सच कहें तो हम भारतीयों को जीत से मतलब है। हां, क्रिकेट का बोलबाला है तो इसके विश्व कप में जीत ने हम में गजब का जोश भर दिया। शनिवार की रात दीवाली की रात बन गई। लेकिन जोश में कुछ बातों का होश रखना जरूरी है। बुधवार 30 मार्च को मोहाली में भारत-पाक का सेमी-फाइनल मुकाबला दोपहर ढाई बजे से शुरू होना था। इससे आधे घंटे पहले दो बजे कुछ खास लोगों को मिले एक एसएमएमऔरऔर भी

विश्व स्तर पर मशहूर निवेश गुरु मार्क मोबियस का कहना है कि इस साल 2011 में भी भारतीय शेयर बाजार निवेशकों को लगभग 15 फीसदी रिटर्न देगा। उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक समारोह में कहा कि भारतीय शेयर बाजार साल 2011 में पिछले साल से बेहतर नहीं तो उतना रिटर्न दे ही देंगे। मोबियस टेम्प्लेटन एमर्जिंग मार्केट्स ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। पिछले साल 2010 में बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 15 फीसदी बढ़तऔरऔर भी

यह कोई अप्रैल फूल की बात नहीं है। बाजार जब 5200 पर था, तभी मुझे यकीन था कि यह 6000 की तरफ बढ़ेगा और इसने ऐसा कर दिखाया। मार्च काफी घटनाप्रधान महीना रहा, जब बजट और जापान ने बाजार को घेरे रखा। बजट ने माहौल बनाया तो जापान की आपदा ने शॉर्ट के सौदागरों को खेलने का मौका दे दिया। लेकिन बाजार जब अपना रुख पलटकर 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) के पार चला गया तोऔरऔर भी

विश्व कप का उन्माद अब भी भारतीय पूंजी बाजार पर छाया है। तेजी का सिलसिला जारी है। अचानक तीन बजे के आसपास बाजार ने एक गोता लगाया था। लेकिन अंत में निफ्टी व सेंसेक्स दोनों ही 0.80 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुए। आश्चर्य की बात तो यह है कि ताईवान व कोरिया के बाजार 2008 की ऊंचाई को पार कर गए हैं। यहां तक कि डाउ जोन्स भी भारी मूल्यांकन के साथ अब तक के ऐतिहासिकऔरऔर भी

बाजार होली के बाद से ही रंग में आता दिख रहा है। आज भी सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1.25 फीसदी की बढ़त हुई है। सेंसेक्स 18,200 और निफ्टी 5480 से ऊपर पहुंच गया है। मैं तो अब दिनों की गिनती में लग गया हूं क्योंकि मुझे यकीन है कि इस सेटलमेंट में निफ्टी 5600 तक पहुंच जाएगा। हालांकि बाजार के तमाम लोग जरा-सा बढ़ते ही गिरने की उम्मीद लगाए शॉर्ट सेलिंग शुरू कर देते हैं। वेऔरऔर भी

दुनिया के बाजार जापान की बात बिसूर चुके हैं, जबकि भारतीय बाजार अब भी अपनी लय पकड़ने की जद्दोजहद में लगा है। यह दिखाता है कि भारत की गति दुनिया से भिन्न है। विश्व बाजार से भारत के असंपृक्त या जुदा होने और पूरी तरह समाहित होने के दोनों ही सिद्धांत गलत साबित हो चुके हैं। असल में भारत में एक ही सिद्धांत चलता है और वह है गठजोड़ का सिद्धांत। यहां गठजोड़ से सरकार चलती है।औरऔर भी

जापान में हालात सामान्य होने लगे हैं। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के सभी छह रिएक्टरों में बिजली बहाल हो गई है। यहां से जापान में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी और वहां की नई मांग से दुनिया में जिंसों के भाव बढ़ सकते हैं। इस बीच लीबिया पर पश्चिमी देशों के सैन्य हमलों के बाद कच्चे तेल के दाम फिर उठने लगे हैं। लेकिन यह मसला भी जल्दी ही सुलझ जाएगा। गद्दाफी लंबे समय तक खुद को बचाएऔरऔर भी

बीते हफ्ते जापान जैसा बड़ा संकट हो गया। फिर भी भारतीय बाजार ने अपनी दृढ़ता व लचीलेपन का परिचय दिया है। निफ्टी 5400 से नीचे नहीं गया। यहां तक कि शुक्रवार को भी इसने बहादुरी से 5400 पर खुद को टिकाने की कोशिश की। लेकिन भारतीय बाजार पर मंदड़ियों के एकजुट हमले और बाजार में गहराई के अभाव के चलते यह 5400 से नीचे 5373.70 पर बंद हुआ। यह जानामाना सच है कि भारत सरकार को भारतीयऔरऔर भी

बाजार एक बार फिर 5400 से 5500 की रेंज तोड़कर नीचे चला गया। निफ्टी 5367 तक जा पहुंचा और मंदड़ियों की मौज हो गई है। वे आज तीन लंबी-लंबी अफवाहें फेंकने में कामयाब रहे। एक यह कि बीजेपी विकीलीक्स के ताजा खुलासे के बाद सरकार से सदन में बहुमत साबित करने की मांग करेगी, जिसकी कोई संभावना नहीं है। दो, जापान के फंड भारत से निकलना चाहते हैं जो फिर संभव नहीं है और इसे नोमुरा सिक्यूरिटीजऔरऔर भी

हर कोई कहे जा रहा था कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ा देगा। फिर भी देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के चेयरमैन ओ पी भट्ट की तरह बाजार को भी लग रहा था कि शायद ऐसा न हो। इसी उम्मीद में बाजार थोड़ा गिरकर तो खुला, लेकिन फिर पूरी तरह सुधर गया, जबकि दुनिया के बाजार गिरे हुए थे। लेकिन 11 बजे के बाद बजार में हवा-सी चल गई कि ब्याज दरें बढ़नी हीऔरऔर भी