादा है। अगर फेसबुक को आभासी देश मान लें तो यह दुनिया में चीन व भारत के बाद तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनऔरऔर भी