घटती विकास दर की हकीकत और आगे बढ़ जाने की उम्मीद के बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देश का 81वां आम बजट शुक्रवार को संसद में पेश कर रहे हैं। आम नौकरीपेशा लोगों को उम्मीद है कि आयकर छूट की सीमा 1.80 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपए की जा सकती है तो कॉरपोरेट क्षेत्र को लगता है कि एक्साइज ड्यूटी को 10 से 12 करके उनको पहले दी गई राहत वापस ले ली जाएगी। वहीं अर्थशास्त्रीऔरऔर भी

लगता है कि मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक की परीक्षा ले रही है। सरकार की तरफ से बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में सकल मुद्रास्फीति की दर पिछले पांच महीनों से घटते-घटते अचानक बढ़ गई। जनवरी में इसकी दर 26 महीनों के न्यूनतम स्तर 6.55 फीसदी पर पहुंच गई थी। लेकिन फरवरी में बढ़कर 6.95 फीसदी पर पहुंचा गई। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भरोसा जताया है कि चालू मार्च में यह 6.50 फीसदी पर आऔरऔर भी

माहौल जब देश के सबसे अहम सालाना दस्तावेज, बजट के आने का हो, तब खुद को किसी स्टॉक विशेष की चर्चा तक सीमित रखना ठीक नहीं लगता। वैसे भी सिर्फ शेयर या इक्विटी ही निवेश का इकलौता माध्यम नहीं है। आम लोग भी कहां शेयर बाजार में धन लगा रहे हैं! वित्तीय बाजार में उनके पसंदीदा माध्यम हैं निश्चित आय देनेवाले प्रपत्र। मुख्य रूप से एफडी। बांडों में निवेश का मौका मिले तो लोग कतई नहीं चूकते।औरऔर भी

बड़े-बड़े विद्वानों और अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि जनवरी में भारत का औद्योगिक उत्पादन बहुत बढ़ा तो साल भर पहले की अपेक्षा 2.1 फीसदी ही बढ़ेगा। इस निराशा की वजह थी कि अक्टूबर 2011 में औद्योगिक उद्पादन बढ़ने के बजाय 5.1 फीसदी घट गया था। इसके अगले महीने नवंबर में यह 5.9 फीसदी बढ़ा, पर दिसंबर में फिर बढ़ने की रफ्तार घटकर 1.8 फीसदी पर आ गई। लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से सोमवार को जारी त्वरितऔरऔर भी

बजट में एक ऐसी घोषणा है जिसे करने के लिए सरकार के खजाने से कुछ नहीं जाता। इसके लिए वित्त मंत्री को बस अपनी छटांक भर की जुबान चलानी पड़ती है। यह है कृषि ऋण के लक्ष्य में बढ़ोतरी। पूरी उम्मीद है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी अगले हफ्ते शुक्रवार, 16 मार्च को 2012-13 का बजट पेश करते वक्त कृषि ऋण का लक्ष्य 25 फीसदी बढ़ा देंगे। चालू वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण का बजट लक्ष्यऔरऔर भी

दो हफ्ते बाद 16 मार्च को पेश किए जानेवाले बजट में कई उत्पादों पर शुल्क की दरें बढ़ाई जा सकती हैं। साथ ही कर का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है। बजट में इस तरह के तमाम उपाय होंगे ताकि रिजर्व बैंक आर्थिक विकास को गति देने के लिए बेझिझक ब्याज दरों में कमी कर सके। यह कहना है योजना आयोग के प्रधान सलाहकार प्रोनब सेन का। सेन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हुई बातचीत में यहऔरऔर भी

शुक्रवार को विदेशी निवेश बैंक मैक्वारी ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में आगाह किया था कि भारत को कच्चे तेल का झटका लग सकता है क्योंकि रुपए में इसकी कीमत अब तक की चोटी पर पहुंच चुकी हैं। तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति को धक्का दे सकती हैं और ब्याज दरों को घटाए जाने की संभावना खत्म हो सकती है। मैक्वारी के बाद अब देश की दो प्रमुख रेटिंग एजेंसियों क्रिसिल और केयर रेटिंग्स ने कच्चे तेल केऔरऔर भी

जल्दी ही एक हज़ार रुपए से ज्यादा के सारे सरकारी लेनदेन इलेक्ट्रॉनिक रूप से किए जाने लगेंगे। यही नहीं, स्कूल अध्यापकों, आंगनवाड़ी कर्मियों और आशा (एक्रिडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट) कर्मचारियों की तनख्वाह भी सीधे उनके बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में जमा की जाएगी। यह कुछ सिफारिशें हैं आधार से जुड़े एकीकृत भुगतान तंत्र पर बने टास्क फोर्स की। टास्क फोर्स का मानना है कि इससे सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी को काफी हद तक खत्मऔरऔर भी

सरकार माल व सेवा कर (जीएसटी) को जल्दी से जल्दी लागू करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित सीमा शुल्‍क और केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्क विभाग के एक समारोह के दौरान यह बात कही। उनका कहना था कि जीएसटी देश के अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के इतिहास में सबसे अहम सुधार है। उद्योग व व्यापार जगत ही नहीं, तमाम अर्थशास्त्री व विशेषज्ञ मेंऔरऔर भी

मुद्रास्फीति की दर जनवरी में उम्मीद से कुछ ज्यादा ही घटकर 6.55 फीसदी पर आ गई है। यह थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित सकल मुद्रास्फीति का नवंबर 2009 के बाद का सबसे निचला स्तर है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में आर्थिक विकास दर के त्वरित अनुमान के घटकर 6.9 फीसदी रह जाने और मुद्रास्फीति के काफी हद तक काबू में आ जाने के बाद रिजर्व बैंक पर इस बार का दबाव बढ़ जाएगा कि वह ब्याज दरोंऔरऔर भी