देश में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार पिछले डेढ़ साल से रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाते रहने के बावजूद अच्छे स्तर पर बनी हुई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जून 2011 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) साल भर पहले की तुलना में 8.8 फीसदी बढ़ा है, जबकि उम्मीद की जा रही थी कि यह 5.5 से 5.7 फीसदी ही बढ़ेगा। इसने अर्थव्यवस्था में आ रही किसी भी तरहऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति एक बार दहाई के खतरनाक आंकड़े की तरफ बढ़ने लगी है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 30 जुलाई 2011 को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर 9.90 फीसदी दर्ज की गई है। इससे पिछले सप्ताह यह 8.04 फीसदी और उससे पहले पिछले सप्ताह 7.33 फीसदी ही थी। वैसे तसल्ली की बात यह है कि साल भर पहले इसी दौरान मुदास्फीति की दर 16.45औरऔर भी

बुधवार को सुबह-सुबह प्री-ओपन सत्र में सेंसेक्स के 386.80 अंक और निफ्टी के 123.70 अंक बढ़ जाने से वित्त मंत्री प्रणव मुखजी इतने प्रफुल्लित हो गए कि बोल पड़े कि भारतीय शेयर बाजार बहुत जल्द अगले कुछ दिनों में ही पटरी पर आ जाएगा। मुखर्जी ने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार मिलकर बाजार में स्थायित्व लाने की कोशिश में लगे हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिस्टम मेंऔरऔर भी

डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव अब 2013 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर बने रहेंगे। उनका तीन साल का मौजूदा कार्यकाल अगले महीने 5 सितंबर को पूरा हो रहा था। कहा जा रहा था कि उनकी जगह किसी और को लाया जा सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को सारी उहापोह को दूर करते हुए डॉ. सुब्बाराव का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया। मजे की बात यह है कि ये फैसला डॉ. सुब्बाराव के जन्मदिन 11औरऔर भी

इस साल जून महीने में देश में आया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 565.6 करोड़ डॉलर रहा है। यह पिछले साल जून में आए 138 करोड़ डॉलर के निवेश से जहां लगभग 310 फीसजी ज्यादा है, वहीं 2000-01 के बाद के पिछले ग्यारह वित्त वर्षों में किसी भी महीने में आया दूसरा सबसे ज्यादा एफडीआई है। यह तथ्य एफडीआई के रूप में आई इक्विटी पर रिज़र्व बैंक की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों से उजागर हुआ है। इनऔरऔर भी

सरकार ने सुबह से शाम तक बाजार को बचाने की हरचंद कोशिश कर डाली। यही वजह है कि बीएसई सेंसेक्स की गिरावट 1.82 फीसदी तक सिमट गई। सेंसेक्स अभी 16,990.18 अंकों पर चौदह माह के न्यूनतम स्तर पर है। लेकिन आगे इसमें ज्यादा सेंध लगने की उम्मीद कम है। वित्त मंत्रालय के सलाहकार, योजना आयोग व उद्योग संगठनों से लेकर खुद वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया है कि भारत की विकासगाथा अक्षुण्ण है और हमारी अर्थव्यवस्था केऔरऔर भी

आज का दिन शेयर बाजार में कत्लोगारद का दिन है। अमेरिका का संकट सारी दुनिया पर हावी है। मध्य-पूर्व के बाजारों में कुवैत में 2.51 फीसदी से लेकर इस्राइल की 6.59 फीसदी गिरावट ने झांकी दिखा दी है कि भारत व एशिया के बाजारों में क्या हो सकता है। हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में शेयर सूचकांक रविवार को बाजार खुले होने पर 2.2 फीसदी गिर चुका है। सेंसेक्स शुक्रवार को 2.19 फीसदी गिरकर 17,305.87 पर बंद हुआऔरऔर भी

देश जबरदस्त विरोधाभास से जूझ रहा है। खाद्यान्नों के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर थमने का नाम नहीं ले रही। 16 जुलाई को खत्म हफ्ते में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति नवंबर 2009 से बाद के सबसे न्यूनतम स्तर 7.33 फीसदी पर थी। लेकिन 23 जुलाई को खत्म हफ्ते मे यह फिर से बढ़कर 8.04 फीसदी पर पहुंच गई है। वैसे साल भर पहले तो और भी भयंकर स्थिति थीऔरऔर भी

लोकसभा में मुद्रास्फीति या महंगाई पर बहस जारी है। उम्मीद है कि गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर मुद्रास्फीति पर चिंता जताई जाएगी और सरकार से कहा जाएगा कि वह कीमतों पर काबू पाने के लिए कुछ और कदम उठाए। लेकिन बुधवार को सांसदों ने महंगाई के मसले पर जिस तरह शब्दों की तीरंदाजी दिखाई है, उसने साबित कर दिया है कि हमारे सांसद आर्थिक मामलों में कितने ज्यादा निरक्षर हैं। वह भी महंगाई जैसे मसले परऔरऔर भी