एचईजी लिमिटेड का शेयर (बीएसई – 509631, एनएसई – HEG) नई से नई तलहटी बनाता जा रहा है। नए साल में 12 जनवरी को वह 233.15 रुपए तक चला गया तो वो उसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर था। कल 18 जनवरी को वह इससे भी नीचे 218.50 तक जाकर नया न्यूनतम स्तर बना गया। हालांकि बंद हुआ है 225.25 रुपए पर। कंपनी में ऐसा क्या हो गया जो उसका स्टॉक इस तरह गोता लगाता जा रहाऔरऔर भी

कोरेक्स, बीकासूल व जेलुसिल बनानेवाली बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी फाइजर का नाम शायद आप सबको पता ही होगा। इसके कुछ अन्य ब्रांड हैं डोलोनेक्स और मिनीप्रेस-एक्सएल। ये सभी ब्रांड बाजार से ज्यादा रफ्तार से बढ़ रहे हैं। कंपनी का वित्त वर्ष दिसंबर से नवंबर तक का है। नवंबर 2010 में खत्म वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी की आय 29 फीसदी बढ़कर 203 करोड़ रुपए से 261 करोड़ रुपए हो गई है, जबकि इस दौरान दवा उद्योगऔरऔर भी

सिन्टेक्स इंडस्ट्रीज का नाम है। पानी की टंकी की बात सोचें तो सिन्टेक्स का ही नाम आता है। हालांकि वह टंकी के अलावा भी बहुत कुछ बनाती है। रेटिंग एजेंसी केयर ने चार महीने पहले सितंबर में फंडामेंडल्स के आधार पर उसे पांच में चार का ग्रेड दिया था, यानी मूलभूत रूप से बहुत मजबूत कंपनी। शेयर (बीएसई – 502742, एनएसई – SINTEX) तब 362 रुपए पर था और केयर ने कहा था कि उसका अंतर्निहित मूल्यऔरऔर भी

अमारा राजा बैटरीज में इधर एक हलचल शुरू हुई है। यह एक्साइड के बाद देश के बैटरी बाजार की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। अच्छे प्रबंधन और रणनीति वाली कंपनी है। शेयर न बहुत ऊपर है, न बहुत नीचे। ऐसे में इसे पकड़ लेने में कोई हर्ज नहीं है। कल अमारा राजा बैटरीज (बीएसई – 500008, एनएसई – AMARAJABAT) के शेयरों का वोल्यूम बीएसई में अचानक पिछले हफ्ते के औसत 74 हजार से बढ़कर 5.62 लाख परऔरऔर भी

नए साल का पहला कारोबारी सत्र। आपके लिए क्या पेश करूं? उलझन में हूं। सोचता हूं निवेश के माध्यमों में सबसे ज्यादा जोखिम शेयरों में है तो क्यों न साल की शुरुआत सुरक्षा के बजाय भरपूर जोखिम से की जाए। पहले ही दिन बहुत बच-बचकर क्यों चला जाए! तो ऐसा शेयर जो 36.53 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इतने पी/ई का कोई भी शेयर महंगा ही कहा जाएगा। लेकिन जब पूरा सेक्टर तेजी सेऔरऔर भी

बॉम्बे डाईंग के साथ ऐसा क्या बुरा हो गया जो उसे इस सेटलमेंट में ठोंककर 575 रुपए से 458.75 रुपए तक पहुंचा दिया गया? आज भी यह 525.90 और 510.10 रुपए के बीच झूला  है। 2 दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच तो इसे  575 रुपए से गिराकर 458.75 रुपए पर पटक दिया गया। इसके डेरिवेटिव के साथ भी यही हरकत हुई है। इस दरम्यान कंपनी के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जो उसके स्टॉक कोऔरऔर भी

प्लेथिको फार्मास्यूटिकल्स जड़ी-बूटी पर आधारित फॉर्मूलेशन, पोषण से जुड़े उत्पाद और एलोपैथिक दवाएं बनाती है। जड़ी-बूटी व पोषण सेगमेंट में उसके प्रमुख ब्रांड हैं ट्राविसिल, माउंटेन हर्ब्स व कोच फॉर्मूला, जबकि एलोपैथिक दवाओं के उसके खास ब्रांड हैं थेरासिल और इफरटैब। लेकिन स्टॉक के लिहाज से इसमें सबसे खास बात यह लगती है कि प्रवर्तक इससे एकदम चिपके हुए हैं। उन्होंने कंपनी की 34.07 करोड़ रुपए की इक्विटी का 87.01 फीसदी अपने पास रख रखा है। एफआईआईऔरऔर भी

इस्पात इंडस्ट्रीज को कर्ज और घाटे के बोझ से मुक्त होने की राह मिल गई और जेएसडब्ल्यू स्टील इस सौदे के बाद मार्च 2011 तक देश में स्टील की सबसे बड़ी उत्पादन बन जाएगी। उसकी सालाना उत्पादन क्षमता हो जाएगी 143 लाख टन यानी सेल से भी ज्यादा। टाटा समूह भी यह गौरव नहीं हासिल कर सका। आर्सेलर को खरीदनेवाले लक्ष्मी निवास मित्तल भी भारत में यह हैसियत नहीं हासिल कर सके। उनके ही भाइयों – प्रमोदऔरऔर भी

पुंज लॉयड का शेयर (बीएसई – 532693, एनएसई – PUNJLLOY) दो महीने पहले 15 अक्टूबर को ऊपर में 134.20 रुपए तक गया था। इसके बाद गिरते-गिरते 26 नवंबर को 81 रुपए की तलहटी पर चला गया। अब बीते हफ्ते 16 दिसंबर तक ऊपर की दिशा पकड़कर 106.30 रुपए पर पहुंच गया। उसमें बढ़त का ताजा सिलसिला 10 दिसंबर को शुरू हुआ है। उसी दिन उसने थाईलैंड की कंपनी पीटीटी पब्लिक लिमिटेड से 1292 करोड़ और भारत कीऔरऔर भी

नवीन फ्लूवोरीन इंटरनेशनल (बीएसई – 532504, एनएसई – NAVINFLUOR) शुक्रवार को 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 253 रुपए तक गिरने के बाद 261.05 रुपए पर बंद हुआ है। पिछले एक महीने में यह 25 फीसदी से ज्यादा टूटा है। 12 नवंबर को ऊपर में 340 रुपए तक चला गया था और 10 दिसंबर तो 253 रुपए तक नीचे चला गया। अगर यह गिरावट आनी ही थी तो 19 अक्टूबर के आसपास आनी चाहिए थी क्योंकि उस दिनऔरऔर भी