अगर आप ट्रेडर हैं तो आपको शेयर बाज़ार के उन्मादी स्वभाव से पार पाने की कला विकसित करनी पड़ेगी। लेकिन अगर आप लम्बे समय के निवेशक हैं तो इसको लेकर आपको खास चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि तीन से पांच साल या इससे ज्यादा वक्त में शेयर बाज़ार का अंतिम स्वभाव अच्छी कंपनियों में हो रहे मूल्य सृजन को सामने लाने का रहा है। हां, निवेश से पहले आपको कंपनी के बिजनेस, उसके पीछे सक्रिय उद्यमी केऔरऔर भी

अमेरिका से लेकर यूरोप, जापान, चीन जैसे बड़े देशों के अलावा सिंगापुर व मॉरीशस और तमाम छोटे देशों से काम कर रहे हैं करोड़ों ट्रेडर। फिर भारत के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय लाखों ट्रेडर। जिस तरह पेड़ों से ही जंगल बनता है, मगर जंगल का सम्मिलित स्वभाव अलग होता है, उसी तरह दुनिया के कोने-कोने से करोड़ों ट्रेडरों व निवेशकों से मिलकर बना शेयर बाज़ार का सामूहिक स्वरूप अलग होता है। रिटेल ट्रेडर व निवेशक तो शेयरऔरऔर भी

दुनिया के सफलतम निवेशक वॉरेन बफेट के गुरु बेंजामिन ग्राहम ने शेयर बाजार के लिए ‘मिस्टर मार्केट’ शब्द ईजाद करते हुए कहा था कि वह ऐसा काल्पनिक निवेशक है जो घबराहट, उन्माद व उदासीनता के भावों से भरा है। किसी उन्मत्त पागल जैसा उसका स्वभाव है जो कभी भी आशा व निराशा के मूड के बीच झूलने लगता है। एक आम निवेशक या ट्रेडर भी बाज़ार के इस स्वभाव की तस्दीक कर सकता है। लेकिन कल्पना केऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में जबरदस्त जुनून छाया है। इसे उन्माद या पागलपन भी कह सकते हैं। ऐसा नहीं होता तो जब निफ्टी 25.47 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, तब जुबिलैंट फूडवर्क्स 130.86 के पी/ई अनुपात पर नहीं ट्रेड हो रहा होता। कभी बैंकिंग व फाइनेंस स्टॉक्स को चढ़ाया जाता है तो कभी मेटल व रियल्टी स्टॉक्स को। मुठ्ठी भर ऑपरेटरों की मौजूदा रणनीति यह है कि चुनिंदा स्टॉक्स को धन का प्रवाह बढ़ाकर चढ़ाते जाओऔरऔर भी

अगर वित्तीय बाज़ार का कोई ट्रेडर अखबार या वेबसाइट से मिली किसी जानकारी को लाभ कमाने के मौके में न बदल सके तो उसका पढ़ना निरर्थक है। वैसे, बिजनेस अखबारों या चैनलों पर आई खबर चूसकर फेंक दी गई गन्ने की खोइया जैसी होती है। इसलिए कुछ अनुभवी ट्रेडर कहते हैं कि हमें दस मिनट से ज्यादा समय ऐसे अखबार पढ़ने पर नहीं जाया करना चाहिए। हेडलाइंस देखी और आगे बढ़ गए। वही लेख या समाचार पूराऔरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में जानकार निवेशक या ट्रेडर को कोई सर्टिफिकेट नहीं देता, न ही कोई माला पहनाता है। बाजार से होनेवाली कमाई ही उसका सर्टिफिकेट है, उपहार है। इसलिए यहां किसी को खुद मियां-मिठ्ठू नहीं बनना चाहिए। अपनी सफलता का राग बघारना हद दर्जे की मूर्खता है। आप कितने सफल हैं, यह आपका बैंक या ट्रेडिंग खाता बता देता है। इससे यह भी पता चलता है कि अभी आपको अपनी जानकारी कितनी बढ़ानी और व्यावहारिक बनानी है।औरऔर भी

सिद्धांत कहता है कि कंपनी का शेयर उसके इन्ट्रिन्जिक या अंतर्निहित मूल्य से नीचे लेना बाज़ार से लाभ कमाने का सबसे सुरक्षित तरीका है। दुनिया के सबसे सफल निवेशक वॉरेन बफेट ने यही तरीका अपनाकर अरबों-खरबों कमाए हैं। लेकिन अपने यहां आज की हकीकत क्या है? बहुत सारे शेयर अपने अंतर्निहित मूल्य से काफी नीचे ट्रेड हो रहे हैं, जबकि तमाम हल्की कंपनियों के शेयर धन के प्रवाह की बदौलत आसमान छूते जा रहे हैं। देश-विदेश काऔरऔर भी

शेयर बाज़ार का निवेश हमारे-आप के लिए कभी खुशी तो कभी गम का मामला है। शेयर उछलता जाता है तो खुशी होती है, जबकि बहुत सोच-समझकर लिया गया शेयर भी जब डूबने लग जाए या डूबता चला जाए तो हमारा गम हद से पार चला जाता है। लेकिन हमारा धन उछले या डूबे, इससे हर हाल में ब्रोकरों, स्टॉक एक्सचेंजों, सरकार और यहां तक कि पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी तक को बहुत खुशी होती है। कारण,औरऔर भी

शेयर बाज़ार के लिए देश की ब्याज दरों की कितनी अहमियत है, इसे इस तथ्य से समझा जा सकता है कि शेयरों का मूल्य निकालने के लिए दुनिया भर में स्वीकृत सीएपीएम (कैपिटल एसेट प्राइसिंग मॉडल) फॉर्मूले में सरकारी बांडों की ब्याज दर का इस्तेमाल किया जाता है। यह मॉडल रिस्क और रिटर्न के रिश्ते को जानने का मूलाधार है। साथ ही आप्शन प्राइसिंग का सूत्र भी ब्याज दर पर टिका है। इसके लिए बाकायदा ब्लैक-शोल्स फॉर्मूलाऔरऔर भी

ब्याज दरों की भ्रामक स्थिति का सीधा असर बैंकों व गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर पड़ना तय है। चूंकि निफ्टी-50 में बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं का भार सबसे ज्यादा 37.17% है तो इसका असर सारे बाज़ार पर पड़ेगा। सरकारी बांडों में लगभग सारा का सारा निवेश बैंकों का है तो बांडों के दाम घटने से उन्हें इसका प्रावधान करना पड़ेगा। साथ ही लोगों की बचत खींचने के लिए बैंकों को डिपॉजिट पर ब्याज दर बढ़ानी पड़ेगी। इसकीऔरऔर भी